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मुख्यमंत्री ने पूछा, शिक्षकों को तबादले के लिए देने पड़ते है पैसे, जवाब मिला 'हां'

मुख्यमंत्री ने पूछा, शिक्षकों को तबादले के लिए देने पड़ते है पैसे, जवाब मिला हां
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जयपुर। एक्शन इंडिया न्यूज़

राजधानी जयपुर में मंगलवार को आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में मौजूद शिक्षकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने अपनी मन की पीडा जाहिर की तो कार्यक्रम में मौजूद सभी लोग हैरत में पड़ गए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री गहलोत ने संबोधन के दौरान मौजूद शिक्षकों से पूछा कि तबादलों में पैसे खिलाने की बात सही है या नहीं, मुझे नहीं मालूम, तभी शिक्षकों के बीच में से हां की आवाज आई। तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अगर तबादले के लिए पैसे देने पड़ते है, तो ये बहुत ही दुखदायी बात है. अगर शिक्षक पैसे देकर तबादले के लिए लालायित रहे तो मैं समझता हूं कि तबादले के लिए पॉलिसी बननी चाहिए. पॉलिसी होगी, तो न पैसे चलेंगे, न शिक्षक एमएलए को तंग करेंगे। शिक्षकों को यह पता होगा कि तय समय से पहले उन्हें कोई हटा नहीं पाएगा।

मुख्यमंत्री गहलोत की बात पर शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद डोटासरा ने भी कहा कि मेरे शिक्षा मंत्री रहते हुए मेरे स्टाफ में अगर तबादले के नाम पर किसी ने चाय भी पी हो, तो साबित कर दें। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं शिक्षकों के साथ तबादले के लिए पैसे देने की घटना होती होगी, बरसों से हम सुनते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के कहने का भावार्थ ये था कि अगर मास्टर के तबादले भी पैसे देने से होते हैं तो इससे बड़ा दुर्भाग्य कोई और हो नहीं हो सकता, इसलिए हमारी सरकार ट्रांसफर पॉलिसी लाएगी ताकि कोई उनके साथ तबादले के नाम पर धोखाधड़ी न कर सके।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि प्रदेश में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों की स्थापना शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। इन स्कूलों के खुलने से गांव-ढाणियों में रहने वाले किसान, गरीब व मजदूरों के बच्चों का अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने का सपना साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि बचपन से अंग्रेजी सीखने वाले बच्चे बाद में दूसरों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पिछडते नहीं है। अंग्रेजी माध्यम से पढने वाले बच्चों के व्यक्तित्व में भी निखार आता है।

गहलोत ने कोरोना के कठिन समय में शिक्षकों द्वारा किए गए योगदान को अनुकरणीय बताया। साथ ही शिक्षा विभाग द्वारा कोरोनाकाल में बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा के लिए किए गए नवाचारों की प्रशंसा की। उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों को अपनी संस्कृति एवं संस्कारों से कभी दूर नही होने दें। पुरस्कृत शिक्षकों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं शिक्षकों के हित में जो प्रस्ताव शिक्षा मंत्री द्वारा भेजे जाएंगे सरकार की ओर से उन्हें स्वीकार किया जाएगा।

शिक्षा राज्य मंत्री डोटासरा ने कहा कि पहले पुरस्कृत होने वाले शिक्षकों की संख्या काफी कम थी लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार तीन श्रेणियों में प्रदेश के 33 जिलों से तीन- तीन सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों का चयन राज्य स्तरीय सम्मान के लिए किया गया। उन्होंने प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में नामांकन संख्या लगभग एक करोड़ के आसपास पहुंचने पर शिक्षकों को बधाई दी। प्रदेश भर में क्रमोन्नत हुए 2500 विद्यालयों का उल्लेख करते हुए डोटासरा ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग में 29 हजार नई भर्तियां निकाली हैं तथा मुख्यमंत्री गहलोत ने 11353 उप-प्रधानाचार्य के पद स्वीकृत कर स्कूल व्याख्याताओं एवं प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पुरस्कृत शिक्षकों के लिए अलग से योजना बनाकर उन्हें विशेष रियायत देने, राज्य में प्रतिबंधित जिलों की व्यवस्था समाप्त करने एवं विद्यालयों में 18 हजार से अधिक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर भर्ती को स्वीकृति देने का आग्रह किया।


कार्यक्रम में गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक एवं भौतिक विकास के कार्य करने के लिए प्रदेशभर के विभिन्न विद्यालयों से चयनित 99 शिक्षकों का सम्मान किया गया। पुरस्कृत शिक्षकों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह एवं 21 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की गई।

इसके अलावा शिक्षा विभाग की जिला रेंकिंग में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन जिलों जयपुर, चुरू एवं हनुमानगढ को भी पुरस्कृत किया गया। राज्य के आदर्श विद्यालय श्रेणी में तीन श्रेष्ठ उच्च माध्यमिक एवं माध्यमिक विद्यालय तथा उत्कृष्ट विद्यालय श्रेणी के तीन श्रेष्ठ उच्च प्राथमिक एवं प्राथमिक विद्यालयों के संस्था प्रधान भी सम्मानित किये गये।

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