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गांव में रोजगार पाकर श्रमिकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

गांव में रोजगार पाकर श्रमिकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
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जौनपुर । एएनएन (Action News Network)

कोरोना वायरस के मद्देनजर देश में मजदूरों के सामने सबसे बड़ी समस्या रोजी रोटी की है। ऐसे में प्रदेश सरकार के सामने अन्य राज्यों से आये मजदूरों को रोजगार देना सबसे बड़ी चुनौती है। प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश भर में मनरेगा योजना के तहत लोगों को रोजगार दे रही हैं। लॉकडाउन में मनरेगा योजना असहाय गरीब व अन्य प्रदेशों से आये हुए श्रमिकों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।

कम खायेंगे मजदूरी करेंगे, अपना गांव नही छोड़ेंगे

केराकत तहसील क्षेत्र अंतर्गत सेनापुर गॉव में मनरेगा योजना के अंर्तगत 200 सौ मजदूरों को रोजगार मिला। विभिन्न प्रदेश से लौटे मजदूरों को मनरेगा के तहत गांव में मिले काम से मजदूरों के चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। इस बाबत हिन्दुस्थान समाचार प्रतिनिधि से बात करते हुए मजदूर संजय गौड़, अजय प्रजापति, संगीता बिंद, मालती रावत आदि मजदूरों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मनरेगा से हम लोगों के घर का चूल्हा जलता है और हम अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। यदि सरकार द्वारा हम लोगों को गांव में काम नहीं मिलता तो परिवार भूखों मरने लगता। हम तो किसी प्रकार दिन रात गुजार लेते लेकिन हमारे बच्चे भूख से मर जाते।

जब महामारी में हम लोग लौट कर अपने गांव आए हैं तो सरकार द्वारा काम मिलने से हम फिर से जिंदा हो गए। अब हम अपना गांव छोड़कर नही जायेंगे, कम खायेंगे मजदूरी करेंगे लेकिन अपने घर रहेंगे। इस सम्बंध में ग्राम प्रधान रमेश कुमार से जब बात की गई उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के मंशानुरूप मनरेगा योजना का कार्य किया जा रहा। जिसमें गांव के साथ साथ प्रवासी लगभग 200 सौ मजदूरों को रोजगार मिला। मनरेगा तहत संपर्क मार्ग, मेड़बंदी व समतलीकरण कार्य किया जा रहा है। इसमें अन्य प्रदेशों से आये मजदूर सहित मनरेगा मजदूरों से कार्य करवाया जा रहा है। मनरेगा के तहत गॉव के विकास को गति मिल रही है। अन्य राज्यों से आए मजदूर मेहनत के साथ काम कर रहे हैं। क्या महिलाएं क्या पुरुष सभी बराबरी के साथ काम कर रहे हैं।

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