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रक्षा संकल्प का प्रतीक दिवस है रक्षाबंधन - श्याम सुंदर जैन

रक्षा संकल्प का प्रतीक दिवस है रक्षाबंधन - श्याम सुंदर जैन
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नई दिल्ली । Action India News

रक्षाबंधन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस दिन का प्रत्येक बहन बेसब्री से इंतजार करती है कि वह रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाइयों को राखी बांध सकें। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन को भाई बहन का त्यौहार माना जाता है, मगर वास्तव में यह त्यौहार रक्षा संकल्प का त्यौहार है और रक्षाबंधन रक्षा सूत्र का प्रतीक है।

इस रक्षा सूत्र को सिर्फ बहन भाई को ही नहीं, बल्कि पत्नी पति को और रक्षा की गुहार के साथ कोई किसी को भी बांध सकते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार पत्नी ने अपने पति को रक्षा सूत्र के रूप में राखियां बांधी भी है।

इस बात का उल्लेख हिंदू धर्म शास्त्रों में भी है। भविष्य पुराण में भी यह लिखा है कि जरूरी नहीं कि बहन ही भाई के राखी बांधे, वास्तव में यह रक्षा का त्यौहार है और आप जिस किसी की भी रक्षा का संकल्प करना चाहे, उसके लिए किसी को भी राखी बांध व बंधवा सकते हैं।

धर्म शास्त्रों के अनुसार जब दानव देवताओं का युद्ध चल रहा था और देवसेना पराजित होने की स्थिति में आ गई। उस समय इंद्र देव की रक्षा के लिए उनकी पत्नी शचि ने तप व्रत किया था। श्रावण शुक्ला पूर्णिमा के दिन उन्हें तप के प्रतिफल पर एक रक्षा सूत्र मिला था, जिसे उन्होंने इंद्र देव की कलाई पर बांधा था।

उसके बाद देवताओं ने दानवों को पराजित कर दिया था। इसी प्रकार असुर राज बलि ने जब तपस्या कर वरदान में भगवान विष्णु को पाताल लोक में वास करने का वर मांगा था। वरदान के अनुसार विष्णुजी पाताल लोक चले गए, तो देवी लक्ष्मी तथा अन्य देवता गण चिंतित हो गए कि क्या किया जाए ? तब एक गरीब ब्राह्मण स्त्री का वेश धारण कर लक्ष्मी ने जाकर असुर राज बलि को राखी बांधी थी।

राखी बांधने पर वरदान स्वरूप उन्होंने विष्णु देव को पाताल लोक से वापस देवलोक ले जाने का वर मांगा था। बलि राज ने विष्णुजी को वापस देवलोक भेजे जाने का अपना वादा पूरा किया। संयोगवश उस दिन भी श्रावण माह की पूर्णिमा ही थी।पौराणिक मान्यता है कि शिशुपाल वध के समय जब भगवान श्री कृष्ण की अंगुली कट गई थी।

उस समय द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़ कर बांधी थी और बाद में धृतराष्ट्र की सभा में श्री कृष्ण ने द्रोपदी की चीर हरण के दौरान रक्षा की थी।इसके अलावा रक्षा सूत्र के ऐतिहासिक तथ्य भी सामने आते रहे हैं।

एलेक्जेंडर जब सम्राट पुरू से युद्ध करने के लिए भारत आए थे, तब एलेक्जेंडर की पत्नी ने भी सम्राट पुरू को राखी भेजी थी और यह वादा लिया था कि युद्ध में वह एलेक्जेंडर वध नहीं करेंगे। विधवा रानी कर्णावती द्वारा सम्राट हुमायूं को राखी भेजे जाने का उल्लेख भी इतिहास में है।

गुजरात के सुल्तान ने जब हमला कर दिया था तो रानी कर्णावती द्वारा भेजी गई राखी पर हुमायूं ने उनकी रक्षा के लिए चित्तौड़गढ़ सेना भेजी थी।उल्लेख यह भी आता है कि गुरुकुलों में अध्ययन के दौरान ऋषिगण, गुरु आदि भी अपने शिष्यों को इस पर्व पर राखी बांधते थे।

इस प्रकार के पौराणिक और ऐतिहासिक तथ्यों से यह साबित हो जाता है कि भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माने जाने वाला रक्षाबंधन वास्तव में रक्षा संकल्प दिवस जैसा पर्व है। यह आवश्यक नहीं कि इस दिन बहन ही भाई के राखी बांधे। इस विशेष पर्व पर कोई भी व्यक्ति या महिला अपनी रक्षा की गुहार के साथ किसी को भी राखी बांध सकते हैं।

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