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मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार हुए बेरोजगारहालत इतनी खराब कि कर्ज लेकर चला रहे गृहस्थी

मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार हुए बेरोजगारहालत इतनी खराब कि कर्ज लेकर चला रहे गृहस्थी
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धमतरी । एएनएन (Action News Network)

गर्मी की दस्तक होते ही मिट्टी के मटकों की पूछ परख बढ़ जाती है, लेकिन इस बार ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन ने यदि सबसे ज्यादा किसी को प्रभावित किया है तो वह छोटे-छोटे कारीगर और कुम्हार परिवार हैं।शहर व ग्रामीण अंचल में मटकों की हर साल खपत को देखते हुए कुम्हार परिवार के लोग कई महीनों से इसकी तैयारी में जुट जाते हैं। इस साल भी शहर के कुम्हारपारा के 90 परिवारों ने महीनों पहले मटकों और सुराही का निर्माण शुरू कर दिया था ताकि जैसे ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत होते ही इसकी बिक्री कर सकें, लेकिन इस बार ऐसा हो नहीं सका।

कुम्हारपारा के सूरज कुंभकार ने बताया कि लॉकडाउन ने घर की आर्थिक स्थिति को काफी प्रभावित किया है। इसके चलते हम लोग अपने बनाए हुए मटकों को बेच नहीं पा रहे हैं। शासन ने कुछेक दुकानों को खोलने की छूट दी है बाकी अन्य व्यवसाय पर रोक है। ऐसी स्थिति में हम चाहकर भी अपने सामानों की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। पूरा सामान घर में जाम पड़ा है। गर्मी के तीन चार महीने में थोड़ी-बहुत आमदनी हो जाती थी उस पर भी ग्रहण लगा हुआ है।

सूरज कुंभकार सूरज ने बताया कि हालत इतनी खराब हो गई है कि हमें समूह से पैसा लेकर घर खर्च चलाना पड़ रहा है। क्योंकि घरों में तैयार सामान जाम है। चाहकर भी साप्ताहिक बाजारों में अपने सामानों की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं आई थी। सामने अक्षय तृतीया का पर्व है यदि शासन द्वारा हमें तीन दिन की मोहलत मिल जाती है, तो कुछ राहत मिल पाएगी। अब तो यह सोच- सोच कर बुरा हाल है कि कर्ज में लिए गए पैसे कब और कैसे चुका पाएंगे।

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