चंडीगढ़: लोकसभा चुनाव 2024 और हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी देखने को मिली है. दरअसल, हरियाणा कांग्रेस के संगठन को बनाने के लिए इन दिनों स्टेट ऑब्जर्वर सभी जिलों का दौरा कर रहे हैं. लेकिन, ऑब्जर्वर के इन बैठकों में अब हंगामा की तस्वीर भी दिखने लगी है. करनाल में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला समर्थन को के बीच सड़क की वजह से अब यह मामला हाईकमान तक पहुंच गया है. करनाल में भूपेंद्र हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला के समर्थकों में लात घूंसे तक चलने की नौबत आ गई.
मल्लिकार्जुन खड़गे से रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा की मुलाकात: अब इस मामले को लेकर मंगलवार, 5 सितंबर देर रात को रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा ने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से दिल्ली में मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया से भी बात की. रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि, कांग्रेस के परिवार का हम पीढ़ी दर पीढ़ी हिस्सा है. कांग्रेस का उतार-चढ़ाव कुमारी सैलजा के पिता और मेरा परिवार देखते आए हैं.
विषम से विषम परिस्थितियों में जब सब लोग पार्टी छोड़कर चले गए, तब भी हम कांग्रेस परिवार और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को हरियाणा में जिंदा रखा. मैं और सैलजा जी आज उन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की वेदना उनकी तकलीफ उनकी पीड़ा, जिस प्रकार से उनको दरकिनार किया जा रहा है उसकी चर्चा पार्टी के अध्यक्ष से करने आए. हमने अपनी बात पूरी तरह से उनके समक्ष रखी. पार्टी के संगठन महासचिव के सामने रखी. परिवार की चर्चा परिवार में ही होगी. उसकी ज्यादा चर्चा बाहर नहीं होगी. – रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव
‘गुटबाजी के जरिए पार्टी में फूट डालने की कोशिश’: रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि, ऐसा प्रांत जिसे कांग्रेस जीतती आ रही है. एक सोची समझी नीति के तहत कुछ लोग उस प्रांत में बिखराहट पैदा करना चाहते हैं. उसे कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता. कोई कांग्रेस के घर को तोड़ने का प्रयास करे और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर, हताश करके छोड़ दे यह कभी मंजूर नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि, बुरे से बुरे वक्त में हमने कांग्रेस की सेवा की है और आगे भी करते रहेंगे. उस वेदना और पीड़ा को कांग्रेस अध्यक्ष तक और संगठन महासचिव तक पहुंचाने का दायित्व कुमारी सैलजा और हम सब का है. हम उस दायित्व को निभाने के लिए आए हैं.
हमें पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर पूरा विश्वास है. राहुल गांधी ने हरियाणा में सैकड़ों किलोमीटर पदयात्रा की. राहुल गांधी का हरियाणा से उनका अपना लगाव है. जब देश में किसान आत्महत्या कर रहा था तो उसकी अलख जगाने की शुरुआत सोनिया गांधी ने की थी. आज सोनिया गांधी जी, राहुल गांधी जी, मल्लिकार्जुन खड़गे जी की कांग्रेस, कांग्रेस के कार्यकर्ता की कांग्रेस, आज दर्द से कराह रही है. आज वह कांग्रेस अथाह वेदना है, अथाह पीड़ा में है. उसके निराकरण के लिए हम स्वाभाविक तौर पर पार्टी मुखिया के पास ही जाएंगे और उस वेदना की व्याख्या करेंगे. – कुमारी सैलजा, छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी
‘हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी चिंताजनक’: वहीं, इसके अलावा छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से हरियाणा कांग्रेस में जो कुछ चल रहा है उसी को लेकर हम पार्टी अध्यक्ष से मिलने आए हैं. हरियाणा में जिसने कांग्रेस को मजबूत किया है, उसी को दरकिनार कर बाहर वालों को प्रभारी जिले का प्रभारी बनाया जा रहा है, जिसके चलते कार्यकर्ताओं में असंतोष है. उन्होंने कहा कि हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी पार्टी के लिए सही नहीं है.
करनाल में कांग्रेस में गुटबाजी: बता दें कि, हरियाणा कांग्रेस में एक बार फिर गुटबाजी देखने को मिली है. मंगलवार, 5 सितंबर को करनाल में एक बार फिर से कांग्रेस में कलह देखने को मिली. जहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला के समर्थकों के बीच जमकर लात-घूंसे चले. इसके अलावा यमुनानगर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई. इस दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला के समर्थकों के बीच लात-घूंसे भी चले.
इस आधार पर जिलाध्यक्ष का नाम होगा तय: बता दें कि, 1 सितंबर को हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष ने प्रदेश में संगठन के निर्माण के लिए आगे कदम बढ़ाते हुए जिला अध्यक्ष ब्लॉक लेवल की कमेटियों के लिए ऑब्जर्वर घोषित किए थे. जिनको प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपनी है. रिपोर्ट के आधार पर ही जिला अध्यक्ष का नाम तय होगा. इसके बाद ऑब्जर्वर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर पार्टी के नेताओं से मिल रहे हैं. लेकिन, कई जगह पर अभी तक गुटबाजी के चलते हंगामा देखने को मिला है.
हरियाणा में लंबे समय से इन 2 गुटों में मतभेद: इधर हरियाणा में कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी काफी लंबे समय से चल रही है, जिस वजह से करीब एक दशक से प्रदेश में पार्टी का संगठन नहीं बन पाया है. मौजूदा दौर में एक तरफ नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गुट है तो वहीं दूसरी ओर रणदीप सुरजेवाला, कुमारी सैलजा और किरण चौधरी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनौती दे रहे हैं. वैसे भी वे पार्टी के कुछ कार्यक्रमों के अलावा प्रदेश में अपने स्तर पर अलग-अलग खड़े दिखाई देते हैं. ऐसे में पार्टी की ये लड़ाई आने वाले दिनों में क्या रूप लेगी यह देखना भी दिलचस्प रहेगा.