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राखी का महत्त्व कम नहीं होना चाहिए - अली खान

राखी का महत्त्व कम नहीं होना चाहिए - अली खान
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नई दिल्ली । Action India News

राखी यानी रक्षाबंधन पर्व पर मशहूर शायर मुनव्वर राणा साहब का शेर मेरे जहन में आता है किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा, अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा | रक्षाबंधन का त्योहार देश-दुनिया में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है |

यह त्योहार भारतवर्ष में मनाये जाने के कारण इसे राष्ट्रीय त्योहार का दर्जा हासिल है | इस दिन सरकारी अवकाश रहता है | इस त्योहार का प्राचीन काल से विशेष महत्त्व रहा है | यह त्योहार वर्षा ऋतु में श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाता है | रक्षाबंधन का त्योहार प्राचीन काल से ही प्रचलन में है |

वर्तमान समय में यह रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के संबंधों को प्रगाढ़ और चिरस्थाई रूप देने का कार्य करता है | इस दिन बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधकर अटूट प्यार का इजहार करती है | रक्षाबंधन के अवसर पर बहन अपने भाई से मिला करती है |

इस त्योहार को खास बनाने के लिए बहन अपने भाई को विशेष उपहार देती है | वह ऐसा इसलिए करती है कि भाई-बहन का प्यार अटूट और उसके महत्त्व को जाहिर करने के लिए उपहार देना पसंद करती है | बहन अपने भाई के कलाई पर राखी बांधकर ऐसी अपेक्षा करती है कि भाई अपनी बहन के प्रति फर्ज निभाने का वचन देगा और यह वचन अटूट और शाश्वत रहेगा |

रक्षाबंधन का यह त्योहार आपसी भाईचारे, समरसता और सौहार्द की मिसाल पेश करता आया है | यदि हम ऐतिहासिक काल की बात करें तो हमें चित्तौड़गढ़ की रानी कर्णवती और हुमायूं का राखी-बंध बहन और भाई का अनूठा नजीर मिलता है जहां रानी कर्णवती ने गुजरात की ओर से बहादुर शाह के आक्रमण को देखते हुए हुमायूं को राखी भेजी थी | वहीं हर वर्ष ऐसे कई नजीर देखने को मिलते है, जो हिन्दू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने का काम करते है | कहीं न कहीं ऐसे उदाहरण सहिष्णुता की पृष्ठभूमि को प्रखर करते है जो कि बेहद जरूरी भी है |

आजकल राखी का एक अलग प्रकार का ट्रेंड चल पड़ा है | आज के दौर में बहनें सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर राखी प्रेषित करती है, वहीं भाई उसे सोशल मीडिया पर स्वीकार कर लेते है | आज से पहले बहनें चलकर भाई के प्रांगण में राखी बांधा करती थी |

इस खूबसूरत परम्परा को बरकरार रखने के लिए सरकार महिलाओं के लिए रक्षाबंधन पर मुफ्त यात्रा मुहैया करवाती है | सरकार की यह पहल सचमुच प्रशंसनीय है | रक्षाबंधन जैसा सांस्कृतिक त्योहार सामाजिकता से भरपूर है, इसी सामाजिकता को बनाये रखने के लिए पुरानी परम्परा का कायम रहना निहायत जरूरी है |

लेकिन इस बार की यह राखी अपने आप में अनूठी और निरालेपन से भरपूर है | इसके पीछे की वजह क्या है? यह हम सब जानते ही है, इस कोविद-19 संक्रमण के काल में दूर-दराज इलाकों में रहने वाली बहनों का भाई के पास पहुंचना शायद संभव न हो |

हालांकि देश में इस समय अनलॉक की प्रक्रिया चल रही है, फिर भी कोरोना का खौफ कम नहीं हुआ है | इन दिनों कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही हैं | ऐसे में कोई भी भाई नहीं चाहेगा कि बहन इतनी दूरी से चलकर आए, जहां सक्रमित होने का खतरा अधिक हो | लेकिन इस बार एक और दिक्कत है कि राखी को कूरियर करने में परेशानी हो रही है |

ऐसे में कई भाइयों की कलाई राखी के बिना रहने की पूरी संभावना हैं | ऐसे में भाई-बहन के आपसी प्यार को राखी के उस धागे से कहीं ज्यादा मजबूत करने की जरूरत है | भाई-बहन का प्यार दिल में होना चाहिए और बहन की रक्षा का वचन मन-मस्तिष्क में होना चाहिए |

हमारे देश में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग निवास करते हैं | देश में होली, दिवाली और ईद जैसे त्योहार बड़े उल्लास और खुशी के साथ मनाये जाते हैं | दो दिन पहले ईद का त्योहार मुस्लिम समुदाय द्वारा बड़े भाईचारे के साथ मनाया गया |

रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा से समरस और सौहार्द की बानगी पेश करता आया है | जहां पारिवारिक संबंधों में मिठास की कामना की जाती है और भाई-बहन का परस्पर स्नेह बना रहता है | कई शायरों ने रक्षाबंधन और राखी के महत्त्व को अलग-अलग ढ़ंग से प्रस्तुत किया हैं |

मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने लिखा है किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा, अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा | सचमुच भाई-बहन का यह त्योहार बहुत प्यारा-सा पर्व है | इस प्यारे से पर्व में मुहब्बत और संजिदगी देने का बखूबी काम मुस्तफा अकबर ने किया है, उन्होंने लिखा है बहनों की मोहब्बत की है अज़्मत की अलामत, राखी का है त्यौहार मोहब्बत की अलामत |

वहीं नजीर अकबराबादी कहते है कि चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी, सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी | रक्षाबंधन वर्षा ऋतु के सुहावने सावन में आने वाला त्योहार है | इस सांस्कृतिक और सामाजिक त्योहार का महत्त्व कभी कम नहीं होना चाहिए |

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