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मप्र में कल तक कांग्रेस के साथ रहे गोविन्‍द ने लिखा शिवराज सरकार के समर्थन में लेख

मप्र में कल तक कांग्रेस के साथ रहे गोविन्‍द ने लिखा शिवराज सरकार के समर्थन में लेख
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भोपाल। एक्शन इंडिया न्यूज़

विश्‍वास सिर्फ कार्यक्रमों, योजनाओं या सिर्फ भाषणों में ही नहीं जताया जाता, अपनी बात लेख के माध्‍यम से भी जन-जन तक सहजता के साथ पहुंचाई जा सकती है। कल तक मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस के साथ रहे और हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होकर मंत्री बनाए गए विधायक गोविन्‍द सिंह राजपूत ने अब मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उनके नेतृत्‍व में चल रही सरकार के कामों के समर्थन का एक नया तरीका अपनाया है।

उन्‍होंने बैठकों और कार्यक्रमों के बाद अपनी ओर से लेख लिखकर भी जता दिया है कि मध्‍य प्रदेश में सीएम शिवराज की अगुआई में सरकार जनहित में इतना अधिक अच्‍छा कार्य एवं फैसले ले रही है कि उसे विश्‍वास का कहीं कोई खतरा नहीं। जनता खुश है।

गोविंद सिंह राजपूत ने अपने इस लेख में लिखा है कि मुख्यमंत्री जो स्वयं एक गाँव में जन्में और पले-बढ़े हैं, ने किसान को तकलीफों के चक्रव्यूह से निकालने का मार्ग खोजा, जिससे पटवारी को भगवान समझने वाला किसान अब स्वयं को अन्नदाता महसूस करने लगा है। मुख्यमंत्रीजी की मंशा के अनुरूप राजस्व मंत्री के रूप में मैंने किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए राजस्व कार्यों में तकनीकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से कभी भी और कहीं भी की तर्ज पर सुविधा उपलब्ध कराने की पहल की है।

पिछले एक वर्ष में राजस्व सेवाओं को और अधिक सुगम एवं सहज बनाने एवं इन सेवाओं को किसानों और आम नागरिकों तक आसानी से पहुँचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का राजस्व अभिलेखों के लिये अधिक से अधिक उपयोग किया गया है। इसका परिणाम यह है कि भू-अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण नेशनल काउंसिल फॉर अप्लाइड इकोनामिक रिसर्च की रिपोर्ट में पूरे भारत में मध्यप्रदेश ने प्रथम स्थान मिला है।

उन्‍होंने लिखा है कि आज की स्थिति में प्रदेश के समस्त 56 हजार 761 ग्रामों के लगभग एक करोड़ 51 लाख भूमि स्वामियों के 3 करोड़ 97 लाख खसरा नंबरों का इलेक्ट्रॉनिक डाटाबेस तैयार किया जा चुका है। भूमि-बंधक की प्रक्रिया को ऑन लाइन कर किसानों को आसानी से ऋण प्राप्त करने, ऑन लाइन डायवर्सन मॉडयूल द्वारा डायवर्सन की सुविधा दी गई है। साथ ही नामांतरण और बँटवारे की प्रक्रिया को भी एकदम सरल बना कर उसे कम्प्यूटरीकृत किया है।

इस लेख में श्री राजपूत ने यह भी बताया है कि अब नागरिक घर बैठकर कभी भी और कहीं भी की तर्ज पर अपनी भूमि के खसरे, नक्शे एवं बी 1 की कॉपी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा एमपीऑनलाईन के 30 हजार से भी ज्यादा केन्‍द्र और लोक सेवा केन्द्रों से भी यह सेवा प्राप्त की जा सकती है। वहीं, मंत्री राजपूत लिखते हैं कि प्रदेश स्तर पर फसल का डाटा संकलित करने के साथ ही सारा एप से किसान अब अपनी फसल की जानकारी खुद दर्ज कर सकता है।

फसल की क्षति की जानकारी, कृषि एवं उद्यानिकी की जानकारी एक ही स्थान पर एकत्र की जा रही है। वहीं, मुख्यमंत्री किसान-कल्याण योजना में भी काम यहां बहुत प्रभारी रूप से हुआ है। पिछले वर्ष 22 सितंबर 2020 को प्रारंभ की गई इस योजना में वित्तीय वर्ष में दो समान किश्तों में प्रदेश के 57 लाख 50 हजार किसानों को एक हजार 150 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

स्वामित्व योजना में आबादी क्षेत्रों का सर्वे हो रहा है, अभी तक 2 हजार 800 गाँवों में आबादी सर्वे में 2 हजार गाँवों के नक्शे तैयार कर लिए गए हैं और 500 गाँवों के 38 हजार 473 भू-स्वामियों के अधिकार अभिलेख तैयार कर लिए गए हैं। जिसके बाद वे लोग भी बैंक लोन इत्‍यादि ले सकते हैं, जिनके घर तो है, लेकिन घर के कागज नहीं । इसी तरह से राजस्‍व मंत्री ने कोर्स नेटवर्क से सटीक सीमांकन की बात अपने लेख में की है।

अंत में प्रदेश के राजस्व एवं परिवहन मंत्री राजपूत लिखते हैं कि इस तरह प्रदेश में पिछले एक साल में मुख्यमंत्री चौहान की मंशा के अनुरूप किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं के हल के लिये राजस्व विभाग के अधीन बहुआयामी कार्य किये गये हैं।

विश्‍वास सिर्फ कार्यक्रमों, योजनाओं या सिर्फ भाषणों में ही नहीं जताया जाता, अपनी बात लेख के माध्‍यम से भी जन-जन तक सहजता के साथ पहुंचाई जा सकती है। कल तक मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस के साथ रहे और हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होकर मंत्री बनाए गए विधायक गोविन्‍द सिंह राजपूत ने अब मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उनके नेतृत्‍व में चल रही सरकार के कामों के समर्थन का एक नया तरीका अपनाया है।

उन्‍होंने बैठकों और कार्यक्रमों के बाद अपनी ओर से लेख लिखकर भी जता दिया है कि मध्‍य प्रदेश में सीएम शिवराज की अगुआई में सरकार जनहित में इतना अधिक अच्‍छा कार्य एवं फैसले ले रही है कि उसे विश्‍वास का कहीं कोई खतरा नहीं। जनता खुश है।

गोविंद सिंह राजपूत ने अपने इस लेख में लिखा है कि मुख्यमंत्री जो स्वयं एक गाँव में जन्में और पले-बढ़े हैं, ने किसान को तकलीफों के चक्रव्यूह से निकालने का मार्ग खोजा, जिससे पटवारी को भगवान समझने वाला किसान अब स्वयं को अन्नदाता महसूस करने लगा है। मुख्यमंत्रीजी की मंशा के अनुरूप राजस्व मंत्री के रूप में मैंने किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए राजस्व कार्यों में तकनीकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से कभी भी और कहीं भी की तर्ज पर सुविधा उपलब्ध कराने की पहल की है।

पिछले एक वर्ष में राजस्व सेवाओं को और अधिक सुगम एवं सहज बनाने एवं इन सेवाओं को किसानों और आम नागरिकों तक आसानी से पहुँचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का राजस्व अभिलेखों के लिये अधिक से अधिक उपयोग किया गया है। इसका परिणाम यह है कि भू-अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण नेशनल काउंसिल फॉर अप्लाइड इकोनामिक रिसर्च की रिपोर्ट में पूरे भारत में मध्यप्रदेश ने प्रथम स्थान मिला है।

उन्‍होंने लिखा है कि आज की स्थिति में प्रदेश के समस्त 56 हजार 761 ग्रामों के लगभग एक करोड़ 51 लाख भूमि स्वामियों के 3 करोड़ 97 लाख खसरा नंबरों का इलेक्ट्रॉनिक डाटाबेस तैयार किया जा चुका है। भूमि-बंधक की प्रक्रिया को ऑन लाइन कर किसानों को आसानी से ऋण प्राप्त करने, ऑन लाइन डायवर्सन मॉडयूल द्वारा डायवर्सन की सुविधा दी गई है। साथ ही नामांतरण और बँटवारे की प्रक्रिया को भी एकदम सरल बना कर उसे कम्प्यूटरीकृत किया है।

इस लेख में श्री राजपूत ने यह भी बताया है कि अब नागरिक घर बैठकर कभी भी और कहीं भी की तर्ज पर अपनी भूमि के खसरे, नक्शे एवं बी 1 की कॉपी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा एमपीऑनलाईन के 30 हजार से भी ज्यादा केन्‍द्र और लोक सेवा केन्द्रों से भी यह सेवा प्राप्त की जा सकती है। वहीं, मंत्री राजपूत लिखते हैं कि प्रदेश स्तर पर फसल का डाटा संकलित करने के साथ ही सारा एप से किसान अब अपनी फसल की जानकारी खुद दर्ज कर सकता है।

फसल की क्षति की जानकारी, कृषि एवं उद्यानिकी की जानकारी एक ही स्थान पर एकत्र की जा रही है। वहीं, मुख्यमंत्री किसान-कल्याण योजना में भी काम यहां बहुत प्रभारी रूप से हुआ है। पिछले वर्ष 22 सितंबर 2020 को प्रारंभ की गई इस योजना में वित्तीय वर्ष में दो समान किश्तों में प्रदेश के 57 लाख 50 हजार किसानों को एक हजार 150 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

स्वामित्व योजना में आबादी क्षेत्रों का सर्वे हो रहा है, अभी तक 2 हजार 800 गाँवों में आबादी सर्वे में 2 हजार गाँवों के नक्शे तैयार कर लिए गए हैं और 500 गाँवों के 38 हजार 473 भू-स्वामियों के अधिकार अभिलेख तैयार कर लिए गए हैं। जिसके बाद वे लोग भी बैंक लोन इत्‍यादि ले सकते हैं, जिनके घर तो है, लेकिन घर के कागज नहीं । इसी तरह से राजस्‍व मंत्री ने कोर्स नेटवर्क से सटीक सीमांकन की बात अपने लेख में की है।

अंत में प्रदेश के राजस्व एवं परिवहन मंत्री राजपूत लिखते हैं कि इस तरह प्रदेश में पिछले एक साल में मुख्यमंत्री चौहान की मंशा के अनुरूप किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं के हल के लिये राजस्व विभाग के अधीन बहुआयामी कार्य किये गये हैं।

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