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तकनीकी रूप से श्रावणी मेला का आयोजन सम्भव नहीं

तकनीकी रूप से श्रावणी मेला का आयोजन सम्भव नहीं
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देवघर । एएनएन (Action News Network)

विश्व के सबसे लंबे मेले के रूप में ख्याती प्राप्त बैद्यनाथ धाम देवघर का श्रावणी मेला इस बर्ष लगने की संभावनाएं तकनीकी तौर से अब सम्भव न रहा। ज्ञात हो कि देवघर-बासुकीनाथ में लगने वाले वृहद श्रावणी मेले को लेकर जिला प्रशासन द्वारा तकरीबन सालोंभर व्यवस्थाएँ संचालित होती हैं जिसमें लगभग 6 माह तक तो सारी व्यवस्थाएँ श्रावणी मेले को केंद्रित कर ही किया जाता है।

बावजूद प्रशासकीय व्यवस्थाएँ पूर्ण नहीं हो पाती। ऐसे में दो सप्ताह के शेष बचे समय में 30 जून तक मंदिर को सरकारी आदेश से बन्द रखा गया है । जिस कारण यदि सरकार निर्देश भी दे तो मात्र 4 दिनों की अवधि में कोई चमत्कार ही श्रावणी मेले की तैयारियों को मुकम्मल कर सकता है।

श्रावणी मेला संचालन के लिए झारखण्ड के प्रवेश द्वारा दुम्मा से लेकर बासुकीनाथ तक की जाने वाली तैयारियों में आवासन,छायादार शेड, परिवहन-यातायात, विधि-व्यवस्था, सुरक्षा,साफ-सफाई , मंदिर व्यवस्थाएँ, रूट-लाइनिंग, आपदा सुरक्षा, मेला व्यवस्थाएँ कर्मियों ,दंडाधिकारियों की तैनाती ,स्वास्थ्य सुविधाएँ, बाजार के लिए नियंत्री व्यवस्थाएँ लागू कर पाना कतई सम्भव नहीं है।

दूसरी ओर 45-50 लाख श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए व्यापारी 3 से 4 माह पूर्व अपने-अपने सामानों के संग्रहन में लग जाते रहे हैं किन्तु इस बर्ष व्यापारिक दृष्टिकोण से यह सब कुछ नहीं किया जा सका। जिससे श्रावणी मेले के लगने की संभावना के दृष्टिकोण से देखें तो लाखों की संख्या में आये श्रद्धालुओं के लिए भोजन,प्रसाद,लोहे एवं अन्य सामानों की खरीदारी के लिए उपलब्ध ही नहीं हो सकेगा।

क्योंकि मेला आरम्भ होते ही शहर को नो एंट्री जॉन घोषित करना प्रशासन की बाध्यता होती है ।अगर ऐसा न हो तो शहर की व्यवस्था संभालना बहुत मुश्किल हो जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा राज्य सरकार से श्रावणी मेला आरम्भ होने सम्बन्धी स्प्ष्ट निर्देश की मांग की गई है।

ऐसे में संभावना कम ही जान पड़ता है कि राज्य सरकार कोरोना संक्रमन के जोखिम को देखते हुए शायद ही ऐसे आत्मघाती निर्णय देने का कार्य करेगी । उस स्थिति में जब कल 21 जून को देवघर के सारठ में एकमुश्त 11 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हों।

वैसे स्थानीय सांसद बार-बार श्रावणी मेला आरम्भ किये जाने की माँग सरकार से कर रहे हैं किंतु यह व्यवहारिक नहीं जान पड़ता क्योंकि श्रावणी मेला के केंद्र मंदिर परिसर सहन घनी आबादी क्षेत्र में अवस्थित है जहां सर्वाधिक सुरक्षा की जरूरत होगी।

यदि कोरोना-दुर्घटना हुई तो फिर इसके व्यापक प्रसार को रोक पाना किसी के बूते नहीं रह जाएगा क्योंकि तीर्थ पुरोहित समाज आगंतुक श्रद्धालुओं को धार्मिक संस्कार वश न तो अपने घरों में टिकने से मना कर सकते हैं। और ना ही उन्हें आशीर्वाद स्वरूप उनके पीठ पर हाथ रखने से परहेज़ कर सकते हैं।

इतना ही नहीं, आत्मीय संबंधों के कारण श्रद्धालु इनके शौचालयों तक का प्रयोग धड़ल्ले से करते हैं जो स्थिती की भयावहता ही प्रस्तुत करता है। उल्लेखनीय है कि, देवघर श्रावणी मेला न लगने की संभावनाओं को देखते हुए एक ऐसा तबका भी खासा निराश दिख रहा जो ब्याज पर छोटे-छोटे दुकानदारों को रुपये देते हैं और मोटी ब्याज वसूलते हैं, किन्तु इसबार इसकी संभावना नहीं देख कर ऐसे तबकों में मेला अयोजन के स्वर उठते दिख पड़ते हैं। जबकि अधिकांश तीर्थ-पुरोहित संकेत देवघरवासी मेला अयोजन के विरुद्ध दिख रहे हैं।

यहाँ यह बताना जरूरी होगा कि श्रावण -भादो में लगने वाला श्रावणी मेला में देवघर मिनी आर्थिक राजधानी बन जाता है। और अरबों का व्यापार भी होता है । किंतु यह व्यवसायिक हित जन हानि की संभावनाओं को देखते उपयुक्त होगा यह निर्णय इसी बात को लेकर किया जाना होगा। देवघर-बासुकीनाथ श्राइन बोर्ड भी अबतक इस दिशा में मौन है।

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