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ऑस्ट्रेलियाई अंपायर ब्रूस ऑक्सेनफोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास

ऑस्ट्रेलियाई अंपायर ब्रूस ऑक्सेनफोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास
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दुबई। एक्शन इंडिया न्यूज़

ऑस्ट्रेलियाई अंपायर ब्रूस ऑक्सेनफोर्ड ने गुरुवार को 15 साल से अधिक समय तक खेल के तीनों प्रारूपों में कार्य करने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। वर्ष 2012 के बाद से अंपायरों के आईसीसी एलीट पैनल के नियमित सदस्य रहे ऑक्सेनफोर्ड ने 62 टेस्ट मैचों में अंपायरिंग की। ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच खेला गया मैच उनका अंतिम मैच था।

ऑक्सेनफोर्ड ने एक बयान में कहा,"मैं अंपायर के रूप में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को गर्व के साथ देखता हूं। यह विश्वास करना अभी भी मुश्किल है कि मैंने करीब 200 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग की है। इतना लंबा करियर वास्तव में पहले मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरी यात्रा इतनी लंबी होगी।"

60 वर्षीय, ऑक्सेनफोर्ड ने जनवरी 2006 में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच गाबा में खेले गए टी 20 मुकाबले से अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरूआत की थी। उन्होंने पिछले तीन पुरुष विश्व कप और पिछले तीन टी 20 विश्व कप में हिस्सा लिया।

अंपायर बनने से पहले, ऑक्सेनफोर्ड ने लेग स्पिन गेंदबाज और निचले क्रम के बल्लेबाज के रूप में आठ प्रथम श्रेणी मैचों में क्वींसलैंड का प्रतिनिधित्व किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अपनी सेवानिवृत्ति के बावजूद वह घरेलू टीम क्रिकेट से जुड़े रहेंगे।

उन्होंने कहा, "मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया, अपने सभी सहयोगियों, आईसीसी एलीट और इंटरनेशनल पैनल को उनके समर्थन और प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।"

उन्होंने आगे कहा,"मेरे पास मैच अधिकारी के रूप में एक शानदार समय था और इस तरह के पेशेवर समूह का हिस्सा बनने के साथ आने वाले कैराडरी को याद करेंगे। मैं विशेष रूप से उन शानदार लोगों के साथ देखना और बातचीत करना याद करूंगा जो हमारे खेल के आसपास के समर्थन ढांचे का हिस्सा हैं।"

  • ऑक्सेनफोर्ड ने कहा कि उनकी इच्छा अपने देश में घरेलू क्रिकेट में अंपायरिंग करना है।

उन्होंने कहा,"सबसे महत्वपूर्ण बात, मैं अपनी पत्नी जो, बेटे जेम्स और बेटी क्रिस्टन को उनके प्रेम और समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मेरे लिए उनके बलिदानों के बिना इतना लंबा करियर बनाना संभव नहीं था और इसके लिए मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा।" उन्होंने कहा, "अब जब कि मैं अंतरराष्ट्रीय मैचों में नहीं रहूंगा, मैं ऑस्ट्रेलिया में उस खेल की सेवा जारी रखना चाहता हूं, जो मुझे पसंद है।"

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