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स्वस्थ व्यक्ति से दस साल पहले मरते हैं तम्बाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति

स्वस्थ व्यक्ति से दस साल पहले मरते हैं तम्बाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति
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  • आठ लाख भारतीय प्रतिवर्ष मरते है तम्बाकू के सेवेन से

  • 6.5 प्रति सैकेंड में होती है एक स्मोकर की मौत

लखनऊ । एएनएन (Action News Network)

तम्बाकू एक मीठा जहर है जिसकी ​शुरुआत एक शौक से होती है। लेकिन धीरे-धीरे उसकी आदत बन जाती है। तम्बाकू करने वाला चाहे बच्चा, युवा या प्रौढ़ हो उसके बिना जिंदा नहीं रह सकता है। इसी कारण उनकी उम्र भी घटने लगती है। एक स्वस्थ व्यक्ति से तम्बाकू का सेवन करने वाला व्यक्ति दस साल पहले मर जाता है। पूरे भारत में करीब तम्बाकू के सेवन करने से आठ लाख भारतीय मरते है जो क्षय रोग, एड्स और मलेरिया के कारण मरने वाले कुल लोगों से अधिक है। प्रतिदिन 2.200 से अधिक भारतीय तम्बाकू सेवन करने से अपनी जान गवा देते हैं। 6.5 प्रति सैकेंड में एक स्मोकर की मौत होती हैं। 95 प्रतिशत मुंह के कैंसर तम्बाकू सेवन करने वाले व्यक्तियों में होते हैं। अगर ऐसे ही हालात रहे तो 2030 में तम्बाकू से सेवन करने से मरने वालों की संख्या 83 लाख हो जायेगी।

कानपुर जिला अस्पताल में बनाये गए तंबाकू नियंत्रण सेल के नोडल अधिकारी डॉक्टर महेश कुमार ने बताया कि दुनिया भर में वर्ल्ड नो टोबैको डे-2020 मनाया जा रहा है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए रैली या कार्यक्रम का आयोजन संभव नहीं हैं, इसलिए सोशल मीडिया, फेसबुक लाइव, रेडियो/वीडियो प्रसारण व विज्ञापनों के जरिये धूम्रपान के खतरों के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यह दिन खासतौर पर तंबाकू के सेवन को रोकने और तंबाकू के कारण सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। ये हर वर्ष 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाता है, जिसके जरिये लोगों को तम्बाकू के खतरों के प्रति सचेत किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस बार कार्यक्रम की थीम युवाओं पर आधारित है-'प्रोटेक्टिंग यूथ फ्रॉम इंडस्ट्री मैनिपुलेशन एंड प्रिवेंटिंग देम फ्रॉम टोबैको एंड निकोटिन यूज टोबैको'।

तंबाकू से होने वाली बीमारियां

नोडल अधिकारी ने बताया कि तम्बाकू सेवन करने करने से 25 अन्य बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसमें कैंसर-फेफड़ों और मुंह का कैंसर होना, फेफड़ो का खराब होना, दिल की बीमारी,आंखों से कम दिखना मुंह से दुर्गंध आना मुख्य बीमारियों में से हैं।

15-20 वर्ष बाद भुगतना पड़ता है परिणाम

डॉक्टर ने यह भी बताया कि सेवन करने वाले व्यक्ति को नहीं पता होता है कि जो हम खा रहे हैं उसमें कत्था नहीं गैम्बियर है। सड़ी गली सुपारी, निकोटीन, आर्सेनिक व तारकोल जैसे लगभग तीन हजार से ज्यादा हानिकारक तत्व पाए जाते हैं। शौक दोस्ती, दुसरे के ऊपर अपना प्रभाव दिखाने में इन पदार्थों के सेवन की शुरुआत करते हैं। इन पदार्थों में पाया जाने वाला निकोटिन जैसे ही हमारे रक्त में मिलता है और हमें जब क्षणिक सुख की अनुभूति होती है तो इन पदार्थों का सेवन हम बार-बार करना चाहते हैं और लती बन जाते हैं। सेवन करने वाले लोगों को इसका परिणाम 15-20 साल बाद भुगतना पड़ता है।

पहली बार कब मनाया गया

वर्ष 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू के सेवन से होने वाले रोगों की वजह से मृत्युदर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए इसे एक महामारी माना। इसके बाद पहली बार सात अप्रैल 1988 को विश्व स्वास्थ्य संगठन की वर्षगांठ पर मनाया गया और जिसके बाद हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। तब से संगठन ने हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस का समर्थन किया है और हर साल एक अलग तंबाकू से संबंधित विषय को जोड़ा है।

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