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भोपाल: गैर लायसेंसी साहूकारों के ऋण को शून्य करने वाले विधेयक के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी

भोपाल: गैर लायसेंसी साहूकारों के ऋण को शून्य करने वाले विधेयक के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी
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भोपाल। एक्शन इंडिया न्यूज़

मध्यप्रदेश में अनुसूचित क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को गैर लायसेंसी साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए कानून लाने के बाद अब शिवराज सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के छोटे और मझौले किसानों के साथ भूमिहीन कृषि श्रमिकों को भी इसके दायरे में लाने का निर्णय किया है। सरकार अब मध्यप्रदेश ग्रामीण ऋण विमुक्ति विधेयक लाएगी, जिसके मसौदे को मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई। अब इसे विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजा जाएगा।

राज्य मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक के बाद राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि ग्रामीण ऋण विमुक्ति विधेयक के मसौदे को मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही प्रदेश के छोटे किसान और कृषि मजदूर गैर लायसेंसी साहूकारों के ऋण से मुक्त हो जाएंगे। इसके दायरे में भूमिहीन कृषि श्रमिक, एक हेक्टेयर भूमि वाले सीमांत किसान और आधा से एक हेक्टेयर तक सिंचित या दो हेक्टेयर तक असिंचित भूमि पर स्वयं खेती करने वाले किसान आएंगे।

राजस्व मंत्री ने बताया कि इस विधेयक के अनुसार 15 अगस्त 2020 तक ऐसे साहूकार, जिनके पास साहूकारी करने का वैधानिक अधिकार नहीं है, द्वारा दिया गया ऋण और उस पर लगाया गया ब्याज अवैध होकर शून्य हो जाएगा। इसकी वसूली अधिनियम के प्रभावी होने के बाद नहीं की जा सकेगी। प्रावधानों का उल्लंघन करने पर तीन साल का कारावास या एक लाख रुपये तक अर्थदंड से दंडित किया जाएगा। गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि इसमें सिर्फ गैर लायसेंसी साहूकारों द्वारा दी गई राशि और ब्याज की वसूली आएगी। किसानों को जो अग्रिम दिया जाता है, वो इसके दायरे में शामिल नहीं है।

राजस्व मंत्री ने कहा कि वैधानिक तरीके से ब्याज पर राशि दे वालों पर यह अधिनियम लागू नहीं होगा। इसी तरह वित्तीय संस्थानों, सहकारी समितियों द्वारा दिए गए कर्ज पर भी यह प्रभावी नहीं होगा। बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्न्यन योजना के लिए पांच सौ करोड़ रुपये की अनुमति देने का भी निर्णय लिया गया। इस योजना में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाएगा।


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