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बिहार में लागू होगा गुजराती सहकारी मॉडल, जैविक खेती और ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा

पटना.

सहकारिता विभाग द्वारा गुजरात में सफल सहकारी समितियों के माडल को लागू कराने की तैयारी हो रही है। इसके लिए विभागीय स्तर से सहकारी समितियों के 50-50 लोगों की टीम गुजरात के दौरे पर भेजी जाएगी। ये टीमें गुजरात में कार्यरत सहकारी समितियों के कार्यों का अवलोकन और अध्ययन करेंगी।

बिहार में 28 हजार सहकारी समितियां हैं जिनके अध्यक्षों व सचिवों के अलावा सदस्यों की अलग-अलग टीम बनाकर गुजरात भेजी जाएगी। वहां से लौटने के बाद संबंधित सहकारी समितियों को गुजरात में कार्यरत समितियों की तरह कार्य करने हेतु प्रेरित किया जाएगा।

हाल में गुजरात में कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर लौटे सहकारिता मंत्री
डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि गुजरात में सामूहिक जैविक खेती जैसे नवाचार सफल माडल साबित हुआ है। गुजरात में सहकारी समितियां किसानों को सीधे जोड़कर, उन्हें जैविक खेती का प्रशिक्षण, प्रमाणित जैविक इनपुट (बीज, खाद) और उत्पाद की अच्छी मार्केटिंग सुनिश्चित करके जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं। भारत ऑर्गेनिक जैसी संस्थाएं और डेयरी, गोबर से खाद बनाकर और फसलों की जैविक खरीद-बिक्री के लिए जीयूजेको और अमूल जैसे नेटवर्क का उपयोग करती हैं। जब गुजरात से ऐसी सहकारी समितियों का कार्यानुभव लेकर टीम लौटेगी तब जैविक खेती में गुजरात मॉडल का सफल प्रयोग सहकारी समितियों के सहयोग से किया जाएगा।

जैविक खेती में नवाचार दिखाने वाले किसानों की ब्रांडिंग से लेकर मार्केटिंग की व्यवस्था की जाएगी। जैविक उत्पादों की खरीद और बेहतर मूल्य से लेकर बाजार उपलब्ध कराने की कार्य योजना बनायी जाएगी। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को जैविक खेती में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। ऐसे उत्पादों को पंजीकरण कराने से लेकर प्रमाणन की व्यवस्था भी होगी। गुजरात के भरूच जैसे क्षेत्रों में केले के तने से रेशा और वर्मी कम्पोस्ट जैसे जैविक उत्पाद बनाकर आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस तरह के कार्य उत्तर बिहार के केला उत्पादन वाले इलाकों में बखूबी संभव है। इसी तरह गुजरात में अमूल जैसी सफल सहकारी संस्थाओं की कार्यशैली ने वहां ग्रामीण आजीविका को नई ताकत दी है। यह कार्य बिहार में भी सहकारी समितियों से होगा।

स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार के अवसर
सहकारिता विभाग ग्रामीण इलाकों में इको टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय युवकों को रोजगार के अवसर देने पर भी काम कर रहा है। इसके लिए टैक्सी सर्विस स्कीम भी लॉन्च करने की योजना बन रही है। इससे स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार प्रदान करने की मदद मिलेगी। गुजरात में महिलाओं द्वारा संचालित दुग्ध समितियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यही प्रयोग बिहार के सभी गांवों में महिलाओं द्वारा दुग्ध समितियों के संचालन में होगा।हर गांव में दुग्ध सहकारी समिति गठित की जा रही है। प्रोटीन कंसन्ट्रेट पाउडर प्लांट जैसी नई इकाईयां लगायी जाएंगी। जाहिर है, इससे डेयरी क्षेत्र में रोजगार बढ़ेंगे।

तकनीक और पारदर्शिता पर जोर
डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाने से भी सहकारी समितियों को ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता लाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि सहकारी समितियों के सदस्य किसानों का भरोसा और मजबूत हो। सरकार का लक्ष्य है कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी की जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और नई योजनाओं को लागू करने पर फोकस किया जा रहा है।

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