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सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी बचपन से ही जगा रहे हैं 'योग की अलख'

सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी बचपन से ही जगा रहे हैं योग की अलख
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बलरामपुर । एएनएन (Action News Network)

जिले में योग गुरु के नाम से प्रसिद्ध सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी विरेन्द्र विक्रम सिंह बचपन से ही योग का अलख जगा रहे हैं। विभिन्न क्रियाओं को लेकर नौ विश्व रिकॉर्ड उनके नाम है।

विक्रम सिंह भारतीय स्टेट बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत रहे। जिले के तुलसीपुर, बलरामपुर ब्रांच में सेवा देते हुए दिसंबर वर्ष 2014 में संभल जनपद के बहजोई बैंक शाखा से सेवानिवृत्त हुए। योग शिविरों में इनके द्वारा किया जाता कठिन योगिक कंजर, नौली चालन,धैती क्रिया देख लोग दातों तले अंगुली दबाने पर मजबूर हो जाते हैं।

इनके नाम ये है रिकॉर्ड

वर्ष 2018 में 18 प्रकार के शीर्षासन से लिम्का बुक आफ रिकॉर्ड, वर्ष 2019 में शंख प्रच्छालन तथा 23 प्रकार के क्रिया से गोल्डेन बुक आफ रिकॉर्ड, इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड सहित नौ रिकॉर्ड इनके नाम दर्ज है।

श्री सिंह इंटरनेशनल नेचुरोपैथी ऑर्गनाइजेशन (आईएनओ) के सदस्य की है। हाल ही में इन्हें जिले का संयोजक भी बनाया गया है। पिछले पांच वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, प्राकृतिक चिकित्सा पर जिले में प्रमुख भूमिका निभाई है।

एक्शन इंडिया समाचार से योग गुरु विरेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि बचपन में उनके पिताजी की तबीयत बिगड़ने से पिताजी के साथ इलाज के लिए आरोग्य निकेतन धाम गोरखपुर गये थे। वहां पर 15 दिन प्राकृतिक चिकित्सा के उपरांत योग करने के लिए एक किताब दिया गया। घर पर किताब के माध्यम से योग करने में पिताजी का सहयोग करते रहे। पिताजी के साथ योग करते-करते योग के प्रति लगाव बढ़ता गया। योग उनके दिनचर्या में शामिल हो गया।

बताया कि बैंक में सर्विस के समय भी उनका योग कार्य बाधित नहीं हुआ। जहां भी मौका मिला योग के प्रसार के लिए गये। सेवानिवृत्त के उपरांत अपने पैतृक घर विनोहनी बलरामपुर आ गये। सेवानिवृत्त के बाद बलरामपुर पहुंचने के उपरांत योग का प्रसार ही उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य हो गया है।

श्री सिंह ने कहा कि पुराने समय में ऋषि महर्षि योग के बल पर हजारों वर्षों तक जीवित रहते थे। योग केवल एक व्यायाम ही नहीं बल्कि आपके शरीर और आत्मा पर नियंत्रण का माध्यम है। स्वस्थ रहना चाहते हैं तो योग को जीवन में धारण करें। जब हम स्वस्थ रहेंगे तभी देश स्वस्थ और समृद्धि रहेगा।

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