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देश-विदेश के क्रिकेटरों को भाता है ग्रीनपार्क का मैनुअल स्कोर बोर्ड

देश-विदेश के क्रिकेटरों को भाता है ग्रीनपार्क का मैनुअल स्कोर बोर्ड
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  • कंप्यूटर की तरह काम करता है मैनुअल बोर्ड,
  • 1952 में हुई स्थापना, 1957 में पहली बार अन्तरराष्ट्रीय मैच में हुआ था प्रयोग


कानपुर। एक्शन इंडिया न्यूज़


ग्रीनपार्क स्टेडियम में भले ही अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच अपेक्षा के अनुरुप न हो रहे हों, लेकिन यहां का मैनुअल स्कोर बोर्ड देश ही नहीं विदेश के क्रिकेटरों का ध्यान आकर्षित करता है। हो भी क्यों न, यह मैनुअल स्कोर बोर्ड पूरी तरह से कंप्यूटर की भांति काम करता है और इसकी स्थापना 1952 में हुई थी।

इसके बाद 1957 में पहली बार इस मैनुअल बोर्ड का प्रयोग वेस्टइंडीज के खिलाफ क्रिकेट मैच में किया गया। अंतिम बार 2017 में इंग्लैंड के साथ खेले गए टी-20 मुकाबले में इसका उपयोग किया गया था। अब भारत और न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले क्रिकेट मैच में इस मैनुअल बोर्ड को प्रयोग में लाने की तैयारी की जा रही है।

ब्रिटिश हुकूमत के दौरान साल 1945 में बने ग्रीनपार्क स्टेडियम का नाम मैडम ग्रीन के नाम पड़ा। वह इस मैदान पर घुड़सवारी करने आती थीं। गंगा का किनारा और हराभरा खूबसूरत नजारा, हमारे शहर की शान ग्रीनपार्क स्टेडियम की यही तो विशिष्ट पहचान है। 1945 से लेकर अब तक स्टेडियम ने खूब उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन क्रिकेट के हर फॉर्मेट को संजीवनी देने वाले इस स्टेडियम की शान-ओ-शौकत दिनों दिन बढ़ती गई। कई विश्व रिकार्ड सहेजे इस मैदान की हरियाली में क्रिकेट की वह पौध तैयार हुई जिसने देश ही नहीं दुनिया में नाम कमाया।

  • देश विदेश के क्रिकेटरों को करता है आकर्षित


ग्रीनपार्क स्टेडियम की खूबसूरती खासकर जब सांयकाल गंगा किनारे की हवाएं आती हैं तो उस क्षण को क्रिकेटर अहसास करते हैं। स्टेडियम की खूबसूरती के साथ यहां के मैनुअल बोर्ड पर क्रिकेटरों की बराबर नजर रहती है, जो बिना कंप्यूटर के कंप्यूटर की भांति दूर से ही क्रिकेटरों को रन विकेट आदि की जानकारी देता है। इस मैनुअल स्कोर बोर्ड की स्थापना वर्ष 1952 में टेस्ट मैच के दौरान हुई थी। तब से वर्ष 2016-17 तक हुए सभी टेस्ट और वन डे मैचों में उप्र क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा मैनुअल स्कोर बोर्ड का ही प्रयोग किया गया। 1957 में पहली बार वेस्टइंडीज के साथ खेले गए मैच में इस स्कोर बोर्ड ने क्रिकेट प्रेमियों के साथ देश-विदेश के खिलाड़ियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। ग्रीन पार्क में अंतिम बार 2017 में इंग्लैंड के साथ खेले गए टी-20 मुकाबले में इसका उपयोग किया गया था।


  • न्यूजीलैंड के खिलाफ फिर होगा प्रयोग


कंप्यूटर की तरह काम करने वाले भारत के सबसे बड़े स्कोर बोर्ड में शुमार इस मैनुअल स्कोर बोर्ड का आगामी दिनों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच ग्रीन पार्क में होने वाले टेस्ट मैच में उपयोग किया जायेगा। यूपीसीए के निदेशक युद्धवीर सिंह ने बताया कि मैनुअल स्कोर बोर्ड को जल्द दुरुस्त किया जाएगा। इसे संचालित करने में 135 पुली पर 35 लोग लगते हैं। इसमें जिस खिलाड़ी के पास गेंद जाती है, स्कोर बोर्ड में उसके नाम के आगे लाल रंग का बल्ब जल जाता था। अब तक इसका उपयोग 21 टेस्ट और 14 एकदिवसीय मैचों के साथ आईपीएल व टी-20 मैच में किया जा चुका है।


  • विश्वकप खेलने वाले शहर से एकलौते खिलाड़ी हैं कुलदीप


ग्रीनपार्क में ही खेलकर भारत के जांटी रोड्स यानी मोहम्मद कैफ ने बेहतरीन क्षेत्ररक्षण के बदौलत विश्व क्रिकेट में पहचान बनाई। देश के पहले चाइनामैन गेंदबाजी का खिताब पा चुके कुलदीप यादव भी शहर की जमी से निखरे उन सितारों में शुमार हैं, जो दुनियाभर में चर्चा का विषय बने हैं। कुलदीप शहर से विश्वकप खेलने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं।


  • एक नजर में ग्रीनपार्क

भारत को टेस्ट मैच की पहली जीत दिसंबर-1959 में इसी मैदान पर मिली। खास बात यह है कि ये जीत अजेय कही जाने वाली आस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली। यहां 29 अक्टूबर-2017 को पहला डे-नाइट मुकाबला हुआ। ग्रीनपार्क में 22 सितंबर-2016 को हुए भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए 500 वें टेस्ट का गवाह बन चुका है। यहां अब तक कुल 32 शतक लग चुके हैं, शतकवीरों में 19 भारतीय क्रिकेटर हैं। यहां हुए मैचों में सर्वाधिक 25 विकेट लेने का रिकार्ड कप्तान कपिल देव के नाम दर्ज है। यहां तीन मैचों में स्पिनर अनिल कुंबले ने 21 विकेट हासिल किए थे।

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