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पेट की भूख या पैसों की मजबूरी उठवा रही मासूमों से बोझ

पेट की भूख या पैसों की मजबूरी उठवा रही मासूमों से बोझ
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कानपुर देहात । एएनएन (Action News Network)

जनपद में देखे जा रहे बाल मजदूरों की मजदूरी बाल श्रम विभाग के अधिकारियो की उदासीनता को साफ बयां करती है। जनपद में जगह- जगह अपने वजन से ज्यादा बोझ उठाते बाल मजदूर साफ देखने को मिल जाते हैं। यह मजबूरी या तो भूख की है या फिर पैसे की। सबसे बड़ी बात इस कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी में बाल श्रमिकों बिना मास्क के ही काम कराया जा रहा है।

देश में बाल मजदूरी को करना और करवाना दोनों ही अपराध की श्रेणी में रखे गए हैं। सरकार ने कानूनी तौर पर बाल श्रमिकों से मजदूरी कराना एक दंडनीय अपराध माना है। इसको लेकर कई कानून भी बनाये गए हैं।

इसी के साथ बाल श्रम को रोकने के लिए सरकार ने अलग से एक बाल श्रम विभाग का भी निर्माण करवाया था। सबसे बड़ी बात है कि इस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को जमीनी स्तर पर कम ही देखा जाता है। यही कारण है कि जगह- जगह आपको बाल मजदूरी करते मासूम नजर आ जाते है।

जनपद के रूरा, गजनेर , सरवनखेडा आदि जगह पर बाल मजदूरी करते बच्चे मिल जाते हैं। सबसे बड़ी बात जनपद में रनिया और नबीपुर में इंडस्ट्रीज का हब है यहां बड़ी बड़ी कंपनियां भी हैं। यहां पर भी आपको कहीं न कहीं बाल मजदूर अपने वजन से ज्यादा का बोझा उठाए आराम से देखने को मिल जाएगा।

जनपद के कुछ लोगों की बात माने तो उन्होंने इस सम्बंध में अपनी राय देते हुए बताया कि सरकार लगातार बच्चों की पढ़ाई के लिए कई कार्य कर रही है। इसके बाद भी कुछ उदासीन अधिकारियों की उदासीनता के चलते जनपद में पढ़ाई करने वाले बच्चे काम कर रहे हैं। सरकार को ऐसे लोगों पर भी कार्यवाही करनी चाहिए।

देश आज एक वैश्विक महामारी से लड़ रहा है और इससे जितने के लिए सरकार ने सोशल डिस्टसिंग और मुंह और नाक को ढक कर रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं अगर इस तस्वीर की बात की जाए तो यहां कुछ मासूम बिना मास्क के ही बाल मजदूरी करते नजर आ जाएंगे।

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