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धर्म, अध्यात्म के साथ सदियों से योग की अलख जगा रहा शक्ति पीठ मंदिर देवीपाटन

धर्म, अध्यात्म के साथ सदियों से योग की अलख जगा रहा शक्ति पीठ मंदिर देवीपाटन
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बलरामपुर । एएनएन (Action News Network)

शक्ति पीठ मंदिर देवीपाटन धर्म, अध्यात्म के साथ ही सदियों से योग की अलख जगा रहा है। यहां पर महायोगी गुरु गोरक्षनाथ तथा उनके परम शिष्य रतन नाथ योगी ने योग साधना कर योग की अलख जगाई थी।

गुरु गोरक्ष नाथ के आने के बाद से ही यहां रह रहे नाथ संप्रदाय के संत अध्यात्म के साथ योग का प्रकाश फैला रहे हैं। यहां सदियों से नित्य योगी होता चला आ रहा है। रह रहे दर्जनों संतों,पीठ द्वारा संचालित थारु छात्रावास के छात्रों की दैनिक जीवन योगिक क्रिया से ही शुरु होती है। शक्ति पीठ द्वारा समय-समय पर अध्यात्म के साथ ही सामाजिक समरसता के लिए बृहद स्तर पर खिचड़ी भोज, योग का कार्यक्रम आयोजित कराया जाता है।

पीठ पर ही 108 वर्षीय योगी स्वामी जी महाराज उम्र के इस पड़ाव पर भी योग नित्य करते है तथा उनसे मिलने आ रहे लोगों को योग के फायदे बताते हुए योग की सीख देते है।

देवीपाटन पीठाधीश्वर मिथिलेश नाथ योगी ने बताया कि महायोगी गुरु गोरक्षनाथ से ही योग का प्रदुर्भाव हुआ है। नाथ सम्प्रदाय के संत देश-विदेश जहां भी है। धर्म के साथ-साथ योग का प्रसार कर रहे हैं। देवीपाटन पीठ पर सदियों से रह रहे संतो के अलावा तीस वर्ष से संचालित निशुल्क थारु छात्रावास के बच्चों को शिक्षा के साथ रोजाना योग कराया जाता है। यहां रह रहे बच्चों के दिनचर्या में योग शामिल है। विद्यालय द्वारा संचालित विद्यालयों में योग कार्यक्रम आयोजित होते रहते है।

माना जाता है कि दुनिया में योग की परम्परा महायोगी योगी गुरुगोरक्ष नाथ के द्वारा शुरु हुई थी। जहां-जहां गुरु गोरक्षनाथ जी गये अध्यात्म के साथ ही योग का प्रसार हुआ। शक्ति पीठ देवीपाटन में महायोगी गुरु गोरक्ष नाथ जी ने धूनी रमाई थी।

जो आज भी जल रही है। शक्तिपीठ देवीपाटन में पहुंच रहे श्रद्धालु, मां पाटेश्वरी के दर्शन के उपरांत थारु छात्रावास में रह रहे बच्चों द्वारा अनुशासित ढंग से किया जाता है। आरती पूजन,सीख रहे कुस्ती के दावपेंच,योग करते देख सीख ले रहे है। वर्तमान में पूर्णबंदी के बाद से ही छात्रावास के बच्चों को उनके घर भेज दिया गया है।

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