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विषेश: लुप्त फसलों के बीजों को सेवक राम ने किया संरक्षित, कोदो के 14 किस्में संरक्षित

विषेश: लुप्त फसलों के बीजों को सेवक राम ने किया संरक्षित, कोदो के 14 किस्में संरक्षित
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अनूपपुर। एक्शन इंडिया न्यूज़

देश में 1960 के दशक में विदेशी हरित क्रांति का आक्रमण हुआ तो किसान अधिक उत्पादन की लालच में आकर हाइब्रिड बीज रासायनिक खाद व दवाओं का प्रयोग करने लगा, जिसे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। धरती का सबसे पुराना अनाज देशी धान, कोदो, कुटकी, सांमा, मंडिया, ज्वार, बाजरा, गेहूं,चना, मटर, मसूर, देशी साग भाजी व जंगली कंदमूल आदि का खेती करना छोड़ दिए। किसान आज बाजार पर निर्भर है। खेती के लिए विदेशी हाइब्रिड बीज रासायनिक खाद वह दवा खरीद कर खेती कर रहा है और हमारे परंपरागत अनाजों को भुला दिया गया। ऐसे में परंपरागत देशी बीजों को बचाने का कार्य पुष्पराजगढ़ विकासखण्ड़ के ग्राम बीजापुरी नंबर 1 के सेवक राम मरावी ने किया है। उन्होंने बीज संरक्षक द्वारा संग्रह कर देशी बीजों का संरक्षण एवं संवर्धन किया है तथा सामुदायिक बीज बैंक का स्थापना कर संरक्षित करने का कार्य जारी है,इतना ही नहीं किसानों को निशुल्क बीज भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

  • देशी बीजों का संरक्षण

सेवकराम ने बताया कि लुप्त हो चले देशी फसलो के उत्पादन में जहां समय अधिक लगता था वही उसके कोई दुष्परिणाम भी नहीं थे परंपरागत अनाजों में देशी धान की विभिन्न किस्में जिनमें कम अवधि के 90 से 100 दिन वाली किस्म है और मध्यम अवधि के 100 से 120 दिन की फसलें तथा 1 किस्में में 120 से 140 दिन की अवधि वाले धान की किस्म है और कुछ धान सुगंधित और औषधि प्रजाति के हैं और मोटे अनाजों में कोदो कुटकी मडिया, रागी,काली ज्वार, बैहा ज्वार, कुटकी का भुरसा काग देशी सब्जियां व जंगल के खानपान के तहत जंगली कांड वन कुम्हड़ा, कांदा, कनिहा कांदा, गिरची कांदा, बिदार कांदा,शिहार आदि बीजों का संरक्षण किया जा रहा है।

  • देशी बीज इसलिए भी जरूरी

बीज बैंक के संचालक सेवकराम ने बताया कि कृषि के वर्तमान स्वरूप में किसान अधिक उत्पादन की लालसा में उन्नत किस्म तथा हाइब्रिड बीजों का प्रयोग कर रहा है जिसे किसान को बाजार तथा बीज कंपनियों पर निर्भरता अधिक हो गई है तथा किसान की प्रति एकड़ उत्पादन लागत बढ़ गई है एकल कृषि पद्धति के कारण बीजों के विभिन्न स्थानीय किस में लुप्त होती जा रही हैं नई नई किस्मों का प्रचलन ज्यादा हो रहा है इसे प्रचलित किस्मों में रोग व कीट का प्रभाव ज्यादा हो रहा है जिससे किसान को अधिक नुकसान होता है उन सभी समस्याओं से निपटने के लिए यह जरूरी है किसान अपने परंपरागत बीजों को संरक्षित के रखे तथा उन्हें उठाकर अदला-बदली करें।

  • बीज बैंक में यह भी

मधुमेह की बीमारी में कोदो का उपयोग चावल के विकल्प के रूप में किया जाता है सेवकराम के बैंक में को दो कि 14 से ज्यादा किस्मो के साथ ही लुप्त हो चले सामा के बीज भी संरक्षित हैं। वनों में उपजने वाली हल्दी और मूली के बीज भी सुरक्षित किए गए हैं। समय-समय पर इन बीजों को दर्शकों को प्रदान किया जाता है और पारंपरिक खेती के लिए प्रोत्साहित भी सेवक राम के द्वारा किया जा रहा है।


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