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इंदौर के महू में ‘जहरीला पानी’, 25 लोग बीमार, रात में दौड़ते हुए पहुंचे क्लेक्टर, अलर्ट जारी

इंदौर
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब उससे करीब 20–25 किलोमीटर दूर महू में भी गंदे पानी ने कहर बरपाया है। महू के पत्ती बाजार और चंदर मार्ग इलाके में दूषित पानी पीने से पीलिया जैसी बीमारियों के मामले सामने आए हैं। बीते 10 से 15 दिनों में यहां करीब 25 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। देर रात कलेक्टर शिवम वर्मा महू पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

बदबूदार पानी की सप्लाई
जानकारी के अनुसार पत्ती बाजार, चंदर मार्ग और मोती महल क्षेत्र में नलों से मटमैला और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है। इसी पानी को पीने से लोग बीमार पड़ने लगे। वर्तमान में 9 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जबकि अन्य लोग घर पर ही उपचार ले रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि संक्रमितों में छह बच्चे एक ही परिवार के बताएं जा रहे है।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
रहवासियों का कहना है कि गंदे पानी की शिकायत वे लंबे समय से कर रहे थे लेकिन समय रहते न तो पाइपलाइन बदली गई और न ही लीकेज को ठीक किया गया। लोगों के अनुसार पेयजल पाइपलाइन नालियों के बीच से होकर गुजर रही है। कई जगहों पर पाइप फटने और जोड़ कमजोर होने के कारण नालियों का गंदा पानी सीधे पाइपलाइन में मिल रहा है। इसी कारण नलों से गाद, बदबू और पीले रंग का पानी आ रहा है। रहवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने अनदेखी की जिसका नतीजा अब बीमारी के रूप में सामने आ रहा है।

कलेक्टर पहुंचे महू

पूरे मामले को देखते हुए देर रात इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं महू पहुंचे। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों से मुलाकात की और उनके परिजनों से बातचीत कर हालात की जानकारी ली। परिजनों ने कलेक्टर को बताया कि 14 तारीख से ही इलाके में लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। इसके बाद कलेक्टर ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर बच्चों के हालचाल भी जाने। कलेक्टर ने बताया कि कुछ बच्चों में पोलियो जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं।

कलेक्टर ने बताया कि हालात को देखते हुए कल से पूरे महू क्षेत्र में स्वास्थ्य सर्वे शुरू किया जाएगा। जिन लोगों में बीमारी के लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें घर पर ही उपचार उपलब्ध कराया जाएगा जबकि गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

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