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भाजपा का काम पचा नहीं पा रही सपा, विरोध करना बन गयी है मानसिकता

भाजपा का काम पचा नहीं पा रही सपा, विरोध करना बन गयी है मानसिकता
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  • अपनी टांग उघारिए, आपहि मरिए लाज वाली कहावत चरितार्थ करती दिख रहा विपक्ष

  • राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, यह घातक हो सकता है सपा के लिए

लखनऊ। एएनएन (Action News Network)

“अच्छा काम करे कोई, परेशान दूसरा होई।” की कहावत को चरितार्थ करते हुए यूपी में भाजपा की विकास के कामों को देखकर सपा परेशान हो उठी है। हर काम में उसको अपनी सोच दिखाई देती है। उसकी इस नीति से अब तो “अपनी टांग उघारिए, आपहि मरिए लाज” वाली कहावत चरितार्थ होते हुए दिख रही है। लोग यह कहने लगे हैं कि विकासवादी कार्य भी सपा पचा नहीं पा रही है। यह जरूर है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे उसके जमाने की सोच थी,लेकिन उसके फंडिंग से लेकर लैंड रिक्वायर तक वह नहीं कर पाई थी।

काेई भी शिलान्यास या लोकार्पण के अवसर पर सपा अध्यक्ष का उसके प्रति बयान जरूर आता है। अभी शनिवार को प्रधानमंत्री द्वारा बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर भी उनका बयान आया कि सैफई से नफरत करने वाली भाजपा को अब मुहब्बत क्यों हो गयी। इससे पूर्व पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर उनका बयान था कि यह तो सपा के कार्यकाल का है।

लखनऊ के मेट्रो की शुरूआत पर भी बयान दिया था। यहां तक कि स्कूलों और कालेजों के नींव रखने पर भी सपा का विरोधात्मक बयान जरूर आ जाता है। अभी झांसी में सैनिक स्कूल की नींव रखने पर सपा का बयान आया कि 19 मई 2015 को सपा सरकार ने नींव रख दी थी।
पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की कार्य योजना सिर्फ सपा की सोच तक थी सीमित

इस संबंध में राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि सड़कों का जाल बिछाना तो मूलत: अटल बिहारी वाजपेयी जी की सोच है। भाजपा की सरकार जब भी बनी सड़कों और रेल पथ पर ध्यान दिया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे सपा के कार्यकाल में सिर्फ सोच तक ही सीमित थी। उसको पटरी पर लाने का काम भाजपा ने किया। वहीं गंगा एक्सप्रेस-वे तो बसपा की सोच थी, जो बलिया तक जानी थी।

सपा के लिए घातक हो सकती है यह मानसिकता

उन्होंने कहा कि किसी का विरोध के लिए हमेशा विरोध करने की नीति पर सपा चल रही है। ऐसे में उसके लिए ही घातक हो सकता है। अच्छे मुद्दों या अपने विचार के अनुसार विराेध करना तो ठीक है लेकिन शिलान्यास और लोकार्पण जैसे मुद्दों पर विरोध करना सपा के लिए घातक हो सकता है। इससे लोगों के मन में विरोध करने वाली पार्टी के प्रति निगेटिव मानसिकता पैदा होती है और आम आदमी उसकी बातों पर ध्यान देना ही छोड़ देता है।

कभी-कभी भाजपा के कार्यकाल में “अरहर की टट्टिया, गुजराती ताला” वाली कहावत होती चरितार्थ

उन्होंने कहा कि भाजपा के शासन काल में कभी भ्रष्टाचार मुक्त शासन के चक्कर में कभी-कभी “अरहर की टट्टिया, गुजराती ताला” वाली कहावत चरितार्थ होती है। जैसे योगी आदित्यनाथ द्वारा सत्ता सम्भालते ही बालू के अवैध खनन पर रोक लगा दिया गया और सौ दिन में सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का भी भरोसा दे दिया। इसका परिणाम हुआ कि भाजपा वह वादा नहीं पूरा कर पाई, क्योंकि तब तक बालू खनन अवैध ढंग से ही उपलब्ध होता था। उसे रोकते ही अधिकांश ठेकेदारों ने बालू महंगा होने के कारण समय से काम करने में हाथ खड़ा कर दिये।

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