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उत्तर प्रदेश

कौशाम्बी : खेत में बोरे से निकला जिन्दा युवक

कौशाम्बी : खेत में बोरे से निकला जिन्दा युवक
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कौशाम्बी। एक्शन इंडिया न्यूज़

चरवा थाना क्षेत्र के कमालपुर में जिन्दा बोरे से निकले शिवमूरत की अपहरण की कहानी में ट्विस्ट आ गया है। शिवमूरत की अपहरण की कहानी में एक सोची समझी साजिश की तरफ इशारा कर रही है। पुलिस शिवमूरत व रिस्तेदारों ने पूछ-ताछ कर दूध का दूध और पानी का पानी करने में लगी है। चरवा पुलिस जल्द घटना की कहानी का खुलासा कर पीड़ित युवक पर गंभीर धाराओं में कार्यवाही कर सकती है।

वाकया शनिवार की सुबह का है, एक 40 वर्षीय युवक चरवा थाना क्षेत्र के कमालपुर गांव के बाहर बोरे में बंद मिला। ग्रामीणों ने बोरे में लाश होने की सूचना पुलिस को दी। पुलिस की मौजूदगी में बोरे को खोलकर देखा गया। जिसमें से बेहोशी की हालत में युवक निकला। जिसकी पहचान प्रयागराज के थाना धूमनगंज निवासी शिवमूरत प्रजापति के रूप में हुई। होश में आने पर शिवमूर्ति ने अपना पता और नंबर बताया। घर वालों को सूचना दिए जाने पर वह घटना स्थल पर पहुंच घरवालों ने शिवमूरत के घर से एक सप्ताह से लापता होने की बात बताई। जिसके बदले घरवालों ने चरवा पुलिस को गुमशुदगी की रपट धूमनगंज थाने की दिखाई।

पत्नी शीला ने बताया कि उसके पति शिवमूरत एक सप्ताह पहले धूमनगंज के नीम सराय मोहल्ले से सुबह टहलने निकले थे। जो लौट कर घर नहीं आये। जिसकी गुमसुदगी प्रयागराज के धूमनगंज थाने में दर्ज कराई गई थी।

शिवमूरत ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया, वह सुबह टहलते हुए हैपी होम के पास पहुंचा था। तभी एक कार से चार अज्ञात बदमाशों ने उसे अगवा कर लिया। तीन दिन तक टहलने के बाद उसे आज सुबह फेंक कर भाग गए। वह अगवा करने वालों को नहीं जानता और पहचानता है। वह उससे जमीन के कुछ कागजों पर आंख में पट्टी बांध दस्तखत करा रहे थे।

इंस्पेक्टर चरवा अरविन्द त्रिवेदी ने बताया, शिवमूरत के मिलने के तरीके और उसके आरामदेह बोरे में होना पुलिस के लिए शक पैदा करता है। डाक्टरी परिक्षण में शिवमूरत पूरी तरह से हस्त-पुष्ट आया है। शरीर पर किसी तरह के चोट या प्रताड़ना के निशान नहीं मिले है। पूछ-ताछ में रिस्तेदारों ने जमीन का विवाद भाइयों से होना बताया गया है। भाई बाल मुकुंद और जिलाजीत प्रजापति से जमीन खरीद फरोख्त में रुपये के लेन देन की बात सामने आई है। जल्द ही अपहरण की कहानी का रहस्य का खुलासा किये जायेगा। पुलिस का समय बर्बाद करने के मामले में कार्यवाही से इंकार नहीं किया जा सकता।

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