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विज्ञान प्रसारक सारिका ने लॉकडाउन में बच्चों को समझाया बादलों को विज्ञान

विज्ञान प्रसारक सारिका ने लॉकडाउन में बच्चों को समझाया बादलों को विज्ञान
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  • एक चम्मच पानी से बना दिया बोतल भर बादल

भोपाल । एएनएन (Action News Network)

मध्यप्रदेश में मानसूनी बारिश हो गई है और इन दिनों आकाश में बादलों ने डेरा डालना आरंभ कर दिया है। भोपाल की विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने लॉकडाउन में बच्चों की विज्ञान के प्रति समझ बढ़ाने के लिए अनूठा प्रयास करते हुए बादलों का विज्ञान समझाया। सारिका ने एक मिनरल वाटर की खाली बोतल, माचिस की तीली और एक चम्मच पानी की मदद से बोतल भरकर बादल बना दिया।

भोपाल में रविवार को सारिका घारू ने बादलों का विज्ञान बताते हुये कहा कि बादल पानी या बर्फ के हजारों नन्हे कणों से मिलकर बनते हैं। ये कण इतने हल्के होते हैं कि वे हवा में आसानी से उड़ते रहते हैं।

सारिका ने बताया कि लगभग रोज दिखने वाले उंचाई पर उडऩे वाले सामान्य बादल सिरस कहलाते हैं। बर्फ के कणों से बने ये बादल हल्के और फुसफुसे होते हैं। रूई के ढेर की तरह दिखने वाले गहरे रंग के बादल क्यूमुलस ‘पानी से भरा’ कहलाते हैं। इनसे ओलों की बरसात हो सकती है। ये एवरेस्ट पर्वत से दुगने ऊंचे हो सकते हैं।

मानसूनी बादलों के बारे में बताते हुये सारिका ने कहा कि निचाई पर स्थित बादल स्ट्रेटस कहलाते हैं। ये पूरे आकाष को घेर लेते हैं। जब ये बादल वर्षा करते हैं तो इन्हें निंबोस्ट्रेटस कहते हैं। जब गरम हवा ऊपर उठकर ठंडी हो जाती है तो बादलों में संघनन के कारण बूंदें बनती हैं। बादलों को देखकर मौसम की भविष्यवाणी की जा सकती है।

कैसे किया प्रयोग-

सारिका ने एक खाली बोतल में एक चम्मच पानी डालकर उसमें माचिस की जलती तीली डालकर बोतल का ढक्कन बंद कर दिया। जब बोतल को दबा कर छोड़ा गया तो खाली बोतल बादल से भर गई। जब बोतल को दबाया गया तो अंदर की हवा का दाब बढऩे से उसका ताप बढ़ा और चम्मच भर पानी गर्म होकर वाष्प में बदल गया। जब बोतल का दबाब कम किया गया तो वह वाष्प ठंडी होकर संघनित होकर बादल के रूप में दिखने लगी। जब बोतल का ढक्कन खोला गया तो बादल बाहर निकलते दिखे।

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