
‘इस्लामिक NATO’ में शामिल होने को बेताब बांग्लादेश! मक्का समझौते पर दिए लगातार उकसाने वाले बयान
नई दिल्ली
बांग्लादेश के बोल बिगड़ने लगे हैं। बीते कुछ ही दिनों में उसने बार-बार उकसाने वाले बयान दिए हैं। बड़ी ही चालाकी से बांग्लादेश ने एक सप्ताह में ही दूसरी बार ‘इस्लामिक नाटो’ कहे जा रहे मक्का समझौते में शामिल होने के संकेत दिए हैं। रविवार को एक नए बयान में ढाका ने कहा है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की वाले इस सैन्य समझौते से जुड़ने में उसे ‘कोई जोखिम नहीं’ दिखता और इससे दूसरे देशों के साथ उसके रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने रविवार को कहा है कि मक्का डिफेंस पैक्ट एक ‘अनूठा समझौता’ है और इससे बांग्लादेश के लिए नए रणनीतिक अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ढाका इस मुद्दे पर अपने द्विपक्षीय साझेदार देशों से चर्चा कर रहा है और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। कबीर ने कहा, "बांग्लादेश को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना होगा। किसी एक रक्षा सहयोग में शामिल होने का मतलब यह नहीं कि हम दूसरे देशों के साथ साझेदारी नहीं रख सकते।"
मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला- बांग्लादेश
हालांकि बांग्लादेश को फिलहाल इस समझौते में शामिल होने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है, लेकिन उसने इस तरह के बयान देकर भारत को उकसाने की कोशिश जरूर की है। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री खालिलुर रहमान ने संसद में कहा था कि अगर बांग्लादेश को इस समझौते में शामिल होने का न्योता मिलता है तो सरकार इस पर सकारात्मक विचार करेगी। उन्होंने इसे ‘मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला’ तक बता दिया था।
क्या है मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट?
गौरतलब है कि बीते 7 अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का में एक रक्षा समझौते पर दस्तखत किए थे। समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके अलावा तीनों देश रक्षा तकनीक का भी आदान-प्रदान करेंगे। इस समझौते को इस्लामिक नाटो की शुरुआत भी बताया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका के घटते प्रभाव को देखते हुए मुस्लिम देश अब अपनी सुरक्षा को लेकर विकल्प ढूंढ रहे हैं और इस्लामिक नाटो इसी दिशा में एक कदम है।
भारत के लिए चिंता?
अब बांग्लादेश भी इसमें शामिल होने की बात कर रहा है। पाकिस्तान पहले से ही समझौते में शामिल होकर उछल रहा है। ऐसे में बांग्लादेश इसमें शामिल हुआ तो भारत के लिए दोनों मोर्चों पर चिंताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि खाड़ी देशों के साथ भारत की विश्वसनीय साझेदारियां हमारे हक में हैं। इसके बावजूद भारत ने इस घटनाक्रम पर सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखे हुए है और भारत देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा।
बांग्लादेश में ही उठ रहे सवाल
बांग्लादेश के इस रुख पर खुद उसके देश में ही सवाल उठ रहे हैं। कई विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बांग्लादेश लंबे समय से गुटनिरपेक्ष यानी नॉन अलाइनमेंट की नीति अपनाता आया है और किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होना उसकी पारंपरिक विदेश नीति से अलग कदम होगा। पूर्व राजदूत महफुजुर रहमान का कहना है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की पहले से ही कई क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेश ऐसी स्थिति में नहीं है। उनके मुताबिक यह समझौता भविष्य में बांग्लादेश को युद्ध में भी खींच सकता है।




