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देश में शिक्षा को बढ़ावा देने में प्राइवेट स्कूल के योगदान को हम नहीं भुला सकते : रामेश्वर

देश में शिक्षा को बढ़ावा देने में प्राइवेट स्कूल के योगदान को हम नहीं भुला सकते : रामेश्वर
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रांची एक्शन इंडिया न्यूज़

स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) का सोमवार से नई दिल्ली में तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू हुआ। झारखंड के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री रामेश्वर उरांव, सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव तारिक अनवर तथा पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने इसका उद्घाटन किया।

इस मौके पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के संयुक्त सचिव संतोष षाड़ंगी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अधिवेशन में 28 प्रदेश एवं नौ केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उरांव ने कहा कि देश में शिक्षा को बढ़ावा देने में प्राइवेट स्कूल के योगदान को हम नहीं भुला सकते है।केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति बनाने में प्राइवेट स्कूलों के संचालकों को साथ रखना चाहिए था, क्योंकि ये हमारे बच्चों को पढ़ा रहे है।

अभी भी वक्त है जब केन्द्र सरकार को निजी स्कूल संचालकों से बात करनी चाहिए। उरांव ने कहा कि विकास मुख्य रूप से शिक्षा और उसके प्रचार-प्रसार से ही संभव है, सड़क चमकाने से कुछ नहीं होता है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आपको गरीब बच्चों को शिक्षित करना है और इसकी राशि सरकारों को देनी है, जो नहीं देते हैं। जब से यह कानून आया है, प्राइवेट स्कूल इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

उरांव ने कहा कि पूरे कोरोना काल में पठन-पाठन सबसे ज्यादा प्रभावित रही है। पिछले 16 महीनों में स्कूल-कॉलेज सब बंद रहे। केंद्र सरकार की ओर से 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में शैक्षणिक जगत के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गयी। पिछले दिनों रांची में पासवा के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की थी और स्कूल खोलने का मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के लिए ऑफलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गयी।

उन्होंने बताया कि उन्हें यह जानकारी मिली है कि प्राइवेट स्कूल के कई शिक्षकों का निधन संक्रमण काल में हो गया, कई स्कूल बंद हो गये। झारखंड में 45 हजार से ज्यादा निजी स्कूल है। गरीब से गरीब अभिभावक भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में ही पढ़ाना चाहते हैं ताकि उनके बच्चे इंग्लिश सीखे और बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की बराबरी कर सकें। मेरा स्पष्ट मानना है कि प्राइवेट स्कूल शिक्षा भी देते हैं और रोजगार भी देते हैं। अगर हम उधोग लगाने के लिए जमीन देते हैं तो स्कूल खोलने के लिए भी जमीन देना चाहिए। झारखंड में मात्र पांच प्रतिशत बच्चों को ही ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था रही। 95 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में स्कूल बंद हो गये।

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