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वर्तमान में क्रिकेट में बने रहने के लिये टेस्ट क्रिकेटर होना जरूरी नहीं : राहुल द्रविड़

वर्तमान में क्रिकेट में बने रहने के लिये टेस्ट क्रिकेटर होना जरूरी नहीं : राहुल द्रविड़
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नई दिल्ली । एएनएन (Action News Network)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने कहा है कि वर्तमान में क्रिकेट में बने रहने के लिये टेस्ट क्रिकेटर होना जरूरी नहीं है। द्रविड़ ने संजय मांजरेकर के साथ एक वीडियोकास्ट में बातचीत के दौरान कहा," वर्तमान में रक्षात्मक बल्लेबाजी का महत्व कम होता जा रहा है लेकिन आपको अब भी अपने विकेट का बचाव करना होता है। आज के दिन में क्रिकेट में बने रहने के लिये आपका टेस्ट क्रिकेटर होना जरूरी नहीं है। आप टी20 या एकदिनी में करियर बना सकते हैं और रक्षात्मक तकनीकी के बिना भी खेल में बने रह सकते हो।"

द्रविड़ ने कहा, ‘‘एक पीढ़ी पहले आपको खेल में बने रहने के लिये टेस्ट क्रिकेटर होना पड़ता था। कई खिलाड़ियों की आज भी अच्छी रक्षात्मक तकनीकी है फिर चाहे वह कोहली हो, (केन) विलियमसन या (स्टीव) स्मिथ।" उन्होंने कहा,"मुझे लगता है कि टेस्ट में बल्लेबाजी अब पहले से ज्यादा रोचक हो गई है। टेस्ट बल्लेबाज एग्रेसिव होकर खेलने लगे हैं, खिलाड़ी शॉट्स खेल रहे हैं और यह देखना अच्छा लगता है।" द्रविड़ ने पुजारा की भी जमकर तारीफ की जो भारत के टेस्ट विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा, "सौराष्ट्र जैसी जगह से आने के बाद उसे जल्द ही पता चल गया कि उसे अन्य खिलाड़ियों की तुलना में कुछ खास करने की जरूरत है। इसलिए उसने अपनी प्रत्येक पारी को विशेष बनाने की कोशिश की और इस तरह से अपनी बल्लेबाजी को आगे बढ़ाया।"

47 वर्षीय द्रविड़ ने कहा कि सभी युवा क्रिकेटर अपने करियर के शुरुआती दौर में क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में खेलना चाहते हैं, लेकिन समय के साथ वो पेशेवर हो जाते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं जब भी किसी युवा क्रिकेटर से बात करता हूं तो उनका हीरो ऐसा क्रिकेटर होता है, जिसने तीनों प्रारूपों में सफलता हासिल की हो, लेकिन फिर वो अपने करियर को लेकर वास्तविक तौर पर सोचते हैं, इस खेल के सुपरस्टार्स अभी भी तीनों प्रारूपों में खेलना चाहते हैं।' बता दें कि द्रविड़ इकलौते ऐसे क्रिकेटर हैं, जो दो बार 300 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में शामिल रह चुके हैं। द्रविड़ ने भारत के लिए 164 टेस्ट, 344 एकदिवसीय और एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।

द्रविड़ ने मार्च 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। उनके नाम 48 अंतरराष्ट्रीय शतक हैं। द्रविड़ अंडर-19 और इंडिया-ए टीम के कोच रह चुके हैं। अभी वो नेशनल क्रिकेट अकैडमी (एनसीए) के हेड हैं। द्रविड़ की कप्तानी में भारत ने इंग्लैंड में पहली बार टेस्ट श्रृंखला जीती थी।

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