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काम की तलाश में मजदूरों का तेजी से हो रहा पलायन

काम की तलाश में मजदूरों का तेजी से हो रहा पलायन
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  • जिले में कृषि आधारित उद्योग की असीम संभावना

हरदा। एक्शन इंडिया न्यूज़

जिले में काम की तलाश में मजदूरों व पढे-लिखे का तेजी से पलायन हो रहा है जिसे रोकने की दिशा में उल्लेखनीय कदम नहीं उठाया जा रहा है जबकि इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही है । शक्कर मिल, सोयाबीन फैक्ट्री दोनों बंद हो गई है जो उद्योग थे वे भी बंद हो गए हैं और मजदूरों का पलायन रोकने की बजाय जो उद्योग वे भी एक-एक करके बंद हो गए। सोयाबीन की फैक्ट्री भी बंद हो गई जो मजदूर काम करते थे वे भी खाली हो गए समूचे क्षेत्र में मजदूरों को काम मिल सके उसके लिए कोई फैक्ट्री नहीं है। जिसके कारण मजदूर सूरत, बॉम्बे, पंजाब, कर्नाटक, केरल आदि राज्यों में काम की तलाश में जा रहे हैं । खेत में काम करने के लिए भी मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं हालांकि मशीनीकरण के कारण कम मजदूरों की जरूरत पड़ती है इतने पर भी मजदूर नहीं मिल पाते हैं।

जिले में उद्योग स्थापित करने की पहल जिस तरह से होनी चाहिए उस तरह से हुई नहीं है । सुश्री नीलम मालवीय का कहना है कि यदि हुई होती तो निश्चित रूप से अब तक कोई ना कोई उद्योग स्थापित हो गया होता । शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है जो काम मिल गया था वह भी बंद हो गया है । शक्कर उद्योग के बंद होने से काफी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, बंद होने के कारण की समीक्षा कर उसे दूर करने की दिशा में उचित पहल नहीं की गई।

आदित्य प्रताप सिंह राजपूत का कहना है कि कच्चा माल की उपलब्धता बनाए रखने की दिशा में पहल की गई होती तो शायद ऐसी स्थिति नहीं बनती । अनाज उत्पादन में जिला प्रदेश में अग्रणी है, हरदा-खिरकिया मंडी में रिकॉर्ड अनाज की खरीदी होती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है अनाज उत्पादन का अनुपात क्या है, इस लिहाज से फैक्ट्री स्थापित कर किसानों को कच्चा माल उत्पादन का जिम्मा सौंपा जाए तो किसानों को उपज का अच्छा पैसा भी मिल जाएगा और उद्योग भी सुचारू रूप से संचालित हो जाएगा।

अखिलेश मल्हारे छिदगांव का कहना है कि उद्योग खुलें, तो मजदूरों को जीविकोपार्जन के लिए काम मिल जाएगा । घर पर परिवार के साथ-साथ रहकर जीविकोपार्जन कर सकेंगे। इस तरह की पहल नहीं होने से मजदूरों का पलायन नहीं रुक पा रहा है, यही हाल रहा तो निकट भविष्य में हालात बेहद चिंताजनक हो जाएंगे। हार्वेस्टर आदि के सहयोग से बड़ी मुश्किल से खेती काम हो रहा है। निकट भविष्य में हालात और खराब हो जाएगें। जिसको देखते हुए उद्योग स्थापित करने पर विशेष जोर देने की आवश्यकता है।

सदानंद कनेरिया रहटगांव का कहना है कि रोजगार नहीं मिलने के कारण मजदूरों का पलायन हो रहा है । यदि कामं मिलता तो मजदूर घर और परिवार को छोड़कर सूरत, बंबई, गुजरात, पंजाब आदि जगहों पर नहीं जाते। इस पर विचार नहीं किया जा रहा है। कृषि मंत्री कमल पटेल हरदा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। यदि वे कृषि उत्पाद से संबंधित उद्योग की स्थापना की पहल करते तो किसानों की हालत भी बदल जाती और शिक्षित मजदूरों को काम भी मिल जाता । उन्होंने कहीं ना कहीं इस दिशा में कोताही बरती जिसके कारण जिले में कहीं भी उद्योग स्थापित नहीं हो पाया और ना ही कोई संभावना नजर आ रही है।

जिले में जो उद्योग संचालित थे वे भी बंद हो गए शक्कर और सोयाबीन की फैक्ट्री बंद होने से मजदूर बेरोजगार हो गए। उन्हें काम की तलाश में दूसरे शहर जाना पड़ा, पलायन करना उनकी मजबूरी बन गई । महेश मालवीय का कहना है कि उद्योग को और बढ़ाने की पहल करने की बजाय जो चल रहे थे वे भी बंद हो गए । फैक्ट्री को बंद होने से रोकने की कोई पहल नहीं की गई उनकी समस्या को देख सुनकर समाधान का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया, जिसके कारण मजदूरों की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। जबकि जिले में खेती पर आधारित उद्योग को स्थापित करने की असीम संभावना है ।

जिले में उद्योग स्थापित करने के लिए कृषि मंत्री कमल पटेल से उल्लेखनीय पहल करने की मांग जोर पकड़ रही है। कृषि मंत्री पटेल इस दिशा में पहल करेंगे तो निश्चित रूप से किसानों एवं मजदूरों का पलायन रुकेगा और किसानों व मजदूरों के जीवनस्तर में सुधार आएगा । उद्योग स्थापना की महती आवश्यकता है इस दिशा में पुरजोर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है लोगों को विश्वास है कि मंत्रीजी इस दिशा में अवश्य पहल करेंगे।


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