Top
Action India

लाॅकडाउन में रामायण : नई पीढ़ी के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श को समझने का अवसर

लाॅकडाउन में रामायण : नई पीढ़ी के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श को समझने का अवसर
X

बेगूसराय। एएनएन (Action News Network)

करीब तीन दशक बाद दूरदर्शन पर धार्मिक सीरियल रामायण-महाभारत का प्रसारण शुरू होने से लोगों में खुशी देखी जा रही है। सरकार के इस निर्णय की हर ओर सराहना हो रही है। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए जारी लाॅकडाउन में जब लोग अपने घरों में बंद उब रहे थे तो इस बीच रामायण और महाभारत शुरू होने से लोग खुश हो रहे हैं तथा तीन दशक पुराने यादों को ताजा करने में जुटे हैं।

निर्धारित समय पर लोग अपने अपने घरों में टीवी खोलकर चिपके रहे। हालांकि बिजली ने लोगों को परेशान किया लेकिन इसके बाद भी सभी उम्र वर्ग के लोगों में उत्सुकता देखी जा रही है। चालीस वर्ष से अधिक उम्र के लोग तो नई पीढ़ी को पहले के सीरियल देखने के तरीके और रामायण के महत्व को भी बता रहे हैं।

वे बता रहे हैं कि नब्बे के दशक में जब टीवी पर रामायण दिखाया जाता था तो उस समय गिने चुने घरों में ही टेलीविजन हुआ करता था उसमें भी ब्लैक एंड व्हाइट टीवी। रविवार के दिन बड़ी संख्या में मुहल्लेवासी टीवी वाले के घर पर जुटते थे। मुहल्लेवासियों के साथ रामायण देखने का एक अलग मजा था। इससे लोगों के बीच संवाद भी स्थापित होता था। बिजली की समस्या को लेकर बैट्री को चार्ज करवाना पड़ता था।

तब डीटीएच का जमाना नहीं था। सीरियल शुरू होने से पहले एंटीना को सही कर टीवी पर तस्वीर साफ रखने का प्रयास किया जाता था। बीच-बीच में भी एक लोग एंटीना ठीक करने पर लगे रहते थे। बाहर में एक व्यक्ति एंटीना ठीक करता था तो घर के अंदर से दूसरा आवाज लगाता था आ जाओ आ जाओ ठीक है, थोड़ा और घुमाओ झरझराहट हो रही है। आज संचार माध्यमों के विकसित होने से यह प्रक्रिया खत्म हो गई है।

बखरी निवासी विष्णुदेव मालाकार, बेगूसराय के निवासी अरुण कुमार सिंह आदि ने रामायण धारावाहिक का एक बार फिर प्रसारण शुरू किए जाने पर खुशी का इजहार करते हुए कहा कि लाॅकडाउन के समय सरकार का यह फैसला काबिले तारीफ है। घर में बैठे-बैठे और भी ज्यादा बोर होने लगे हैं।

रामायण का प्रसारण शुरू होने से समय कटने के साथ ही नई पीढ़ी के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के आदर्श को समझने का अच्छा अवसर है। रामायण को देखने-सुनने और समझने से लोगों के मन से नाकारात्मक तथ्यों का अंत होगा। राम का आदर्श लोगों को जीवन जीने की शैली सिखलाता है। एक राजा का प्रजा के प्रति, एक भाई का अपने भाई के लिए तथा एक मित्र के लिए अपने फर्ज का बोध भी कराता है।

Next Story
Share it