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प्रयागराज में संगम स्नानार्थियों पर हेलीकॉप्टर से की गयी पुष्पों की वर्षा

प्रयागराज में संगम स्नानार्थियों पर हेलीकॉप्टर से की गयी पुष्पों की वर्षा
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  • बारह बजे तक पैंसठ लाख श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी

प्रयागराज। एएनएन (Action News Network)

संगम की रेती पर माघ मेले के महत्वपूर्ण स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर शुक्रवार को खुशनुमा मौसम होने पर श्रद्धालुओं की भीड़ के आने का क्रम जारी है। इसी के साथ श्रद्धालुओं पर हेलीकाप्टर से फूलों की वर्षा भी की गयी। प्रशासन के अनुसार संगम समेत अन्य स्नान घाटों पर बारह बजे तक लगभग 65 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया है।

मेला प्रशासन ने तीर्थराज प्रयाग के प्रमुख तृतीय स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर लगभग एक करोड़ लोगों के स्नान करने की संभावना व्यक्त की है। लगभग ढाई हजार बीघे में बसे हुए इस माघ मेले में श्रद्धालुओं एवं कल्पवासियों का जनसैलाब संगम की पवित्र रेती पर उमड़ पड़ा है। प्रशासन ने मकर संक्रान्ति पर जहां 12 घाटों का निर्माण कराया था, जिसे भीड़ के मद्देनजर बढ़ाकर बीस घाट बनाये गये हैं।

लगभग 12 बजे हेलीकाप्टर संगम के ऊपर उड़ रहा था और स्नान करने वाले श्रद्धालुओं पर पुष्पों की वर्षा की गयी। जिसे देखकर श्रद्धालु गदगद हो रहे थे। माघ मेला क्षेत्र में कई संत-महात्माओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह भण्डारे भी चलाया जा रहा था।

जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि समस्त सनातन धर्मियों को माघ मास भर विशेषकर मुख्य पर्व मौनी अमावस्या में प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में आकर स्नान-दान की प्रेणना देती है। संगम के इस स्नान से स्नानार्थी में देवत्व का विकास होता है। गंगा का स्नान सामान्य स्नान नहीं है।

सामान्य स्नान शरीर के मैल को धोने वाला होता है, परन्तु गंगा आदि पवित्र नदियों का स्नान मन के मैल को धोने के लिए होता है। इसलिए गंगा स्नान करने के पहले सच्चा गंगा स्नानार्थी पहले घर में एक स्नान कर लेता है, ताकि गंगा स्नान के समय जल में कोई प्रदूषण न हो।

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