
एमपी में बन रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग, विंध्य तक पहुंचेगा नर्मदा का जल; काम अंतिम चरण में
कटनी
मध्य प्रदेश के सिंचाई के इतिहास में बहुत जल्द मील का पत्थर जुड़ने जा रहा है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में निर्मित देश और प्रदेश की सबसे लंबी जल सुरंग (11.952 किलोमीटर) का निर्माण कार्य अंतिम ब्रेकथ्रू पर पहुंच गया है। यानी महज दो मीटर काम बाकी है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की बरगी व्यपवर्तन परियोजना के इस सबसे अहम हिस्से के पूरा होने के बाद बरगी बांध का पानी बिना किसी पंप के विंध्य अंचल तक पहुंचेगा।
इस परियोजना के जरिए एमपी के जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिले के 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। अक्टूबर से पानी पहुंचाने की तैयारी है। खास बात ये है कि, इन सभी गांवों में बरगी बांध का पानी बिना पंप के टनल के जरिए पहुंचेगा। इसके अलावा 12 किलोमीटर लंबी नहर भी बनाई गई है।
आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
इस महत्वपूर्ण काम को पूरा करने में आधुनिक तकनीक से लैस टनल बोरिंग मशीन का उपयोग किया गया. बताया गया कि स्लीमनाबाद के कठिन पठारी क्षेत्र को पार करना बड़ी चुनौती थी. टनल के अंतिम 4 मीटर हिस्से को पूरा करने में करीब 10 घंटे का समय लगा. इंजीनियरों और कर्मचारियों की मेहनत से यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सका।
बरगी डायवर्शन प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 1500 करोड़ रुपये है. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद नर्मदा नदी का पानी विंध्य क्षेत्र के कई जिलों तक पहुंच सकेगा. इससे लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
किसानों को सबसे अधिक लाभ
इस परियोजना से किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा. पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती को मजबूती मिलेगी और कृषि उत्पादन में सुधार आने की संभावना है. इसके साथ ही, जिन क्षेत्रों में लंबे समय से सिंचाई की समस्या बनी हुई थी, वहां भी राहत मिलेगी।
बरगी डैम से पानी पहुंचाने वाली यह परियोजना मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण विकास कार्य मानी जा रही है. इस टनल का निर्माण पूरा होना ही इस दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. अब परियोजना के अगले चरणों को पूरा करने के बाद नर्मदा जल का लाभ से जुड़े इलाके के लोगों तक पहुंच सकेगा।
इंजीनियरिंग के आगे पहाड़ झुका, बाधाएं टूटीं
परियोजना को 2008 में मंजूरी मिली थी। 2011 में सुरंग निर्माण शुरू हुआ। लागत 799 करोड़ रुपए आंकी गई थी। भूगर्भीय परिस्थितियों, ऊंचे भूजल स्तर, सिंकहोल (अचानक जमीन धंसने), कोरोना काल और निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत के कारण परियोजना पर लगभग 1442 करोड़ रुपए खर्च हुए। स्लीमनाबाद क्षेत्र में लगभग 30 मीटर गहराई पर खुदाई की गई। जर्मनी की टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उपयोग किया गया। 56 कटर चट्टानों को काटते हुए कई बार बदलने पड़े। सुरंग पर 20 मीटर चौड़ी जमीन सुरक्षा के लिहाज से अस्थायी रूप से अधिग्रहित की गई।
5 जिलों के हर घर में पहुंचेगा वाटर टनल से सीधा पानी
परियोजना पूरी होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा समेत कई जल संकट प्रभावित क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा. हजारों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और पेयजल संकट से भी राहत मिलेगी।
अमेरिकी मशीन भी नहीं कर पाईं खुदाई
स्लीमनाबाद की कठिन भूगर्भीय संरचना ने इंजीनियरों की राह बेहद मुश्किल बना दी. संगमरमर, चूना पत्थर, डोलोमाइट और स्लेट की परतों के बीच खुदाई के लिए वर्ष 2011 में लाई गई अमेरिकी रोबिन्स टनल बोरिंग मशीन भी टूट गई. वहीं, इसकी शुरुआती 1.6 किलोमीटर खुदाई में ही साढ़े छह साल लग गए. बाद में जर्मन तकनीक और नई मशीनों की मदद से काम आगे बढ़ाया गया।
197 किलोमीटर की बन रही है पूरी नहर
टनल निर्माण के दौरान 300 से अधिक बार सिंकहोल बनने की घटनाएं सामने आई. कहीं जहरीली गैस निकली, तो कहीं अचानक पानी का रिसाव हुआ. कई बार मिट्टी धंसने से निर्माण कार्य रोकना पड़ा. लगभग 80 परिवारों का विस्थापन भी करना पड़ा. इन चुनौतियों के बीच कई मजदूरों ने अपनी जान गंवाई. यही कारण रहा कि 799 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत बढ़कर करीब 1600 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. पूरी परियोजना में करीब 197 किलोमीटर लंबी नहर, पाइपलाइन और टनल प्रणाली विकसित की जा रही है।
डैमेज नहर की मरम्मत के लिए टेंडर का इंतजार
कटनी कलेक्टर अभिषेक तिवारी ने बताया कि "करीब 85 मीटर टनल की खुदाई करना अभी बाकी है. प्रतिदिन करीब 3 से 4 मीटर की खुदाई हो रही है. इस हिसाब से करीब 1 महीने में ये पूरा काम हो जाएगा. इसके बाद केबलिंग और अन्य कार्यो में 1 माह का समय लेगगा. इसके साथ ही पहले से तैयार नहर कई जगह पर डैमेज हो गई है, जिसकी मरम्मत के लिए भी टेंडर लगा दिए गए हैं. टेंडर इश्यू होते ही उसका भी काम शुरू किया जाएगा।
कई बार बढ़ाई गई समय सीमा
इस परियोजना का काम साल 2011 में शुरू हुआ था। सलैया फाटक से खिरहनी गांव तक पहाड़ों को चीरते हुए बनाई गई इस सुरंग के डाउन स्ट्रीम का कार्य पहले ही पूरा हो चुका था। अप स्ट्रीम का काम साल 2025 के अंत तक पूरा होना था, लेकिन समय सीमा कई बार बढ़ाई गई।
टनल से जुड़ी खास बातें
-टनल की लंबाई: 11.952 किलोमीटर
-निर्माण अवधि: 2011 से 2026
-लागत: 799 करोड़ से बढ़कर लगभग 1442 करोड़
-सिंचाई क्षमता: 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि
-लाभान्वित जिले: जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा
-लाभान्वित गांव: लगभग 1450 संभावित
-जलापूर्ति: अक्टूबर 2026



