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सावन माह खत्म, बियासी के लिए नहीं चला हल

सावन माह खत्म, बियासी के लिए नहीं चला हल
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  • जिले में पिछले साल से इस साल 22 मिमी औसत वर्षा कम

धमतरी । Action India News

बारिश के मौसम में पर्याप्त बारिश न होने से खेतों में दरारें उभर आई हैं। इस साल अंचल में खंड वर्षा का दौर चला। संतोषजनक बारिश नहीं होने से 22 मिमी औसत वर्षा पिछले साल की तुलना में इस साल जिले में कम हुई है। इसका विपरीत असर वनांचल क्षेत्र के खेतों में बोता फसल लेने वाले किसानों के धान फसल पर पड़ा है। सिंचाई पानी के अभाव में वे अपने खेतों में बियासी के लिए हल नहीं चला पाए है।

जिले में इस साल एक जून से छह अगस्त तक 558.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। बारिश का यह रिकॉर्ड पिछले साल की तुलना में इस साल 22 मिमी औसत वर्षा कम है। पिछले साल छह अगस्त 2019 में जिले में 580.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई थी। धमतरी तहसील में इस साल सबसे अधिक बारिश 667 मिमी हुई है, जबकि पिछले साल 565.2 मिमी बारिश हुई थी। कुरूद में पिछले साल से दो मिमी कम बारिश दर्ज की गई है।

इस साल 525 मिमी बारिश हुई है। पिछले साल 527 मिमी बारिश हुई थी। जबकि मगरलोड में पिछले साल से बहुत ही कम बारिश हुई है। इस साल सिर्फ 466 मिमी बारिश हुई है। पिछले साल 633 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। पिछले साल की तुलना में नगरी में इस साल कम बारिश 576 मिमी दर्ज की गई है। पिछले साल 597 मिमी बारिश हुई थी।

जिले के धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी तहसील में इस साल कृषि विभाग ने करीब 81000 हेक्टेयर क्षेत्रों में किसानों के माध्यम से धान बोता फसल लेने का लक्ष्य रखा था। लक्ष्य के अनुसार किसानों ने 78760 हेक्टेयर क्षेत्रफल बोता फसल लगाए हैं।

पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण इस साल इनमें से सिर्फ 225 एकड़ क्षेत्र में ही कम बारिश के चलते किसान बियासी के लिए हल चला पाए है। सिंचाई पानी के अभाव में अधिकांश किसानों ने इस साल बियासी ही नहीं की है।

किसानों के धान फसल में पर्याप्त विकास नहीं हुआ है। अभी भी कम बारिश और अधिक धूप की स्थिति के चलते धान के पौधे व जमीन सूखे से जूझ रहे हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कुछ किसान तो अपने खेतों में अभी तक खाद का छिड़काव नहीं कर पाए हैं। नगरी ब्लाक के वनांचल क्षेत्र में यह स्थिति अधिक बनी हुई है।

वहीं जिले में रोपाई लगभग खत्म होने वाला है। उपसंचालक जीएस कौशल ने बताया कि पहले की तरह अब कई किसान बियासी नहीं करते। कुछ किसान बियासी करते हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल थोड़ी कम बारिश है।

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