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आत्महत्या के मामलों पर लगेगा अंकुश, स्कूलों में होगी काउंसिलिंग

गाजियाबाद। एएनएन (Action News Network)

प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने आत्महत्या के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की काउंसिलिंग कराने के निर्देश दिए। इस पर सीएमओ ने मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकारी, अर्द्धसरकारी, कस्तूरबा विद्यालय और संप्रेक्षण गृह में रह रहे बच्चों की भी काउंसिलिंग कराई जाएगी।

सीएमओ डाॅ. एनके गुप्ता ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयों में काउंसिलिंग के अलावा साइकोलॉजिस्ट के माध्यम से छात्र-छात्राओं का परीक्षण भी कराया जाएगा। सीएमओ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर इस संबंध में माइक्रो प्लान तैयार करने के लिए कहा है।

मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नीरज कुमार अग्रवाल ने बताया कि माइक्रो प्लान मिलने के साथ ही विभाग की टीम विद्यालयों में जाकर काउंसिलिंग शुरू कर देगी। इस टीम में साइकोलॉजिस्ट भी मौजूद रहेंगे। काउंसिलिंग के दौरान चिन्हित छात्र-छात्राओं का परीक्षण साइकोलॉजिस्ट द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही यदि किसी बच्चे के उपचार की जरूरत होगी तो विभाग उसका निशुल्क उपचार करेगा और जरूरत पड़ने पर उसे पुराना महिला अस्पताल स्थित मनकक्ष में बुलाकर कांउसिलिंग भी की जाएगी।

काउंसिलिंग और साइकोलॉजिस्ट परीक्षण कराए जाने का सेशन विद्यालयों के अलावा संप्रेक्षण गृहों, बाल आश्रमों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी चलाया जाएगा। एसीएमओ का कहना है छात्र-छात्राओं में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृति पर काबू पाने के लिए विभाग कृत संकल्प है। जरूरत ऐसे बच्चों की समय से पहचान करने की है। इसके लिए विभाग की ओर से हर विद्यालय से एक शिक्षक को ट्रेनिंग दी गई है। इस शिक्षक की जिम्मेदारी बच्चों के व्यवहार परिवर्तन पर नजर रखने की होगी।

इसके अलावा शिक्षक को यह भी ध्यान रखना होगा कि किसी छात्र का प्रदर्शन अचानक गिर तो नहीं रहा है। यदि ऐसा होता है तो शिक्षक को उसकी काउंसिलिंग करनी होगी और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विभाग की मदद लेनी होगी।

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