Action India

वेयर हाऊस में खराब हो गया लाखों का सरकारी गेंहू

वेयर हाऊस में खराब हो गया लाखों का सरकारी गेंहू
X

नही हो सकीं जिम्मेदारों पर कार्यवाही

मण्डला।

जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पीडीएस में गंभीर लापरवाही और सरकारी धन की बर्वादी का नजारा देखने को मिल रहा है। गरीबों को दिए जाने वाले अनाज में भ्रष्टाचार का दंश और इस अनाज के रख-रखाव में बरती जा रही लापरवाही इस बात की ओर इंगित करती है कि जिले में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी केवल अपनी मनमर्जी से ही काम करना चाहते हैं। कलेक्टर के लाख प्रयास के बाद भी पीडीएस प्रणाली पर कोई सुधार नही हो पाया है।

जानकारी के अनुसार वर्षो से पदस्थ अमला और अनाज माफियाओं की मिलीभगत से जमकर घोटाला हो रहा है। ऐसा ही एक मामला मप्र वेयर हाऊसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन नारायणगंज टिकरिया का सामने आया है। यहॉ के दो सरकारी वेयर हाऊस गोदाम में रखा 2214 बोरी गेंहू पूरी तरह खराब यानि सड़ चुका है। टिकरिया वेयरहाऊस गोदाम में 814 बोरी गेंहू को दीमक खा चुका हैं तो वहीं उदयपुर वेयर हाऊस गोदाम में रखे 1432 बोरी गेंहू भी दीमक और कीड़ा मकोड़ा ने चट कर दिया है। दोनो गोदामों में रखा गेंहू वर्ष 2017-18 और वर्ष 2014-15 का बताया जा रहा है।

अधिकारियों की लापरवाही से गेंहू में बड़ी-बड़ी इल्लियां, तिरूला, दीमक, कीडा-मकोड़ा देखे जा सकते हैं इस गेंहू के खरीदी परिवहन और रख-रखाव में जमकर लापरवाही बरती गई। नतीजा यह गेंहू अब खराब हो चुका है जिसकी बाजार कीमत लाखों रूपये बताई जाती है। वहीं सूत्रों का कहना है कि इन दोनो गोदामों में रखे गेंहू को रातो-रात बदला गया था अच्छा साफ गेंहू को यहॉ से उठाकर घटिया गेंहू यहॉ रखा गया जो कीड़ा मकोड़ा और दीमक का भोजन बन गया है। इस गंभीर मामले में अब तक कोई कार्यवाही नही हो पाई है।

जिला प्रशासन के जिम्मेदार विभाग केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं। यह गेंहू आज भी दोनो गोदामों में देखा जा सकता हैं। जिम्मेदार अधिकारी अब रिटायर हो चुकें हैं और वे मौज की जिंदगी जी रहे हैं। इसकी भरपाई कौन करेंगा, कैसे होगी, यह सवाल आज भी जस का तस दिखाई देता है। वहीं वेयर हाऊस प्रबंधक टिकरिया, प्रबंधक एमपी सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन, प्रबंधक विपणन कार्यालय मण्डला के अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चला है।

बता दें कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली पीडीएस एक भारतीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली है। भारत में उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन तथा भारत सरकार द्वारा स्थापित और राज्य सरकारों के साथ संयुक्त रूप भारत के गरीबों के लिए सब्सिडी वाले खाद्य और गैर खाद्य वस्तुओं को वितरित किया जाता है।

1997 में वस्तुओं मुख्य भोजन में अनाज, गेहूं, चावल, चीनी और मिट्टी का तेल को उचित मूल्य की दुकानों जिन्हें राशन की दुकानों के रूप में भी जाना जाता है के एक नेटवर्क जो देश भर में कई राज्यों में स्थापित है के माध्यम से वितरित किया जाता है। सरकारी राशन की दुकानों पर जमकर भष्टचार होता है। राशन कब आता है और कब चला जाता है इसका कोई हिसाब नहीं रहता है। घंटो लाइन में लगे रहने के बाद भी लोगों को कैरोसीन, शक्कर और अनाज नहीं मिल पाता है। कई बार तो लोगों से सीधे वापस जाने के लिए कह दिया जाता है और इसके पीछे कारण बताया जाता है कि राशन आया ही नहीं है।

इस संबंध में मप्र वेयर हाऊसिंग एवं लॉजिस्टिक्स प्रबंधक जितेन्द्र विकछावल का कहना है कि टिकरिया और उदयपुर गोदाम में वर्षो से गेंहू रखा है जो पूरी तरह खराब हो चुका है। यह मेरे कार्यकाल का नही है। मेरी पदस्थापना अभी कुछ माह पहले हुई है।

Next Story
Share it