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राज्य में कांग्रेस बचाने के लिए कैप्टन की विदायी आवश्यक

राज्य में कांग्रेस बचाने के लिए कैप्टन की विदायी आवश्यक
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चंडीगढ़ । Action India News

पंजाब कांग्रेस में नकली शराब कांड को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। मंत्रियों की शिकायतों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से खफा पंजाब से कांग्रेस के दो राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो ने अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ के विरुद्ध आरपार का मोर्च खोल दिया है।बाजवा ने साफ-साफ कहा दिया है, अगर पंजाब में कांग्रेस को बचाना है तो कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ को उनके पदों से हटाना ही होगा।

बाजवा का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब कांग्रेस का वही हाल करेंगे जो सिद्धार्थ शंकर ने पश्चिम बंगाल में किया था। आज बंगाल में कांग्रेस कई दशकों से सत्ता से बाहर है। वहीं राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह दूलो ने पंजाब सरकार के मंत्रियों द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई बयानबाजी पर पलटवार करते हुए कहा है कि शोर मचाने वाले मंत्री खुद नकली शराब माफिया से और तस्करों से मिले हुए हैं। उन्होंने फिर कहा है कि पंजाब के नकली शराब कांड की जांच सीबीआई अथवा एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट द्वारा की जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पंजाब से दोनों वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो ने चंद रोज पहले पंजाब के राज्यपाल को ज्ञापन देकर पंजाब में हुए नकली शराब कांड की जांच केंद्रीय एजेंसियों से करवाने की मांग की थी। पंजाब में अब तक नकली शराब से 113 लोगों की मौत हो चुकी है।

हालांकि पंजाब सरकार द्वारा लगातार इस मामले से जुड़े लोगों की धर-पकड़ जारी है। इसके बावजूद कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य बाजवा और दूलो का कहना है कि सरकार बड़े दोषियों पर हाथ डालने में सक्षम नहीं है। इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी द्वारा ही करवाई जानी चाहिए।
दोनों राज्यसभा सदस्यों के तीखे बयान से पंजाब की कैप्टन सरकार भड़की हुई है।

दो दिन पूर्व ही पंजाब के मंत्रियों ने पार्टी हाईकमान को पत्र लिखकर दोनों राज्यसभा सदस्यों को पार्टी से निकालने की मांग की है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी एक पत्र भेजकर पार्टी अध्यक्ष से कहा है कि इन दोनों राज्यसभा सदस्यों की पंजाब में कोई जरूरत नहीं है, इसलिए उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाना चाहिए। दो खेमों में बंटती जा रही कांग्रेस में दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल पड़ा है।

उधर पंजाब कांग्रेस में दो दर्जन से ज्यादा कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से खफा बताए गए हैं। इसके अलावा अनेकों विधायक और कांग्रेस के नेता अपनी ही सरकार की सार्वजनिक तौर पर आलोचना कर चुके हैं और पार्टी हाईकमान को कई बार शिकायतें भेज चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा को राहुल गांधी की टीम का सदस्य माना जाता है, जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह को सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है।

एक दिन पूर्व भी युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह दूलो के खन्ना मंडी स्थित निवास स्थान को घेरा था और उनके खिलाफ नारेबाजी की थी। इस पर दूलो ने कहा है कि शोर वही मंत्री मचा रहे हैं, जिनके संबंध शराब माफिया से हैं।

राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा का भी आरोप है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार जब से पंजाब में आई है तब से पंजाब सरकार के आबकारी राजस्व को ढाई हजार करोड़ से अधिक का चूना लग चुका है। इसका मुख्य कारण अवैध तौर पर चल रही शराब फैक्ट्रियां हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पिछले ही माह पंजाब के कुछ मंत्रियों ने पंजाब में शराब माफिया के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी, परंतु मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद मामला संदेहजनक रूप से शांत हो गया।

इस बीच बाजवा ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ को चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि चारों नेता कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास पर चलते हैं। वहां जिसकी भी गलती निकली, उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा। बाजवा ने यह भी कहा है कि वे मुख्यमंत्री के जवाब की प्रतीक्षा करेंगे।

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