Action India
अन्य राज्य

शासन के प्रतिबंध से टूटा प्रवासी मजूदरों का धैर्य, मथुरा-आगरा हाईवे जाम लगा कूड़ा-करकट में लगाई आग

शासन के प्रतिबंध से टूटा प्रवासी मजूदरों का धैर्य, मथुरा-आगरा हाईवे जाम लगा कूड़ा-करकट में लगाई आग
X

मथुरा । एएनएन (Action News Network)

प्रवासी श्रामिकों द्वारा अपने गतंव्य प्राइवेट वाहनों से निकलने पर शासन द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया है जिसको लेकर हजारों की संख्या में मजदूर वर्ग के लोग अपने गतंव्य जाने को तरस रहे हैं। रातभर के इंतजार के बाद जब मजूदरों को जिला प्रशासन द्वारा बसें मुहैय्या न कराई गई तो उनका गुस्सा फूट गया और उन्होंने थाना फरह की रैपुराजाट चौकी के पास रविवार सुबह जाम लगा दिया।

मजदूरों ने इस दौरान हाईवे पर कूड़ा करकट और कबाड़ का सामान से सड़क को घेर आग लगा दी। उनकी मांग है कि उन्हें उनके घर पहुंचना है, चाहे सरकार कुछ भी साधन हमें मुहैय्या कराएं। सूचना एसएसपी समेत जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी है। लॉकडाउन 4 में पूरे देश प्रवेश कर चुका है, मजदूर वर्ग ने सोचा था कि लॉकडाउन 3 के बाद शायद हालात सुधर जाएंगे और उन्हें काम धंधा मिल जाएगा। लेकिन जब जेब में से सारे पैसे समाप्त हो गए, राशन खत्म हो चुका, बीबी बच्चे भूख से बिलखने लगे तो मजूदर वर्ग अपने गतंव्य को जाने के लिए पैदल ही चलकर रास्ता तय करने लगे। औरैय्या हादसे में मारे गए मजदूरों को लेकर शासन ने प्राइवेट वाहनों एवं पैदल चलने वाले प्रवासी मजूदरों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके चलते रविवार सुबह आठ बजे मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया।

फरह थाना क्षेत्र में रैपुरा जाट पुलिस चौकी और रैपुरा जाट गांव के बीच मजदूरों ने हाईवे पर जाम लगा दिया। आसपास से कूड़ा करकट और कबाड़ का सामान लाकर हाईवे पर रख दिया और उसमें आग लगा दी गई। मजदूरों का आक्रोश थामे से भी नहीं थम रहा था। उनका कहना था कि वह दो-तीन दिन से भूखे प्यासे हैं। उनकी कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। उनको पैदल भी नहीं चलने दिया जा रहा है। ना ही उनके लिए वाहन ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आखिर में वे क्या करें। थाना फरह क्षेत्र में हाईवे पर जाम लगा रहे मजदूरों की मांग है कि उनको उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तत्काल वाहनों की व्यवस्था कराई जाए।

कोसीकलां के कोटवन बॉर्डर पर भी सुबह मजदूरों को रोकने की कोशिश की गई, मगर हजारों मजदूरों का काफिला आगे की तरफ बढ़ गया। मजदूरों को रोकने के पुलिस और प्रशासन के सभी प्रयास अभी तक विफल साबित हो रहे हैं। दरअसल, बॉर्डर पर रोडवेज बसों की व्यवस्था कराई जा रही है, जो मजदूरों की संख्या के हिसाब से काफी कम है। रोडवेज बसों के अलावा प्राइवेट वाहनों से मजदूरों के जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। यही कारण है कि मजदूरों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

Next Story
Share it