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मध्यप्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए पूरे सिंडिकेट को किया जाएगा ध्वस्त : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के नशा मुक्त भारत के निर्माण के संकल्पों के अनुरूप प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू की गई है। राज्य सरकार और पुलिस अब मादक पदार्थों, सायबर अपराध, अवैध हथियारों तथा संगठित अपराध के नेटवर्क पर सतत प्रहार कर रही है। मध्यप्रदेश को 'नशा मुक्त' बनाने के लिए पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के आहवान पर मध्यप्रदेश को वर्ष 2029 तक पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिये हर स्तर पर सघन प्रयास किये जायेंगे।     

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय, के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था एवं आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस को अपनी कानून व सुरक्षा व्यवस्था के कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सांप्रदायिक सौहार्दृ बनाए रखना चाहिए और समाज को भी इसके लिए निरंतर प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्रो नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम का राज्यों में आकर व्यवस्थाओं का बारीकी से अध्ययन करना, मार्गदर्शन देना, सहयोग करना और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना एक अत्यंत सराहनीय व सकारात्मक पहल है। इस व्यवस्था से सही और दूरगामी निर्णय लेने में मदद मिलती है तथा प्रशासनिक व पुलिस तंत्र की त्वरित गति से कार्य करने की दक्षता बढ़ती है। मध्यप्रदेश में देश का एक आदर्श राज्य बनने की पूरी क्षमता है और राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के सतत मार्गदर्शन व समन्वय से प्रदेश को हर दृष्टि से एक ‘मॉडल राज्य’ बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार आधुनिक तकनीक और नए-नए प्रयोगों के सफल परीक्षण के बाद राज्यों को उन्हें लागू करने के अवसर उपलब्ध करा रही है और उनकी निरंतर मॉनिटरिंग भी कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कभी असंभव मानी जाने वाली नक्सल समस्या को प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में और गृह मंत्री  शाह के अटल इरादों के कारण निर्धारित समय-सीमा में खत्म करने में मदद मिली। प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध कड़ा प्रहार कर नियंत्रण पाया गया है। अब सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिये विस्तृत कार्य-योजना के तहत कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं में विश्वास जगाने के लिए वर्ष 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाया जायेगा। सांदीपनि विद्यालयों के जरिए उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान की जा रही है। भवन विहीन शालाओं के लिए भवन स्वीकृत किए गए है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। नक्सल मुक्त हुए क्षेत्र के विकास के लिए 400 करोड़ रूपये की योजना बनाई गई है। जनजातीय समुदाय में भरोसा बढ़ाने के लिए धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान चलाया जा रहा है। वनाधिकार पत्र जारी करने में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के नागरिकों के सुलभ और त्वरित आवागमन के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ की गई है। सिंहस्थ 2028 के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही है। कर्मचारियों में विश्वास जगाने के लिए 68 हजार कर्मियों को पदोन्नति दी गई है। अग्निवीरो के लिए यूनिफॉर्म सर्विसेज में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत दो वर्षों में 16,895 पदों पर भर्ती की गई है। अब पद रिक्त होने पर तत्काल भर्ती की प्रक्रिया आरंभ की जा रही है। वर्ष 2026 में 9,662 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। पुलिस बैंड में विगत कई वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रिया को पुन: प्रारंभ कर पुलिस बैंड को नया स्वरूप दिया गया है। पुलिस बैंड में 648 कर्मी भर्ती किए गए हैं। अब प्रत्येक जिले में राष्ट्रीय पर्वों पर पुलिस बैंड द्वारा आकर्षक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। प्रदेश सरकार ने लगभग 10 वर्षों से लंबित प्रमोशन की प्रक्रिया को प्रारंभ किया। विभिन्न संवर्गों में 27 हजार से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। ई-एचआरएमएस में 1 लाख से अधिक पुलिसकर्मी जोड़े गए है।

केंद्रीय गृह सचिव  गोविंद मोहन ने केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री  अमित शाह के विजन से सभी को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ से लगी सीमाओं को देखते हुए अपराधियों की अंतर्राज्यीय आवाजाही, हथियारों की तस्करी तथा ड्रग्स कॉरिडोर पर पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त आसूचना और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने नेटग्रिड के अधिक प्रभावी उपयोग, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘ड्रग-मुक्त कैंपस’ फ्रेमवर्क लागू करने, एनडीपीएस विशेष न्यायालयों की शीघ्र स्थापना तथा राज्य में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन पर जोर दिया।

मुख्य सचिव म.प्र. शासन  अशोक बर्णवाल ने केंद्रीय टीम को राज्य में कानून व्यवस्था और सभी वर्गों के सरकार के प्रति विश्वास जगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए गए है। सरकार द्वारा जन विश्वास अभियान चलाया जा रहा है।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने बताया कि राज्य में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में निरंतर नवाचार किये जा रहे हैं। पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के हित में भी निर्णय लिये जा रहे हैं।

बैठक में बताया गया कि सरकार किसानों में विश्वास बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों को एक लाख करोड़ रूपये की योजनाओं का सीधा लाभ दिया गया है। महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए 1 करोड़ 25 लाख महिलाओं को लाडली बहना योजना के तहत राशि हस्तांतरित की गई है। 18 लाख से अधिक बहनों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ देकर लखपति दीदी बनाया जा चुका है। वन स्टॉप सेंटर से एक लाख महिलाओं से सम्पर्क किया गया है।

बैठक में बताया गया कि कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये सरकार निरंतर कड़ी कार्रवाई कर रही है। पुलिस महकमे ने ड्रग्स बनाने वाली 17 गुप्त प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। आदतन ड्रग अपराधियों के विरुद्ध पीआईटीएनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई तेज की गई है तथा राज्य सायबर अपराध समन्वय केन्द्र ( एस4सी) अधिसूचित किया गया है। ई-साक्ष्य का कवरेज पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गया है तथा सभी जिलों में 57 मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध हैं।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में "नशे से दूरी है जरूरी 2.0'' अभियान में इस वर्ष 58 करोड़ सोशल मीडिया व्यूज तथा 2 करोड़ 47 लाख नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी रही। इसी प्रकार सेफ क्लिक अभियान 2 में डिजिटल अरेस्ट को रोकने में सफलता प्राप्त हुई। पुलिसकर्मियों में तनाव को दूर करने के लिए हार्टफुलनेस के साथ एमओयू किया गया। एक हज़ार से अधिक प्रशिक्षक तैयार किए गए तथा 50 हजार पुलिसकर्मियों ने हार्टफुलनेस में भागीदारी की।

बैठक में बताया गया कि तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में 90 दिनों के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करने की दर 69 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत (59 प्रतिशत) से अधिक है, तथा ई-समन की सीधी डिलीवरी में राज्य देश में सबसे आगे है।

बैठक में कानून-व्यवस्था, तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, मादक पदार्थ नियंत्रण, सायबर अपराध, आतंकवाद प्रतिरोध, विदेशियों से संबंधित विषयों, भगोड़ों के विरुद्ध कार्रवाई, पुलिस आधुनिकीकरण, पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय, आपदा प्रबंधन तथा शत्रु संपत्ति के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई।

बैठक में निदेशक आईबी, विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा)  आनंद स्वरूप, अपर सचिव (आपदा प्रबंधन)  अनुज्ञ शर्मा, महानिदेशक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो  अनुराग गर्ग और राज्य की ओर से अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह  संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा एवं संसदीय कार्य  अनुपम राजन, पुलिस महानिदेशक  वरुण कपूर, महानिदेशक होमगार्ड मती प्रज्ञा ऋचा वास्तव, विशेष पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान  पंकज कुमार वास्तव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स  डी. निवास वर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

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