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मां नर्मदा मंदिर में प्रसाद नहीं जाने का पुजारियों ने किया विरोध

मां नर्मदा मंदिर में प्रसाद नहीं जाने का पुजारियों ने किया विरोध
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अनूपपुर। एक्शन इंडिया न्यूज़

अमरकंटक मां नर्मदा की उद्गम स्थली होने और विभिन्न धार्मिक पर्व में स्नान दान के महत्व को लेकर चलने वाले हिंदू धर्मावलंबी यहां प्रतिदिन आते हैं। त्योहारों के समय यह संख्या और भी अधिक हो जाती है। कोरोना महामारी के कारण यहां के दुकानदारों का व्यवसाय खासा प्रभावित हुआ अब धीरे-धीरे आर्थिक व्यवस्था पटरी पर अमरकंटक में लौट रही है लेकिन मकर संक्रात से आने वाले श्रद्धालुओं से केवल प्रसाद स्वरूप नारियल ले जाने की व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर शुरू की गई है जिसे लेकर विरोध के स्वर मुखर होने के बाद शनिवार को पुजारियों ने व्यवस्था को मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक समिति से चर्चा की।

मकर संक्रांति पर मां दर्शन उपरांत पुष्पराजगढ़ के विधायक फुन्देलाल सिंह मार्को, पूर्व विन्ध विकास उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता, संतोष पांडेय आदि ने एसडीएम अभिषेक चौधरी, तहसीलदार पुष्पराजगढ़, नपा उपाध्यक्ष, नर्मदा पुजारीगण के साथ मंदिर में नारियल,अगरबत्ती,चुनरी रहित प्रसाद थैला आदि मनाही कर मंदिर में प्रवेश किये जाने पर मंदिर मेन गेट पर यात्रियों से लेकर रखे जाने पर विधायक ने चर्चा कर सामंजस्य बनाये जाने की बात की।

पुजारियों ने विधायक से कहा कि मंदिर में श्रद्धालु बाजार से पैसे खर्च कर प्रसाद लेकर आते हैं और यह सामग्री मुख्य गेट पर रखवा ली जाती है। यह धार्मिकतानुसार अन्याय व प्रसाद का अपमान है। विधायक ने एसडीएम पुष्पराजगढ़ से चर्चा दौरान व्यवस्था बनाये जाने की बात कही।

पुजारी वन्दे महाराज ने कहा कि कुछ समय तक बाहर से कोई प्रसाद अंदर नहीं लाने दी जा रहा थी, पर एसडीएम से चर्चा उपरांत नारियल सिर्फ ले जाने की अनुमति दी गई। बताया गया प्रसाद मंदिर पर ले जाने पर कई बार बंदर प्रसाद के झोले को झपट कर गिरा देते, जिससे श्रद्धालु भी डर जाते और प्रसाद सामग्री भी गिर कर बिखर जाती है इसलिए केवल नारियल को ही मंदिर में ले जाने की अनुमति दी जा रही है ताकि कोई अव्यवस्था ना फैले।

इसके लिए सूचना पटल और लाउडस्पीकर से एलाउंस होते रहना चाहिए ताकि श्रद्धालुगण उसी प्रसाद को लेकर बिना रोक टोक के श्रद्धापूर्वक मां नर्मदा को भेंट चढ़ा सकें। कुछ समय पूर्व नारियल बाहर मुख्य गेट के पास मशीन द्वारा तोड़ा जा रहा था पर ये सब कुछ दिन ही नियम पर रहा है बाद में फिर वही पुरानी व्यवस्था चलने लगी।


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