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झारखंड

सात प्रतिभाओं को बिरसा मुण्डा ज्योति सम्मान व 10 फिल्मकारों को झारखण्ड फिल्म आर्ट अवार्ड मिला

सात प्रतिभाओं को बिरसा मुण्डा ज्योति सम्मान व 10 फिल्मकारों को झारखण्ड फिल्म आर्ट अवार्ड मिला
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खूंटी । एक्शन इंडिया न्यूज़

अखिल भारतीय सांस्कृति विकास महासंघ की रजत जयंती महोत्सव का आयोजन सोमवार को खूंटी नगर भवन परिसर में आयोजित किया गया। मौके पर सात प्रतिभाओं को बिरसा मुण्डा ज्योति सम्मान से नवाजा गया, जबकि 10 फिल्मकारों को झारखण्ड फिल्म आर्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। बिरसा मुण्डा ज्योति सम्मान के तहत समाजसेवा में उल्लेखनीय कार्य के लिए विकास जायसवाल (रांची) गीत-संगीत के लिए सुमित्रा बनर्जी (जमषेदपुर ), पत्रकारिता के लिए कुन्दन कुमार चैधरी (रांची), खेल के लिए ईपी रफायल हंस (रांची ), साहित्य के लिए हरिवंष प्रभात (पलामूु) एवं संगीत सेवा के लिए सिध्दार्थ राॅय 'बुबई ' (रांची) को सम्मानित किया गया।

फिल्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए झारखंड फिल्म आर्ट अवार्ड के तहत मोनिका मुण्डू को स्पेषल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मनित किया गया। बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड लाल विजय षाहदेव को डायन प्रथा पर आधारित फिल्म फुलमनिया के लिए दिया गया। जयकांत श्रीकांत को बेस्ट म्यूजिक काॅम्पोजर, मुकेश राम प्रजापति को बेस्ट मेल एक्टर ,कोमल सिंह को बेस्ट फीमेल एक्टर, ज्योति साहू को बेस्ट फीमेल सिंगर , पवन राय बेस्ट मेल सिंगर, सन्नी मंडल को बेस्ट सिनेमेटोग्राफी, संजय उपाध्याय को बेस्ट फिल्म एडिटर, अशोक गोप को न्यू कमर मेल एक्टर का अवार्ड दिया गया।

कार्यक्रम का उदघाटन करते हुए डाॅ श्याम प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ एसएन मुण्डा ने कहा कि सभ्यता संस्कृति में झारखण्ड काफी धनी है। इसकीे राक्षा के लिए अखिल भारतीय संस्कृति विकास महासंघ झारखण्ड प्रदेष विगत 25 वर्षों से काम कर रहा है, जो काफी सराहनीय है। उन्होंने कहा कि संगींत कला साहित्य ऐसे माध्यम है, जिसे मनाव ही नहीं बल्कि पशु, पक्षी, पेड़ पौधे पहाड़ भी प्रभावित होते हैं। इसलिए कला संस्कृति को बचाए रखना जरूरी है ।

इससे पूर्व अखिल भारतीय सांस्कृति विकास महासंघ के प्रदेष अध्यक्ष सह फिल्म निर्देशक व लेखक तपन कुमार घोष ने स्वागत भाषण करते हुए कहा कि मूल संस्कृति पहचान को बनाए रखने के लिए राष्ट्रवादी विचारधारा पर आधारित एक संस्कृतिक मंच की स्थापना 1995 में की गयी थी, जो आगे चलकर अखिल भारतीय संस्कृतिक विकास महासंघ के नाम से परिवर्तित हो गया। विभिन्न कलाए सहित्य संस्कृति को मंच देने का काम विगत 25 वर्षों से महासंघ करता आ रहा है। वह भी बिना सरकारी आर्थिक मदद के।

महासंघ के प्रदेश महासचिव मार्शल बारला, संगठन सचिव जितेन्द्र पान्डेय, सचिव प्रशांत कुमार, रौशन कुमार ने मुख्य अतिथि कुलपति डाॅ सत्यनारायण मुण्डाए उपविकास अयुक्त अरूण कुमार सिंहए जिला परिषद के उपाध्यक्ष ष्याम सुन्दर कच्छप को शॉल एवं गुलदस्ता देकर स्वागत किया।

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