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कम बारिश ने बढ़ाई पेयजल किल्लत, सिंध से पानी की सप्लाई हुई कम, भू-जल स्तर भी नीचे गिरा

कम बारिश ने बढ़ाई पेयजल किल्लत, सिंध से पानी की सप्लाई हुई कम, भू-जल स्तर भी नीचे गिरा
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बारिश कम ने बढ़ाई पेयजल किल्लत, सिंध से पानी की सप्लाई हुई कम, भू-जल स्तर भी नीचे गिरा

गुना । एक्शन इंडिया न्यूज़

गर्मी का सीजन शुरू हो गया है। जल स्त्रोत भी कब्जेधारियों की वजह से रीचार्ज नहीं हो पा रहे हैं। इस बार बारिश कम होने से भू-जल का स्तर भी नीचे चला गया है। इसकी वजह से ट्यूवबेलों से भी पानी की सप्लाई बंद हो गई है। गर्मी में पानी की किल्लत न आए,इसके लिए एक दशक पूर्व 72 करोड़ की जलावर्धन योजना गुना शहर को पानी सप्लाई देने के लिए बनी थी, इस योजना के तहत अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है।

सिंध नदी पर पानी रोकने के लिए 77 गेट लगना थे, लेकिन यह गेट अभी तक बनकर तैयार नहीं हो पाए हैं। जिससे एनीकट में पानी 8 मीटर की जगह 3 मीटर पानी रोका जा रहा है। पानी कम रुकने की वजह से शहर में अभी से पानी की किल्लत होने लगी है। उधर ग्रामीण क्षेत्र में हैण्डपम्पों ने भी दम तोड़ दिया है, वहां भी पानी के लिए लोग अभी से परेशान होने लगे हैं। शहर की जनता कहने लगी है कि बिल हम 160 रुपया हर माह दे रहे हैं लेकिन पानी पूरे माह और पर्याप्त भी नहीं मिल पा रहा है।

प्रति व्यक्ति 135 लीटर प्रति दिन पानी मिलना चाहिए, लेकिन 80 -90 लीटर पानी ही हर व्यक्ति को मिल पा रहा है। पानी की कमी न हो, इसके लिए चारों और बनी नदियों से पानी सप्लाई की योजना बनाना होगी। पेयजल से जुड़े अधिकारी का कहना है कि मई-जून तक ये गेट बनकर तैयार हो जाएंगे और इस वर्ष डेढ़ मीटर और पानी गेट लगवाकर रोक सकेंगे।

सूत्रों ने बताया कि गुना शहर को पानी की सप्लाई सिंध नदी के जरिए होती है। वहां एक दशक पूर्व 72 करोड़ रुपए की जलावर्धन योजना बनी थी, इसके तहत वहां एनीकट बनाकर 77 गेट लगाना थे, जिससे बारिश का पानी वहां रोका जा सके और जिसको सिंध के जरिए शहर की टंकियों को भरें और पानी की सप्लाई शहर में करें। यह काम शुरूआत से ही कछुआ गति से चला, इसके साथ ही इसके काम की गुणवत्ता के साथ जमकर खिलवाड़ हुआ।

जिसका परिणाम ये है कि यह परियोजना दस साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। कुछ समय पूर्व एनीकट परियोजना के तहत 77 गेट लगाए जाने का टेण्डर स्वीकृत हुआ, यह काम ग्वालियर की एक कंपनी कर रही है। उक्त कंपनी को आठ माह में गेट लगाकर देना थे, लेकिन यह कंपनी एक साल बाद भी 77 गेट नहीं लगा पाई, जिससे इस बार भी बारिश का पानी नहीं रुक पाने जैसी स्थिति बताई जा रही है।

बारिश भी कम हुई, बढ़ाई चिंता

सूत्र बताते हैं कि पानी की सप्लाई से जुड़े अफसरों की चिंता कम बारिश को लेकर बनी हुई है। सन् 2019 में बारिश 1053 मिमी हुई थी, सन् 2020 में बारिश होने का आंकड़ा 943.46 मिमी रहा, जो सन् 2019 की अपेक्षा काफी कम रहा। बारिश के मौसम में गेट न होने से उसको रोका नहीं जा सका। उस पानी को न रोक पाने की वजह से सबसे अधिक पानी की किल्लत अभी से शुरू हुई है जो आगे भी बढ़ सकती है। सिंध नदी में भी पानी कम होता जा रहा है।

एनीकट में 5 मीटर रोका जाना है पानी

बताया जाता है कि नौ मीटर यानी 27 फीट ऊंचे बने एनीकट में 5 मीटर पानी रोके जाने की कार्ययोजना बनी थी। लेकिन एनीकट पर गेट न बनने से तीन मीटर तक पानी रुक पा रहा है।जबकि 77 गेट लगाकर 9 मीटर पानी रोके जाने की कार्ययोजना बनी थी। लेकिन उसमें गाद आ जाने से पानी का भराब कम हो गया।

सिंध नदी से हो रहा है पानी सप्लाई

इन दिनों नपा सिंध नदी से प्रतिदिन 18 -19 एमएलडी यानि 1 करोड़ 90 लाख लीटर पानी की सप्लाई हो रही है। प्रति व्यक्ति को 80-90 लीटर के आसपास पानी मिल रहा है, जबकि नियमानुसार प्रति व्यक्ति को 135 लीटर पानी प्रति दिन मिलना चाहिए। शहर में पानी की सप्लाई के लिए नगर पालिका ने 412 ट्यूवबेल लगवाए हैं, लेकिन पानी का स्तर नीचे चले जाने से 412 में से 384 ट्यूवबेलों से पानी सप्लाई हो रहा है।पानी का संकट न आए, इसके लिए अभी से ही बीस से 25 टैंकरों से पानी की सप्लाई कराई जाने लगी है।

यहां गहराने लगा पानी का संकट

गुना शहर की भार्गव कॉलोनी,रेलवे फाटक के पास, नजूल कॉलोनी, प्रेमी कॉलोनी, श्रीराम कॉलोनी समेत कई क्षेत्र।

कलेक्टर ने बनवाई कार्ययोजना, जल्द शुरू होंगे काम

गुना कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने बीते दिनों पेयजल संकट को लेकर आ रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कार्ययोजना बनाई, उस कार्ययोजना के अनुसार शहर और ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल सप्लाई नियमित होती रहे, कहीं भी पानी का संकट न रहे। इसके लिए वे स्वयं लगातार ब्लॉकों में जाकर पेयजल योजना की समीक्षा कर रहे हैं।

इनका कहना है

एनीकट पर 77 गेट लगाए जाने का काम तेजी से चल रहा है। इस बार बारिश भी कम हुई है, जिससे पानी की कमी रह सकती है, लेकिन हम टैंकरों से पानी सप्लाई करा रहे हैं। जल्द ही तीस नए ट्यूवबेलों का खनन कराएंगे।

-जीके अग्रवाल, प्रभारी जल प्रकोष्ठ नपा

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