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जंगली जानवर के आतंक से परेशान हैं किसान, जगकर रात गुजारते हैं खेतों में

जंगली जानवर के आतंक से परेशान हैं किसान, जगकर रात गुजारते हैं खेतों में
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बेगूसराय । एएनएन (Action News Network)

बेगूसराय के किसान प्राकृतिक ही नहीं जंगली पशुओं के कहर से भी परेशान हैं। बेगूसराय के काबर झील इलाका, गंगा और गंडक दियारा के समेत पूरे जिला में इन दिनों जंगली जानवर किसानों के खून-पसीने से सिंचे गए फसल पर कहर बनकर टूट रहे हैं। सिर्फ इस सीजन में जिला के हजारों एकड़ खेत को जंगली जानवर तबाह कर चुके हैं। जिसके कारण इस लॉकडाउन में भी किसान अपना घर-बार छोड़कर खेत में रतजगा करने को मजबूर हैं। किसान पूरी रात खेतों में बैठकर नीलगाय, जंगली सूअर, लोमड़ी और बंदर से अपने फसल की रक्षा कर रहे हैं।

इसके बावजूद झुंड में आकर जानवर उनके फसलों को तबाह कर रहे हैं। खेतों में लगाए गए मक्का, सब्जी और गन्ना को सबसे अधिक क्षति पहुंचा रहे हैं। गेहूं को फसल पकने के कारण उसे खा तो नहीं रहे हैं, लेकिन रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। लेकिन इस संबंध में सरकारी महकमा के कान में जूं तक नहीं रेंगती है। किसानों के इस दर्द की ओर ध्यान नहीं देकर किसानों को अपने हाल पर रोते-बिलखते छोड़ दिया जाता है। नीलगाय किसानों के हरे फसल को प्रारंभ से ही चरना शुरू करते हैं। किसी तरह फसल कटने की स्थिति में आता है तो नीलगाय दौड़ कर फसल को रौंद डालते हैं।

दूसरी ओर जंगली सूअर खेतों में यत्र-तत्र अपने भोजन की तलाश में गड्ढा कर फसल को उखाड़ देते हैं। गीदड़ गन्ना की फसल को इस तरह पेड़ते हैं मानो उन्हें पेराई के लिए किसी ने ठेका दे रखा हो। जंगली जानवरों से निजात पाने के लिए किसान खेतों में जहरीली दवा का छिड़काव करते हैं, जिससे प्रकृति एवं पालतू पशुओं को नुकसान होने का अंदेशा रहता है, कभी-कभी गाय-भैंस भी उस फसल को खा कर मर जाते हैं। जानवरों से फसल को बचाने के लिए यांत्रिक तरीके का भी इस्तेमाल किसान करते हैं, जिसमें झटका मशीन प्रमुख है। झटका मशीन की खासियत है कि यह सोलर सिस्टम पर आधारित संयंत्र है।

फसल के चारों ओर बिजली के तारों का बाड़ा बनाते हैं और उसमें करंट फिट किया जाता है। इस करंट से जानमाल की क्षति नहीं होती है और सिर्फ जानवर को झटका लगता है तो जानवर दोबारा उस फसल की ओर नहीं आते हैं। लेकिन यह साधन महंगा है किसान इससे कम उपयोग करते हैं, साथ ही खेत में इस मशीन को लगाकर छोड़ देने पर चोरी का भी डर बना रहता है। जिला केे सैकड़ों किसानोंं ने अपने खेत को चारों ओर से मछली पकड़ने वाले जाल से घेर रखा है। लेकिन यह भी कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। नीलगाय जहां जाल के बाड़ा को तोड़ देते हैं, वहीं जंगली सूअर बीच से ही काट देते हैं।

बंदर पर तो इन सब में से किसी का प्रभाव नहींं पड़ता है, वह सब्जी को जमकर नुकसान पहुंचाते हैं। किसान सलाहकार अनीश कुमार का कहना है कि वन विभाग को इन जंगली पशुओं को किसानों की फसल नुकसान से बचाने के लिए शिकारी को हायर कर इस त्रासदी से मुक्ति दिलाने की व्यवस्था करे या उसके पापुलेशन ग्रोथ को रोके सभी गांव में उपलब्ध गौचर, गैर-मजरुआ या अन्य खाली पड़े जमीन में बाड़ा बनाकर इन जंगली जानवरों को छोड़ देने से भी फसल क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है।

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