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लॉकडाउन की मंदी में अब उडऩे लगे पाली में कपड़ा उद्योग के चटख रंग

लॉकडाउन की मंदी में अब उडऩे लगे पाली में कपड़ा उद्योग के चटख रंग
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पाली । एएनएन (Action News Network)

कपड़े पर चटख रंगों की बदौलत रंगाई-छपाई के लिए मशहूर पश्चिमी राजस्थान के पाली शहर में टेक्सटाइल मार्केट के रंग लॉकडाउन की मंदी में उड़ चुके हैं। पाली में कपड़े के प्रोसेसिंग की फैक्ट्रियां अभी पूरी तरह से नहीं खुली हैं। आगे खुलने के बाद भी पहले की तरह कामकाज जल्द पटरी पर लौटने की उम्मीद कम है। मजदूर और कारीगर अपने घर लौट रहे हैं। कपड़ा उद्योग से जुड़े कारोबारियों के सामने कोरोना के चलते श्रम और पूंजी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

राजस्थान में पाली समेत भीलवाड़ा, किशनगढ़, बालोतरा, जसोल, बिठूजा व जोधपुर में 2 हजार 375 टेक्सटाइल इकाइयां हैं। पाली व बालोतरा में कॉटन व पॉपलिन का उत्पादन होता है। भीलवाड़ा में पीवी सूटिंग का कपड़ा बनता है। बालोतरा में प्रोसेसिंग इकाइयां भी हैं। सरकार की लाख कोशिश के बीच प्रदेश की टेक्सटाइल इकाइयों में उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। भीलवाड़ा में निर्यात ऑर्डर पूरे करने के लिए कुछ फैक्ट्रियों में उत्पादन शुरू हुआ है।

कपड़ा कारोबारी कहते हैं कि दोबारा काम शुरू करने के लिए पूंजी की जरूरत है, क्योंकि पहले बिके माल का पेमेंट आ नहीं रहा और जो नकदी बची थी वह श्रमिकों की मजदूरी, फैक्ट्री का किराया व अन्य जरूरतों में खर्च हो गई। अब मजदूरों की घर वापसी के कारण आगे कामकाज चल नहीं पाएगा। लॉकडाउन के पहले जो ऑर्डर मिले थे, सब कैंसल हो गए हैं। एक अन्य समस्या यह है कि कपड़े पर रंगाई के लिए सभी प्रकार का रंग इत्यादि कच्चा माल चीन से आयात होता है। आयात बंद होने से कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है। महाराष्ट्र के इचलकरणजी और आसपास के क्षेत्र में तैयार होने वाला ग्रे कपड़ा अगली प्रक्रिया के लिए राजस्थान के पाली, बालोतरा, जयपुर, जोधपुर और गुजरात के अहमदाबाद आदि स्थानों पर आता है। यहां कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण प्रोसेसिंग कार्य में समस्या उत्पन्न हो रही है।

पाली टेक्सटाइल हैण्ड प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय बम्ब कहते हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण की कड़ी को तोडऩे के प्रभावी उपाय के तौर पर केंद्र व राज्य सरकार ने लॉकडाउन के दौरान कुछ शर्तों के साथ नियंत्रण क्षेत्र के बाहर दुकानों व फैक्ट्रियों को खोलने की इजाजत दी है। लेकिन, कपड़ा व परिधान उद्योग में कामकाज सुचारु ढंग से होने की संभावना कम है, क्योंकि कारोबारियों के सामने वित्तीय संकट के अलावा कई समस्याएं पैदा हो गई है।

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