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दुधवा टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन से किया गया अंलकृत

दुधवा टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन से किया गया अंलकृत
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लखनऊ। एक्शन इंडिया न्यूज़

उत्तर प्रदेश राज्य के दुधवा टाइगर रिजर्व को प्रतिष्ठित बाघ मानक अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन से अलंकृत किया गया है। इसकी खबर लगते ही वन विभाग में खुशी की लहर दौड़ गयी और एक दूसरे को बधाइयां देते रहे। वैश्विक बाघ दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह सम्मान देश के 13 अन्य टाइगर रिजर्वों सहित दुधवा टाइगर रिजर्व, उत्तर प्रदेश को भी दिया गया। इस सम्बंध में वन विभाग को भूपेन्द्र यादव, मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जानकारी दी गयी।

आईएफएस पवन कुमार शर्मा ने बताया कि यह अलंकरण विश्व स्तर पर व्याघ्र संरक्षण अथवा लक्षित प्रजाति के सरंक्षण हेतु किये जा रहे प्रबन्धन के उच्चतम मापदण्डों पर खरा उतरने वाले टाइगर रिजर्वों के संरक्षित क्षेत्रों को ही दिया जाता है। संरक्षण के प्रयासों को मापने हेतु वैश्विक तौर पर स्वीकृत इस प्रमाणन से स्पष्ट होता है कि सम्बंधित संरक्षित क्षेत्र का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा रहा है। वर्ष 2013 में औपचारिक रूप से आरम्भ हुए प्रमाणन की इस प्रक्रिया में वाह्य अभिकरणों एवं विशेषज्ञों द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय तौर पर कई कसौटियों पर प्रबंधन का मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें साक्ष्यों का परीक्षण भी किया जाता है। पूर्णतया संतुष्ट होने पर ही प्रमाणन प्रदान किया जाता है।

पवन कुमार शर्मा ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व को यह उपलब्धि बाघ संरक्षण के लिये निरंतर किये जा रहे प्रयासों, जैव विविधता संरक्षण, बाघ संरक्षण के साथ-साथ हित ग्राहियों के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक उन्नयन में योगदान इत्यादि बिन्दुओं के आलोक में प्राप्त हो सकी है। दुधवा टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण, भारत सरकार एवं भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून द्वारा तैयार किये गये परिष्कृत एस्ट्रा ईप्सस ऐप का उपयोग करते हुए वन क्षेत्रों में प्रभावी गस्त करने के मामले में देश में अग्रणी रहा है। इसके अतिरिक्त रिजर्व के वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन पर भी भरपूर बल दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश के टाइगर रिजर्वो में अंतरराष्ट्रीय तौर पर प्रतिष्ठित यह उपलब्धि प्राप्त करना उत्तर प्रदेश राज्य के लिये गौरव का विषय है। राज्य अपने राष्ट्रीय पशु बाघ एवं उसके प्राकृतिक वास संरक्षण हेतु सतत प्रयत्नशील एवं कृत संकल्पित है।

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