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उत्तराखंडः मुख्यमंत्री ने दिए हल्द्वानी के वनभूलपुरा में कर्फ्यू के आदेश

उत्तराखंडः मुख्यमंत्री ने दिए हल्द्वानी के वनभूलपुरा में कर्फ्यू के आदेश
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  • राज्य में कोरोना के खिलाफ लम्बी लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा ः त्रिवेन्द्र

  • विदेशी और घरेलू तकरीबन 2500 पर्यटक लॉकडाउन के दौरान उत्तराखंड में फंसे

  • दून कॉलेज और एक निजी अस्पताल को कोरोना सैम्पल की जांच की अनुमति

देहरादून। एएनएन (Action News Network)

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके में कर्फ्यू लगाने के आदेश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने वनभूलपुरा क्षेत्र में रविवार को हुई घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव और सचिव (गृह) को इस बारे में आज निर्देश दिये।आज शाम यहां मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले 100 घंटे में कोरोना का कोई नया केस अभी सामने नहीं आया है। अब तक कुल 7 मरीज ठीक होकर अस्पतालों से चले गए हैं और दो-तीन लोग भी एक-दो दिनों में ठीक होकर अपने घरों को चले जाएंगे।

इसके बावजूद कुल मिलाकर देखा जाए तो कोरोना के जो लक्षण हैं, वह कई बार जल्दी सामने नहीं आते हैं। कई बार तो कई-कई दिनों के बाद इसके लक्षण सामने आ रहे हैं, इसलिए बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपना चेहरा जरूर ढककर रखें। अगर मास्क नहीं है तो रुमाल से ही ढककर रखें लेकिन चेहरे को ढकना जरूरी है। अगर यह प्रयोग हम करते हैं तो लगभग 80 प्रतिशत हम सुरक्षित हो जाते हैं।

हल्द्वानी के वनभूलपुरा के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में हमारे जो धर्म गुरु हैं, सामाजिक कार्यों में पढ़े-लिखे लोग हैं, समझदार हैं, उन लोगों को इस मामले में आगे आने की जरूरत है वरना स्थिति कभी भी बेकाबू हो सकती है। आज कोरोना का जो दुष्प्रभाव हम देख रहे हैं, यह लंबी समस्या है और बहुत लंबे समय तक हमें सतर्कता के साथ रहने की जरूरत है। इसलिए बनभूलपुरा में जो कल देखने में आया, उसके मद्देनजर यह हमारी मजबूरी है कि आज हमें वहां कर्फ्यू लगाना पड़ा।

लॉकडाउन से भावी एक्जिट प्लान के बारे में पूछने पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस पर केंद्र सरकार ही अंतिम फैसला करेगी। केंद्र सरकार की एक कमेटी है, जो इस मामले को बारीकी से देख रही है। उत्तराखंड के अलावा भी राज्य हैंं, इसलिए आज शाम तक या कल तक इस बारे में केंद्र सरकार का आदेश आ जाएगा। फिलहाल यह हम सभी महसूस कर रहे हैं कि इस लॉकडाउन को हमें धीरे-धीरे सीमित करना होगा। प्रधानमंत्री ने बड़े ही सलीके से कहा था कि जान है तो जहान है। इसके निहितार्थ समझना होगा।

उत्तराखंड में कोरोना के संदिग्ध मरीजों के सैम्पल की जांच की रफ्तार कम होने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि दून कॉलेज और आहूजा प्राइवेट हॉस्पिटल में कोरोना के सैंपल जांचने की अनुमति मिल गई है। चूंकि उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है, जहां दुर्गम रास्तों की वजह से परिवहन में लंबा समय लगता है। इसलिए हमारा प्रयास है कि अगर श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को और जांच की अनुमति मिल जाए तो परिवहन में लगने वाले समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

लॉकडाउन के दौरान राज्य में फंसे पर्यटकों के बारे में उन्होंने बताया कि इनकी संख्या करीब ढाई हजार है। इनमें तकरीबन 1300 विदेशी और 1200 स्वदेशी पर्यटक हैं। इनमें पश्चिम बंगाल की संख्या सर्वाधिक है। पश्चिम बंगाल के लगभग पौने 200 पर्यटक हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु के भी हैं। उत्तर प्रदेश के भी 65 पर्यटक हैं। अन्य राज्यों के जो कामकाजी या रिश्तेदारी में आए लोग जो फंसे हैं, वे अलग हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन राज्यों के लोग यहां फंसे हुए हैं, उन राज्यों को भी पहल करके अपने राज्य के लोगों को लेना होगा अन्यथा हम भेज देंगे तो वे रास्ते में ही फंसे रहेंगे। इसलिए बेहतर है कि वो लोग यही रहें। कम से कम उनको भोजन- पानी तो मिल रहा है।

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