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पूर्णबन्दी ने बना दिया आत्मनिर्भर, रसोई में मिला हुनर

पूर्णबन्दी ने बना दिया आत्मनिर्भर, रसोई में मिला हुनर
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  • किचन का हुनर ही बेटियों को बनाता है आदर्श बहू

सुल्तानपुर ।एएनएन (Action News Network)

कोरोना महामारी के कारण पूर्णबन्दी लागू होने के बाद पाक कला में बालिकाएं माहिर हो गयी है। इस दौरान कोरोना से लड़ने के लिए कई हुनर को भी आजमाया है। एक्शन इंडिया समाचार ने कुछ परिवार में पहुंचकर बालिकाओं के हुनर को जाना। 'क्या खोया क्या पाया'।

प्राथमिक विद्यालय की शिक्षक श्रीमती राखी ने बताया कि पूर्णबंदी लागू होने के बाद से ही सभी स्कूल कालेज बंद हो गए। ऐसे समय में बाहर से कुछ खाने की चीजें भी उपलब्ध नहीं हुई। स्कूल की छात्राओं को पढ़ाई के नाम पर कभी रसोई में काम करने का समय नहीं मिलता था।

रविवार को छुट्टी मिला भी तो काम से बचने के लिए तरह-तरह के बहाने बालिकाओं को मिल जाते थे। अधिकांश घरों में काम करने वाली को भी मना कर दिया गया। पूरे समय खुद ही खाना बनाना है। घर के सारे काम सब लोगों को मिलकर करना है।

नहीं चला कोई बहाना, खुद ही सम्हालना पड़ा रसोई

नगर के अमहट निवासी बीएससी की छात्रा ज्योति ने रसोई में पहली बार मंचूरियन, ढोकला पकवान बनाकर बहुत खुश हुई। कहा खाली समय में सीखने का मौका मिला नहीं तो सिर्फ पढ़ाई ही पढ़ाई लगी रहती थी।

ओमनगर निवासी नर्सिग की छात्रा निकिता साहू ने बताया कि पूर्णबंदी के बाद से ही फुल्की खाने को नहीं मिली। फुल्की, ढोकला, इडली, मैंने पहली बार घर में बनाया, मजा आ गया, सबने तारीफ की। अपने हाथ से शुद्ध बनाकर खिलाने व खाने का आनंद ही कुछ और है।

नगर के वनोवापुरी निवासी अमीषा गुप्ता प्रयागराज में सिविज की तैयारी में कर रही है। बताया कि बाहर तो इस बन्दी में कुछ खाने पीने को मिल नहीं रहा है। इसलिए खुद ही नए-नए पकवान बनाया। सबको खिलाया, घर का बना हुआ रेसिपी सबको घर में सबको पसंद आयी। आये हुए मेहमानों ने भी जमकर तारीफ की।

गोरबारिक निवासी डीएलएड की छात्रा अन्वेषा गुप्ता ने बताया कि घर में रहते-रहते मन ऊब गया था। स्कूल भी नहीं जाना था। ऐसे में रसोई में ही पहली बार गुगल गुरु का सहारा लेते हुए लौकी और कटहल का पोख्ता बनाया। सबको पसन्द आया। हमने एक हुनर सीख लिया।

आत्मनिर्भर रसोई के बिना कुछ भी सम्भव नहीं

नगर के सुमन अस्पताल की डायरेक्टर सुमन सिंह स्वयं एक अच्छी प्रशासक के साथ रसोई में अपने हाथों सुंदर पकवान बनाने में माहिर है। पूर्ण बंदी के दौरान समोसा, पकौड़ी, हलुआ आदि अपने हाथों से तैयार कर लोगों को वितरित करवाती थी। महीने भर सड़क पर खड़े योद्धाओं को चाय जलपान बनाकर भेजा है।

श्रीमती सिंह ने बताया कि आज की लड़कियां रसोई में काम करने से भागती हैं। पूर्ण बंदी की मजबूरी ने सब सीखा दिया। इन्हें आत्मानिर्भर बना दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर बनने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें सबसे जरूरी रसोई का आत्मनिर्भर होना है।

बिना रसोई का कोई घर नहीं चल सकता है। कोई कितना भी पढ़ लिख ले कुछ भी बन जाय, लेकिन किचन में तो काम करना ही पड़ता है। अपने हाथ का खाना खिलाकर पूरे परिवार का दिल जीता जा सकता है। अपने हाथ का हुनर एक आदर्श बहू व बेटियों में तो होना ही चाहिए।

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