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योग शरीर से सभी प्रकार के विषाणु बाहर निकालने में सहायक - एसपी

योग शरीर से सभी प्रकार के विषाणु बाहर निकालने में सहायक - एसपी
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फर्रुखाबाद । एएनएन (Action News Network)

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने को लेकर पुलिस के जवानों ने पुलिस कप्तान अनिल कुमार मिश्रा की मौजूदगी में पुलिस लाइन में योग शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

इस मौके पर पुलिस कप्तान अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि योग में बहुत बड़ी शक्ति होती है। योग भगाए रोग, की कहावत के साथ-साथ किसी कवि ने लिखा है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने हमें जीवन जीने की कला सिखाई है। जिसके आगे बड़ी बड़ी महामारिया बौनी पड़ जाती हैं कवि कहते हैं की है आजकल की डॉक्टरी जिसकी महामाया मई, यह आसुरी नामक चिकित्सा है यहीं से ली गई। 'थे हार जाते अन्य देशों के वैद्य जब रोग से, हम भस्म करते थे उसे बस भस्म के ही योग से'। आयुर्वेद में औषधियों का खजाना भरा पड़ा है। जिनके जरिए से बड़ी-बड़ी महामारी और बड़े-बड़े वायरस नष्ट हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि योग का मतलब होता है जोड़, योग के माध्यम से आत्मा का संबंध परमात्मा से जोड़ते हैं और जब आत्मा और परमात्मा का मिलन होता है, तो शरीर के अंदर और बाहर एक विशेष तरह की तरंग छूटती है। जो हमारे अंदर व्याप्त विषाणु को पसीने के माध्यम से बाहर कर देती है। इसी वजह से योग असाध्य रोगों में भी कारगर है। हर रोग की दबा योग है। योग का मतलब आत्मा परमात्मा के बीच संबंध स्थापित करना है। जो लोग नित्य प्रयोग करते हैं वास्तव में निरोगी रहते हैं। उन्हें किसी तरह का रोग नहीं सताता। हमारे ऋषि-मुनियों ने योग और ध्यान दो जीवन की विधियां हमें सौंपी है। जिनके माध्यम से आज भी हम बड़े-बड़े रोगों को शिकस्त दे रहे हैं और आयुर्वेद का नाम दुनिया में रोशन कर रहे हैं।

एसपी ने कहा कि योग का महत्व बहुत बड़ा होता है। इसीलिए तो किसी कवि ने कहा है अभ्यास योग करते करते मन विषय रहित हो जाता है। अभ्यास योग जिन कर लेना वह परमेश्वर को पाता है। योग जीवन में बहुत आवश्यक है। जो लोग पूरी तरह से योग में निपुण हो जाते हैं। वह वास्तव में दैहिक दैविक तापों से दूर रहते हैं। उन्हें कोई रोग नहीं सता पाता। योग में और तमाम तरह की अच्छाइयां हैं। रावण का पुत्र मेघनाथ योग विद्या में निपुण था।

इसलिए जब हनुमान और लक्ष्मण उससे युद्ध करने के लिए गए, तो भगवान राम ने उनसे स्पष्ट कहा कि, वह योगी स्वयं योग द्वारा यदि चाहे तो मर सकता है। मर कर भी अपने प्राणों को तन में प्रविष्ट कर सकता है। इस कारण ऐसे योद्धा का तन छिन्न-भिन्न कर आना तुम। उसके सिर को बजरंगबली हाथों हाथों ले आना तुम। मेघनाथ के अंदर योग से वह शक्ति हो गई थी कि वह अपने प्राणों को तन से अलग कर सकता था और फिर उस शरीर में अपने प्राणों को प्रवेश कर सकता था। इसलिए भगवान राम ने हनुमान को उसके शरीर को नष्ट करने का ही आदेश दे दिया।

इस देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। करोना काल में योग करना बहुत जरूरी है। सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को नित्य योग करना चाहिए। आज यहां संपन्न हुए पुलिस लाइन में योग शिविर में जहां पुलिस के कर्मचारियों और अधिकारियों ने योगाभ्यास कर आत्मिक आनंद और मानसिक शांति की अनुभूत की। वहीं पुलिस कप्तान अनिल कुमार मिश्रा ने पुलिसकर्मियों को मास्क भी वितरित किए और कहा कि सुरक्षा बहुत जरुरी है।

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