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आर्थिक संकट से उबरने के लिए स्वदेशी का मार्ग अपनाना होगा : कश्मीरी लाल

आर्थिक संकट से उबरने के लिए स्वदेशी का मार्ग अपनाना होगा : कश्मीरी लाल
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लखनऊ । एएनएन (Action News Network)

भारत को कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी से निपटने के साथ ही अपनी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना होगा। इसके लिए स्वदेश अर्थतंत्र ही आधार होगा, तभी इस संकटकाल से बाहर निकल पाएंगे। आर्थिक संकट से उबरने के लिए स्वदेशी का मार्ग अपनाना होगा।

उक्त बातें स्वदेशी जागरण मंच के आर. सुन्दरम, स्वदेशी जागरण मंच के संयोजन कश्मीरी लाल ने सोमवार देर रात एक मुख्य व्याख्यान में देशभर के स्तम्भकारों को सम्बोधित करते हुए कही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भगवत ने 26 अप्रैल को ऑनलाइन व्याख्यान दिया था, जिसमें समाज सेवा, समरसता, अर्थव्यवस्था जैसे अनेक सामयिक विषय शामिल थे। इसमें भविष्य में भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया गया था। उसी व्याख्यान को आधार मानकर दोनों वक्ताओं ने देशभर के स्तम्भकारों को वेबीनार के जरिए सम्बोधित किया।

कोरोना को चायनिज वायरस बोलें

बेबीनार के जरिये स्तम्भकारों को सम्बोधित करते हुए द्वय वक्ताओं ने कहा कि यह कोरोना वायरस चीन की सोची समझी षड्यंत्र का हिस्सा है। इसे चायनिज वायरस बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारतीय आर्थिक मॉडल खड़ा किया जाए ​क्योंकि चायनिज मॉडल लोकतंत्र विरोधी है।

भारत के चिन्तन से ही विश्व का कल्याण संभव

इस बेबीनार में वक्ताओं ने स्वदेशी को अपनाने पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि पूंजीवादी व साम्यवादी दोनों व्यवस्थाएं विफल साबित हुई हैं। भारत के चिन्तन से ही विश्व का कल्याण संभव है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिदृश्य भारत को ही मुख्य भूमिका निभानी होगी।

स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर बल देना होगा

उन्होंने कहा कि स्वदेशी का आचरण आज हमारा सम्बल बना है। समाज और देश को स्वदेशी को अपनाना होगा। संकट को अवसर के रूप में समझने की आवश्यकता है। इसी से बेहत्तर भारत की राह निर्मित होगी। स्वदेशी उत्पाद में क्वालिटी पर ध्यान देने की आवश्यकता है। विदेशों पर निर्भरता को कम करते हुए स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर बल देना होगा।

कोरोना को परास्त करने के लिए आत्मसंयम का परिचय दें

वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान के मुकाबले के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयारी करनी होगी। आज जो अस्त व्यस्त हुआ है, उसे ठीक करने में समय लगेगा। बाज़ार,फैक्ट्री,उद्योग शुरू करने में भी सावधानी दिखानी होगी। कोरोना को परास्त करने के लिए आत्मसंयम का परिचय देना होगा।

अर्थव्यवस्था का भारतीयकरण करना अपरिहार्य

उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अर्थव्यवस्था का भारतीयकरण करना अपरिहार्य है। आर्थिक क्षेत्र में स्वावलंबन को महत्व देना होगा। केवल नौकरी से सबका भला नहीं हो सकता। स्वरोजगार की व्यवस्था करनी होगी। अर्थनीति, विकासनीति की रचना अपने सिस्टम के आधार से करना होगा। भारतीय चिंतन के अनुरूप नीति बनाने पर बल दिया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा

द्वय वक्ताओं ने कहा कि आज भी अधिसंख्य आबादी गांव में रहती है। इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होगा। सर्वाधिक रोजगार का सृजन यहीं से होगा। इसी के साथ पर्यावरण का संरक्षण करना होगा। यह कार्य भी भारतीय चिन्तन से संभव है। पृथ्वी सूक्त का सन्देश भारत ने ही दिया। इस पर अमल करना आवश्यक है।

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