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राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता में बिहार का दबदबा, बेगूसराय ने जीता गोल्ड एवं सिल्वर मेडल

राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता में बिहार का दबदबा, बेगूसराय ने जीता गोल्ड एवं सिल्वर मेडल
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बेगूसराय। एक्शन इंडिया न्यूज़


गुजरात के अहमदाबाद में चल रहे ऑल इंडिया जी.वी. मावलंकर शूटिंग चैंपियनशिप में बेगूसराय के दो खिलाड़ी ने गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिया है। बेगूसराय के इनियार गांव निवासी दिनेश सिंह के पुत्र सुमन कुमार ने बेगूसराय राइफल संघ की ओर से बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में गोल्ड मेडल जीता है। इस प्रतियोगिता में भारत के विभिन्न राज्यों से कई खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जिसमें कड़ी टक्कर के बाद सुमन कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। गुजरात राइफल संघ के सेक्रेटरी एवं इंडिया शूटिंग टीम के कोच ने मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इससे पहले भी सुमन ने राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई गोल्ड एवं सिल्वर मेडल प्राप्त किया है।

जूनियर वर्ग में खम्हार गांव निवासी डॉ. अजय कुमार एवं डॉ. करुणा कुमारी के पुत्र प्रत्यूष कुमार ने 50 मीटर प्रोन इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर नेशनल क्वालीफाई किया है। पिछले वर्ष भी दस मीटर में प्रत्यूष कुमार ने नेशनल क्वालीफाई किया था तथा स्टेट और जोनल में गोल्ड और सिल्वर मेडल प्राप्त किया था। बिहार में खेल की नर्सरी के नाम से चर्चित बेगूसराय के दो खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतने से हर और जश्न का माहौल है। खेल और खिलाड़ियों के विकास को समर्पित संगठन क्रीड़ा भारती बेगूसराय के जिला मंत्री रणधीर कुमार, माया कौशल्या फाउंडेशन के संस्थापक मनीष कुमार, जयमंगला वाहिनी के अवनीश कुमार आदि ने बधाई देते हुए नित नए ऊंचाई छूने की शुभकामना दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीतने वाले सुमन ने बताया कि उनकी सफलता में जिला राइफल संघ के सेक्रेटरी विनोद मस्करा, बरौनी राइफल क्लब के सेक्रेटरी राजाराम राय एवं अध्यक्ष एस.पी. सर तथा जिलाधिकारी एवं आर्म्स मजिस्ट्रेट का बहुत बड़ा योगदान है। समय-समय पर क्रीड़ा भारती बेगूसराय, माया कौशल्या फाउंडेशन एवं मित्रों का सहयोग मिलता रहा। सुमन ने कहा कि यह खेल बहुत खर्चीला है, आगे जाने के लिए 15 से 20 लाख रुपए की आवश्यकता है। बहुत कम साधन एवं विपरीत परिस्थिति में भी बेहतर खेलने का प्रयास किया है। इस खेल को आगे खेलने के लिए संसाधन एवं ट्रेनिंग के लिए आर्थिक रूप से सहयोग तथा अधिकारिक मदद की दरकार है। यदि मदद मिले तो हम ओलंपिक एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल में भारत को मेडल दिलाएंगे।

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