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उधम सिंह नगर जिले की तीन महिलाएं तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित

उधम सिंह नगर जिले की तीन महिलाएं तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित
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रुद्रपुर । Action India News

भ्रूण हत्या, बाल कल्याण और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहीं रुद्रपुर राइजिंग फाउंडेशन की महिला विंग की अध्यक्ष चंद्र कला राय (मनीषा) सहित तीन महिलाओं को इस साल का तीलू रौतेली पुरस्कार दिया गया। शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय स्थित सभागार में जिलाधिकारी रंजना राजगुरु के हाथों यह सम्मान पाकर उनके चेहरे खिल उठे।

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से शनिवार को वीसी व मीटिंग सभागार में राज्य स्त्री शक्ति तीलू रौतेली पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित हुआ। जिलाधिकारी रंजना राजगुरु ने तीलू रौतेली पुरस्कार से रुद्रपुर की चन्द्रकला राय, काशीपुर की ज्योति अरोरा व मीनू लता गुप्ता को सम्मानित किया। उन्हें प्रशस्ति पत्र व 21-21 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया। जिलाधिकारी ने तीनों सम्मानित महिलाओं को बधाई दी और कहा कि यह सम्मान मिलने के बाद समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गयी है।

रुद्रपुर राइजिंग फाउण्डेशन की महिला विंग की अध्यक्ष चंद्र कला राय को तीलू रौतेला पुरस्कार भ्रूण हत्या, स्वच्छता व पर्यावरण तथा महिला एवं बाल कल्याण क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए दिया गया है। वह पिछले छह वर्षों से सामाजिक कार्यो में सक्रिय हैं। इस दौरान वो शहर तथा ग्रामीण क्षेत्र में स्थित दर्जनों स्कूलों में जा -जाकर बालिकाओं और महिलाओं को भ्रूण हत्या तथा स्वच्छता मासिक धर्म के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनके द्वारा महिलाओं तथा लड़कियों को निःशुल्क सेनेटरी नेपकिन भी वितरित किये जा रहे हैं। इसके अलावा वो शहर को स्वच्छ व हराभरा बनाने के अभियान में भी सक्रिय भागेदारी निभा रही हैं।

चन्द्रकला राय ने कहा कि इस सम्मान के बाद समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी ओर बढ़ गयी है। अब वह और जोर शोर से बाल कल्याण व महिला जनजागरूकता के क्षेत्र में काम करेंगी। उन्होंने कहा कि पति अवनीश राय व परिजनों के प्रोत्साहन के कारण ही वो सामाजिक कार्य कर पाई हैं।

ज्योति ने बाल विवाह के रोकथाम के लिए जागरूक करने का तथा मीनू ने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सराहनीय कार्य किया है।

तीलू रौतेली के बारे में जानकारी

तीलू रौतेली, गढ़वाल की ऐसी वीरांगना जो महज 15 वर्ष की उम्र में रणभूमि में कूद पड़ी थीं। उनका जन्म आठ अगस्त, 1661 में हुआ था। उनका बचपन बीरोंखाल के कांडा मल्ला गांव में बीता। उनके पिता भूप सिंह गढ़वाल नरेश की सेना में थे। उन्होंने कई वर्ष तक दुश्मन राजाओं को छठी का दूध याद दिलाया था।

15 से 20 वर्ष की आयु में सात युद्ध लड़ने वाली तीलू रौतेली विश्व की एक मात्र वीरांगना हैं। युद्ध में शत्रुओं को हराने के बाद वह लौट रही थीं। कांडा गांव के पास हार से अपमानित रामू रजवार नाम के कन्त्यूरी सैनिक ने उन पर तलवार से हमला कर दिया था, जिसके बाद वह वीरगति को प्राप्त हुईं। उनकी याद में आज भी कांडा ग्राम व बीरोंखाल क्षेत्र के लोग कौथीग मेला आयोजित करते हैं।

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