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उच्च शिक्षा में कम समय के अंतराल में विशिष्ट उपलब्धियां की हासिल

उच्च शिक्षा में कम समय के अंतराल में विशिष्ट उपलब्धियां की हासिल
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  • उपमुख्यमंत्री ने चार साल में उच्च शिक्षा के क्षेत्र की गिनाई उपलब्धियां

लखनऊ। एक्शन इंडिया न्यूज़

उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने वर्तमान सरकार के लगभग चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में बुधवार को उच्चशिक्षा विभाग की उपलब्धियों को सामने रखा। उन्होंने लोकभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वर्तमान सरकार में उच्च शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिला है। कम समय के अंतराल में हमने विशिष्ट उपलब्धियों को प्राप्त किया है।

  • सत्र के अनियमित होने की समस्याएं की दूर

उन्होंने कहा कि पहले सत्र का नियमितीकरण नहीं होने की समस्या रहा करती थी। वर्तमान सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सभी विश्वविद्यालयों के शैक्षिक सत्र को नियमित करने का काम किया। जुलाई माह में ही शैक्षिक कैलेंडर की घोषणा करते हुए उसके अनुसार परीक्षाएं कराने, कॉपियों की जांच और रिजल्ट निकालने की प्रक्रिया सम्म्पन्न करायी गई। खासतौर से सीसीटीवी कैमरों के जरिए नकलविहीन परीक्षाओं को सम्पन्न कराया गया। ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया गया।

30 निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालयों को आश्रय पत्र किया जारी

उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि कुल 30 निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालयों को आश्रय पत्र जारी किया गया है। जल्द ही स्किल डेवलेपमेंट, कप्यूटर, आईटी सहित विभिन्न विधाओं वाले खास नई निजी विश्वविद्यालय देखने को मिलेंगे।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नए विश्वविद्यालयों को भी खोलने के लिए प्रयत्नशील रही। इसके लिए अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। भूमि का नि:शुल्क आवंटन किया जा चुका है। इस सम्बन्ध में 100 करोड़ रुपये डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा द्वारा इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिए गए हैं। वहीं सरकार ने 200 करोड़ की व्यवस्था की है। इसी तरह सहारनपुर राज्य विश्वविद्यालय के लिए भी भूमि का चयन करके आगे की प्रकिया का पालन ​कराया जा रहा है। इसके लिए भी 100 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। मेरठ राज्य विश्वविद्यालय की अतिरिक्त आय से ये राशि इस विश्वविद्यालय के लिए दी जा चुकी है। इसी तरह आजमगढ़ विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि सम्बंधित प्रक्रिया गतिमान है और वहां पर 50 करोड़ रुपये वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर की अतिरिक्त आय को इसके लिए जारी किया जा चुका है।

  • विश्वविद्यालयों में शोध को दिया जा रहा बढ़ावा

उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालयों में शोध की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अनेक उपाय किए हैं। इनमें पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर में रज्जू भैया इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस ऑफ स्टडी एंड रिसर्च के अलावा रिसर्च सेंटर फॉर रिन्यूएबल एनर्जी एंड नेमी साइंस एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है। सरकार ने इसके लिए 32 पद शैक्षणिक और 11 अन्य पद सृजित किए गए हैं। यह सेंटर काम करने लगा गया है। उन्होंने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ की स्थापना की गई है। यहां भी 15 शैक्षणिक और 13 अन्य पद सृजित किये गये हैं।

उन्होंने कहा कि इतने कम समय में पूरे प्रदेश में अधिकांश राजकीय विश्वविद्यालयों में विभिन्न शोध पीठ की स्थापना की है। काशी विद्यापीठ, दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी कपिलवस्तु, सिद्धार्थ नगर, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया, लखनऊ विश्वविद्यालय में विभिन्न शोध पीठों की स्थापना की गई है।

  • विश्वविद्यालयों में विशेषज्ञ विषय वस्तु संचालित करने की पहल

उन्होंने बताया कि अलग-अलग विश्वविद्यालयों में कुछ विशेषज्ञ विषय वस्तु को संचालित करने की भी पहल की गई है। इसी कड़ी में सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी कपिलवस्तु, सिद्धार्थ नगर में इंटरनेशनल बुद्धिस्ट सेंटर एवं सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन हिन्दुइज्म, बुद्धिइज्म एवं जैनिज्म के रूप में विकसित किए जाने के लिए शासनादेश 2018 में जारी कर दिया गया। यहां भी 21 शैक्षणिक और 24 शिक्षणेत्तर पदों का सृजन किया है। शोध एवं अनुसंधान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रदेश में रिसर्च एंड डेवलपमेंट पॉलिसी घोषित की गई है।

  • पिछड़े जनपदों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को टेबलेट उपलब्ध कराने की योजना

उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश के महत्वकांक्षी जनपद अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्र हैं। यहां छात्र-छात्राएं मोबाइल, इंटरनेट या अन्य ई लर्निंग से सम्बन्धित सामग्री से सुसज्जित नहीं है। इसके मद्देनजर इन महत्वकांक्षी जनपदों के राजकीय महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को टेबलेट उपलब्ध कराए जाने की शासन की योजना है, ताकि इन पिछड़े अंचलों के छात्र-छात्रा भी ऑनलाइन शिक्षण का लाभ प्राप्त कर ज्ञानार्जन में वृद्धि कर सकें। प्रदेश में सात जनपदों फतेहपुर, चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर और बलरामपुर के 18 राजकीय महाविद्यालयों के पुस्तकों में प्रीलोडेड टेबलेट उपलब्ध कराए जाने की योजना प्रस्तावित है।

  • डिजिटल लाइब्रेरी का बड़े पैमाने पर छात्र-छात्राओं ने उठाया लाभ

उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा को वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी के वैश्विक स्तर पर लाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा डिजिटल लाइब्रेरी का 28 अक्टूबर को लोकार्पण किया गया।

प्रदेश के 23 विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों के सक्रिय योगदान तथा शिक्षा जगत के लगभग 1,700 शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों की सहभागिता और टीमवर्क के फलस्वरुप 73,468 से भी अधिक ई कंटेंट छात्रों के लिए नि:शुल्क उपलब्ध हैं। डिजिटल लाइब्रेरी में हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में 134 विषयों के एक लाख ई कंटेंट वर्तमान में उपलब्ध हैं और शिक्षकों द्वारा लगातार कंटेंट तैयार करके अपलोड किए जा रहे हैं, जिसे छात्र-छात्राओं द्वारा 2,57,661 बार देखा गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल की विषम परिस्थितियों से जब पूरा विश्व जूझ रहा था, उस समय उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश स्तरीय बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2020 सफलतापूर्वक संपन्न कराई। उच्च शिक्षा विभाग की करायी यह परीक्षा पूरे देश के लिए मॉडल साबित हुई।


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