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पी चिदंबरम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट ने कल तक मांगी एम्स से हेल्थ रिपोर्ट

पी चिदंबरम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट ने कल तक मांगी एम्स से हेल्थ रिपोर्ट
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नई दिल्ली। एएनएन

दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया डील में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सांसदों और मंत्रियों का इलाज एम्स में होता है। वहां क्या समस्या है? हजारों कैदी रोजाना बीमार पड़ते हैं।

हाईकोर्ट ने एम्स अस्पताल को निर्देश दिया कि वह चिदंबरम के स्वास्थ्य पर विचार करने के लिए आज ही एक मेडिकल बोर्ड का गठन करे। कोर्ट ने कहा कि उस मेडिकल बोर्ड में चिदंबरम का इलाज करने वाले डॉक्टर नागेश्वर रेड्डी को भी शामिल करें। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड आज शाम को 7 बजे चिदंबरम के स्वास्थ्य पर विचार करे। कोर्ट ने एम्स से कल दो बजे तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम को क्रोन बीमारी है और इसके कैंसर में तब्दील होने की आशंका है। सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम को तीन दिन की अंतरिम जमानत दी जाए ताकि वे हैदराबाद में अपने डॉक्टर से इलाज करवा सकें।

चिदंबरम ने अंतरिम जमानत के लिए अपने खराब स्वास्थ्य को आधार बनाया था। चिदंबरम फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं। पिछले 30 अक्टूबर को दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने चिदंबरम को 13 नवम्बर तक की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

चिदंबरम ने हाईकोर्ट में अपनी नियमित जमानत याचिका भी दायर की है। नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ईडी को नोटिस जारी कर 4 नवम्बर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सीबीआई के मामले में चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। पिछले 17 अक्टूबर को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया डील मामले में चिदंबरम को 24 अक्टूबर तक की ईडी हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया डील के सीबीआई से जुड़े मामले में पिछले 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने 15 मई, 2017 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में आईएनएक्स मीडिया को 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से मंजूरी देने में गड़बड़ी की गई। इसके बाद ईडी ने 2018 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

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