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20 लाख प्रवासी कामगारों की चुनौती को अवसर में बदलने में जुटी योगी सरकार

20 लाख प्रवासी कामगारों की चुनौती को अवसर में बदलने में जुटी योगी सरकार
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  • सुरक्षित वापसी के साथ लेबर रिफार्म कानून के जरिए गांवों-कस्बों में ही रोजगार देने की योजना

लखनऊ । एएनएन (Action News Network)

लॉकडाउन में अन्य राज्यों में फंसे प्रदेश के कामगारों, श्रमिकों को वापस लाने में जुटी योगी सरकार अब उन्हें रोजगार प्रदान करने की कवायद में तेजी से जुट गई है। सरकार 20 लाख प्रवासी श्रमिकों, कामगारों की चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिशों में लगी हुई है। इसलिए कामगारों की सुरक्षित वापसी के साथ ही लेबर रिफार्म कानून के जरिए गांवों व कस्बों में ही नौकरियां, रोजगार देने की योजना बनाई गई है।

अब तक आठ लाख प्रवासी आ चुके हैं प्रदेश में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने बाहर से आ रहे 20 लाख श्रमिकों, कामगारों का एकांतवास केन्द्रों (क्वारंटाइन सेंटर) में ही स्किल डाटा तैयार करने के निर्देश दिये। प्रदेश में अब तक 8,00,000 प्रवासी पहुंच चुके हैं। तीन दिन में 80 ट्रेनों से करीब 1,25000 लोग राज्य के विभिन्न हिस्सों में आये हैं।

प्रतिदिन 35 से 40 ट्रेनों से पहुंचेंगे प्रवासी कामगार
अभी और 35 ट्रेनें आज प्रवासी कामगारों व श्रमिकों को लेकर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पहुंच रही हैं। प्रतिदिन 35 से 40 ट्रेनों से प्रवासी कामगार व श्रमिक प्रदेश में पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री योगी ने सभी की सुरक्षित व सम्मानजनक वापसी के साथ ही पूरी मदद के निर्देश दिये हैं।

विदेश से आज पहली फ्लाइट से लखनऊ आयेंगे श्रमिक
विदेशों में फंसे प्रवासी कामगारों, श्रमिकों को भी आज शारजाह से लेकर पहली फ्लाइट लखनऊ पहुंचेगी। इस जहाज में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के वे कामगार और श्रमिक मौजूद हैं जो रोजगार के लिए खाड़ी देश गए थे। सभी प्रवासी श्रमिकों, कामगारों को सरकारी एकांतवास केन्द्रों में स्वास्थ्य जांच के पश्चात राशन पैकेट व भरण पोषण भत्ता देकर घरों में एकांतवास में भेजा जा रहा है।

सबसे पहले योगी सरकार ने अपने लोगों का लाना किया ​था शुरू
देश में योगी सरकार ने सबसे पहले श्रमिकों को लाना शुरू किया था। आनंद​ विहार बस स्टेशन पर बसें भेज कर अपने कामगारों व श्रमिकों की सम्मानजनक वापसी के लिए सबसे पहले योगी सरकार आगे आई थी और अब तक सबसे ज्यादा लोगों को सुरक्षित ला चुकी है। एकांतवास का समय पूरा होते ही सरकार उनके रोजगार और नौकरी की व्यवस्था कर रही है।

मनरेगा, ईट भट्ठों के अलावा चीनी मिलों और एमएसएमई सेक्टरों में लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। जिनमें बीमारी के थोड़े भी लक्षण हैं, उन्हें कोविड अस्पतालों में उपचार के लिए भेजा जा रहा है। शुक्रवार को राजस्थान से 9,000 प्रवासी कामगारों व श्रमिकों को लाया गया। हरियाणा से 30,000 प्रवासी कामगार व श्रमिक राज्य परिवहन निगम की बसों से आ रहे हैं।

कामगारों को न्यूनतम 15 हजार रुपये वेतन की होगी गारंटी
इसके साथ ही सबको नौकरी, रोजगार देने के लिए लेबर रिफार्म कानून सरकार जल्द ला रही है। इससे प्रवासी श्रमिकों, कामगारों को फायदा होगा और रोजगार सृजन की व्यापक संभावनाएं बढ़ेंगी। लेबर रिफार्म में हर कामगार को नौकरी के साथ ही न्यूनतम 15 हजार रुपये वेतन की गारंटी होगी। इसके साथ ही उसके काम के घंटों व सुरक्षा की गारंटी भी रहेगी।
महिला कामगारों के लिए महिला सुरक्षा कानून के तहत सुरक्षा की गारंटी प्रदान की जायेगी। नई इकाइयों के साथ ही पुरानी इकाइयों में भी नई भर्तियों में लेबर रिफार्म कानून लागू होगा।

उप्र को एमएसएमई का हब बनाने की रणनीति
रेडिमेड कपड़ों के कारोबार के साथ ही साथ इत्र, धूप बत्ती, अगरबत्ती, एग्री प्रोडक्ट्स, फूड पैकेजिंग और गो आधारित कृषि के उत्पादों, फूल आधारित उत्पादों, कंपोस्ट खाद आदि के कारोबार पर रणनीति बनाने में सरकार जुट गई है। योगी सरकार का लक्ष्य रेडिमेड कपड़ों के साथ ही तमाम उद्योगों का हब प्रदेश को बनाने का है। चीन के बड़े उद्यमों के साथ ही साथ उत्तर प्रदेश को बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों की तुलना में बेहतर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का बड़ा हब बनाने के लिए सरकार रणनीति बना रही है।

53,400 आइसोलेशन बेड की हुई व्यवस्था
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी स्थानों पर सामुदायिक रसोई के जरिए जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराने की समीक्षा करते हुए कहा कि ये सिलसिला बना रहना चाहिए की प्रदेश में कोई भूखा नहीं रहेगा। सामुदायिक रसोई के माध्यम से सबको भोजन मिलता रहे यह सुनिश्चित किया जाए। इस बीच मुख्यमंत्री के एल-1, एल-2 तथा एल-3 डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों की क्षमता विस्तार करके 52,000 बेड की व्यवस्था किये जाने के निर्देशों के क्रम में आज तक 53,400 बेड की व्यवस्था की जा चुकी है।

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