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ट्रेन बंद रहने से स्टेशन हैं 'लॉक' तो कुली परिवार की हालत हुई 'डाउन'

ट्रेन बंद रहने से स्टेशन हैं लॉक तो कुली परिवार की हालत हुई डाउन
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बेगूसराय । एएनएन (Action News Network)

रेलवे स्टेशन से लेकर धार्मिक स्थलों तक कोरोना को लेकर दहशत कायम है। लोगों ने अब बाहर निकलना बंद कर दिया है। यात्रियों से गुलजार रहने वाला रेलवे स्टेशन सुनसान पड़ा है। इक्का दुक्का स्थानीय लोग ही यहां पर नजर आ रहे हैं। वहीं ड्यूटी पर आने वाले लोग जरूर सुबह शाम पहुंचते हैं। बेगूसराय जिले में बीस हजार से अधिक ट्रेन यात्री रोज आते-जाते थे। इसका असर रेलवे के सहारे दिहाड़ी मजदूरी करने वालों से लेकर दुकान चलाने वालों पर पड़ रहा है। देश भर में ट्रेनों का संचालन अगले आदेश तक के लिए बंद है।

सभी स्टेशनों के मुख्य द्वार 'लॉक' कर दिए गए हैं। ऐसे में रेलवे स्टेशनों पर लाल रंग का कुर्ता पहने और बांह में बिल्ला लगाने वाले कुली परिवारों की हालत 'डाउन' हो गई है, अब यह दो जून की रोटी के लिए मोहताज हैं। सारी दुनिया का बोझ उठाने वाले ये कुली अब रोजाना के राशन तक के लिए उधारी पर जी रहे हैं। कुछ कुली की माली हालत देख दुकानदार ने राशन तक देने से मना कर दिया है तो कुछ कुली अपने दोस्त-रिश्तेदारों से उधारी लेकर काम चला रहे हैं। कुली स्टेशन पर यात्रियों का सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाकर रोजाना तीन से पांच सौ रुपए तक की कमाई करते थे। रोज कमाई करके परिवार का पेट पालने वाले कुलियों के हालात पहले से ही खराब थे। लेकिन ट्रेनबंदी की घोषणा के बाद हालात और भी ज्यादा बिगड़ गए। रेलवे से प्राप्त जानकारी के मुताबिक सलौना रेलवे स्टेशन पर 18 कुली कार्यरत थे जिसमें 11 को कार्य के एवज में नौकरी मिली।

वहीं तीन कुली की मृत्यु हो गई है, जबकि चार कुली रामबहादुर पासवान, ढ़ोढ़ाय पासवान, सुरेश पासवान, बिरजू पासवान स्टेशन पर यात्रियों का सामान उठाने का काम करते हैं। कुली रामबहादुर पासवान ने बताया कि घर का खर्च चलाने और कमाने की चाह लेकर रोज लाल कुर्ता में बाजू पर बिल्ला लगा स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर लगे रहते थे। कई सालों से रेल यात्रियों की मदद कर उनका सामान पहुंचाने का काम करते आ रहे हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ट्रेनें भी बंद कर दी गई। यात्री हित में लिए गए इस निर्णय का हम स्वागत करते हैं लेकिन रेलवे को हमारे बारे में कुछ सोचना चाहिए कि आखिर ऐसे वक्त में हम अपने परिवारों का पेट कैसे भरेंगे। जिस तरह से मजदूरों की आर्थिक मदद करने की बात की गई है उसी तर्ज पर प्रशासन या रेलवे हम कुलियों को भी आर्थिक मदद एवं नि:शुल्क राशन की सुविधा देकर भुखमरी से बचाने में मदद करे।

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